हिंडन रिवरफ्रंट: नोएडा का नया ‘मास्टरस्ट्रोक’ या फाइलों से बाहर आने की जंग?
नोएडा में हिंडन नदी के कायाकल्प की बड़ी तैयारी है। ₹29,315 करोड़ के प्रस्तावित रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट से 25 किलोमीटर लंबे डूब क्षेत्र को नया रूप देने की योजना है। अब 5 सदस्यीय समिति नदी के मार्ग, बाढ़ और पर्यावरणीय क्षमता का अध्ययन कर रिपोर्ट देगी।
News Diary Today | Noida News
नोएडा न्यूज़ | नोएडा प्राधिकरण ने हिंडन नदी के कायाकल्प और 25 किलोमीटर लंबे डूब क्षेत्र को व्यवस्थित करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। इसके तहत लखनऊ के गोमती रिवरफ्रंट की तर्ज पर 29,315 करोड़ का मेगा ‘हिंडन रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट’ (Hindon Riverfront Project) प्रस्तावित किया गया है। हाल ही में प्राधिकरण ने इसके ‘कोर्स करेक्शन’ (नदी के मार्ग सुधार) और पर्यावरण क्षमता के अध्ययन के लिए एक 5 सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया है, जो अगले 15 दिनों में अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। बता दें कि लखनऊ के गोमती रिवरफ्रंट की भव्यता अब नोएडा में हिंडन नदी के तट पर भी देखने को मिल सकती है। वर्षों से प्रदूषण और अवैध अतिक्रमण की मार झेल रही हिंडन (हरनंदी) नदी के दिन अब बहुरने वाले हैं। नोएडा प्राधिकरण के मास्टर प्लान 2031 के तहत करीब 25 किलोमीटर लंबे इस हिस्से को पूरी तरह से री-डिफाइन करने का खाका तैयार किया गया है।
क्या है योजना और ‘कोर्स करेक्शन’?
समिति का मुख्य काम हिंडन नदी को उसके मूल मार्ग पर वापस लाना है। वर्तमान में नदी के दोनों किनारों पर भारी अतिक्रमण हो चुका है, जिससे इसका प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हुआ है। योजना के तहत नदी की धारा की चौड़ाई को 50 मीटर से बढ़ाकर 150 मीटर करने का प्रस्ताव है।यह समिति पिछले 25, 50 और 100 वर्षों के बाढ़ चक्र, भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) क्षमता और पर्यावरण स्थितियों का गहराई से अध्ययन करेगी।चूंकि यह एक इको-सेंसिटिव और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है, इसलिए मास्टर प्लान के नियमों के तहत यहां केवल 1% हिस्से पर ही अस्थायी या हटाने योग्य (Removable) पर्यटन संरचनाओं की अनुमति होगी।
29,315 करोड़ का बड़ा बजट ब्रेकअप?
इस महात्वाकांक्षी परियोजना के खर्च को बहुत ही विस्तृत रूप से विभाजित किया गया है। 15,000 करोड़: केवल भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) के लिए प्रस्तावित हैं। 7,240 करोड़: भूमि विकास और सिविल कार्यों (Land Development) पर खर्च होंगे। 4,000 करोड़: नदी किनारे बसे लगभग 10,000 परिवारों के विस्थापन और पुनर्वास के लिए आवंटित किए गए हैं। 2,425 करोड़: नदी के दोनों ओर शानदार 6-लेन चमचमाती सड़कों के निर्माण के लिए तय हैं।
3 चरणों में चमकेगा नोएडा?
यह पूरा 25 किलोमीटर का सफर छिजारसी (NH-9) से शुरू होकर नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे तक जाएगा, जिसे 3 अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा।पहला चरण: एनएच-9 (चोटपुर) से बिसरख रोड ब्रिज तक (8 किलोमीटर)।दूसरा चरण: बिसरख रोड ब्रिज से डीएससी (DSC) रोड ब्रिज तक (5 किलोमीटर)।तीसरा चरण: डीएससी रोड ब्रिज से सीधे नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे तक (12 किलोमीटर)।सड़कों के अलावा इस ग्रीन कॉरिडोर में वॉकिंग ट्रैक, मनोरंजक क्षेत्र, पार्क, पत्थर की पिचिंग और सुंदर घाट विकसित किए जाएंगे ताकि दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए यह सबसे बड़ा पिकनिक स्पॉट और कमर्शियल हब बन सके।वर्तमान में, नोएडा प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच इस परियोजना के समझौता ज्ञापन (MoU) और अंतिम मंजूरी को लेकर बातचीत का दौर जारी है। यदि इस बार यह फाइलों से निकलकर जमीन पर उतरता है, तो साल 2031 तक नोएडा का भूगोल और रियल एस्टेट बाजार पूरी तरह बदल जाएगा।


