ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी फायरिंग कांड में आठ साल बाद बड़ा फैसला आया है। अदालत ने चारों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। वहीं, जांच में खामियां मिलने पर पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है।
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G.noida:उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में बोड़ाकी गांव के पास करीब 8 साल पहले हुए एक सनसनीखेज फायरिंग मामले में अदालत ने बेहद चौंकाने वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मामले के सभी चारों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बाइज्जत बरी कर दिया है। इसके साथ ही, अदालत ने इस केस की जांच में गंभीर लापरवाही और कमियां पाए जाने पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। कोर्ट ने तत्कालीन जांच करने वाले 5 पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के लिए पुलिस के उच्च अधिकारियों को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। बता दें कि यह पूरा मामला साल 2018 का है, जिसकी जड़ें और पुरानी रंजिशों से जुड़ी हुई हैं। समाजवादी पार्टी के नेता के भाई चमन भाटी हत्याकांड में मुख्य गवाह कमल भाटी और उनके रिश्तेदार सदीप नागर पर बोड़ाकी गांव के नजदीक ताबड़तोड़ और अंधाधुंध फायरिंग की गई थी। इस जानलेवा हमले में कमल भाटी बाल-बाल बच गए थे।घटना के बाद पीड़ित कमल की तहरीर पर स्थानीय पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने अपनी तफ्तीश के आधार पर मनोज नगला,उमेश पंडित,योगेश डाबरा एवं जोगेंद्र शुक्ला को इस वारदात का मुख्य आरोपी बनाया था और कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी।
अदालत में कैसे पलटा पासा?
पिछले 8 सालों से कोर्ट में इस मामले की नियमित सुनवाई चल रही थी। अभियोजन पक्ष (पुलिस) अदालत के सामने आरोपियों के खिलाफ पुख्ता और अकाट्य सबूत पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा। गवाहों के बयानों और पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों में कई गंभीर विरोधाभास देखने को मिले। नतीजतन, अदालत ने आरोपियों को दोषी नहीं माना और उन्हें केस से बरी कर दिया।इस केस में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब माननीय न्यायाधीश ने मामले की लचर और त्रुटिपूर्ण विवेचना (जांच) पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने माना कि पुलिसकर्मियों ने केस को सही तरीके से हैंडल नहीं किया, जिससे असली सच सामने नहीं आ सका। न्याय प्रक्रिया में ढिलाई और लापरवाही बरतने के आरोप में कोर्ट ने जांच से जुड़े 5 पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय व अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए पुलिस कमिश्नरेट को पत्र लिखा है। कोर्ट के इस सख्त कदम से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।