नोएडा के बरौला सरकारी पशु चिकित्सालय पर ताला लटकने से 32 गांवों के पशुपालकों की परेशानी बढ़ गई है। तीन दिन से डॉक्टर और स्टाफ नदारद होने के आरोपों के बीच बीमार पशुओं का इलाज ठप है। दवाइयां मौजूद हैं, लेकिन इलाज करने वाला कोई नहीं!
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नोएडा न्यूज़ | नोएडा के बरौला सरकारी पशु चिकित्सालय में पिछले 3 दिनों से ताला लटका हुआ है, जिससे क्षेत्र के 30 से 32 गांवों के पशुपालक अपने बीमार पशुओं को लेकर दर-दर भटकने को मजबूर हैं। अस्पताल में जीवन रक्षक दवाइयों और बुनियादी सुविधाओं का पूरा स्टॉक मौजूद है, लेकिन इलाज करने के लिए डॉक्टर और स्टाफ नदारद हैं। बता दें कि उत्तर प्रदेश के नोएडा सेक्टर-49 स्थित सरकारी पशु चिकित्सालय बरौला इन दिनों अपनी बदहाली और प्रशासनिक घोर लापरवाही को लेकर सुर्खियों में है। सरकार एक तरफ ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुधन को बचाने के लिए ‘मुख्यमंत्री पशुधन निःशुल्क दवा योजना’ जैसी योजनाएं चला रही है, तो दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इसके उलट है। बरौला का यह मुख्य अस्पताल पिछले 72 घंटों से पूरी तरह बंद पड़ा है।
दवाइयों का अंबार, पर इलाज करने वाला कोई नहीं!
आस-पास के करीब 30 से 32 गांवों (जैसे बरौला, सर्फाबाद, सोरखा, सोरखा जाहिदाबाद, और आसपास के ग्रामीण इलाके) के ग्रामीण सुबह-सुबह अपने बीमार गाय, भैंस और बछड़ों को लेकर उम्मीद के साथ अस्पताल पहुंचते हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि अस्पताल के अंदर पर्याप्त मात्रा में दवाइयां और चिकित्सा उपकरण मौजूद हैं। लेकिन डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की गैर-मौजूदगी के कारण उन तालों को खोलने वाला कोई नहीं है।
निजी क्लीनिकों के चक्कर काटने को मजबूर गरीब पशुपालक!
दूर-दराज से आने वाले गरीब पशुपालकों का कहना है कि वे मीलों पैदल चलकर या गाड़ियों का भारी किराया देकर अपने पशुओं को यहाँ लाते हैं, लेकिन यहाँ सिर्फ बंद दरवाजे और ताले ही उनका स्वागत करते हैं। गंभीर रूप से बीमार पशुओं को बचाने के लिए इन ग्रामीणों को मजबूरन भारी-भरकम फीस देकर निजी क्लीनिकों जैसे वैट्स4पैट्स हॉस्पिटल या महंगे डॉक्टरों की शरण में जाना पड़ रहा है। जिन गरीब किसानों के पास पैसे नहीं हैं, वे अपने दम तोड़ते बेजुबानों को देखकर आंसू बहाने को विवश हैं।
ग्रामीणों की चेतावनी: जल्द समस्या हल नहीं हुई तो होगा आंदोलन
स्थानीय ग्रामीणों और पशुपालकों में इस अव्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश है। उनका आरोप है कि अधिकारियों को शिकायत देने के बावजूद कोई सुध लेने नहीं आया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 24 घंटे के भीतर अस्पताल का ताला नहीं खुला और डॉक्टर की स्थायी तैनाती नहीं की गई, तो वे मुख्य मार्ग पर पशुओं को लाकर चक्का जाम और उग्र प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।