“मिशन महिला शक्ति को मिलेगी और रफ़्तार: यूपी महिला आयोग में नहीं बदलेगी कमान, अध्यक्ष बबीता चौहान और अपर्णा यादव समेत पूरी टीम का कार्यकाल एक साल बढ़ा”
यूपी राज्य महिला आयोग में फिलहाल नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा। सरकार ने अध्यक्ष बबीता चौहान, उपाध्यक्ष अपर्णा यादव व चारू चौधरी समेत सभी 25 सदस्यों का कार्यकाल एक साल बढ़ा दिया है। अब मौजूदा टीम सितंबर 2027 तक जिम्मेदारी संभालेगी।
News Diary Today | Uttar Pradesh News
लखनऊ न्यूज़ | उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान, दोनों उपाध्यक्षों अपर्णा यादव व चारू चौधरी और सभी 25 सदस्यों का कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है। बता दें कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में निरंतरता बनाए रखने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। आयोग की पूरी टीम का कार्यकाल अब अगले एक साल के लिए सुरक्षित हो गया है।महिला कल्याण विभाग की अपर मुख्य सचिव लीना जौहरी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह विस्तार ‘उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग अधिनियम, 2004’ के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल की स्वीकृति के बाद दिया गया है।महिला कल्याण विभाग की अपर मुख्य सचिव लीना जौहरी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह विस्तार ‘उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग अधिनियम, 2004’ के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल की स्वीकृति के बाद दिया गया है।दिलचस्प बात यह है कि आयोग के इन सभी पदाधिकारियों का कार्यकाल पिछले 16 सितंबर को समाप्त हो गया था। सरकार ने शून्य काल (गैप) को खत्म करने के लिए उसी समाप्ति तिथि से ही कार्यकाल को अगले एक वर्ष के लिए विस्तारित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अब वर्तमान टीम सितंबर 2027 तक अपने पदों पर काम करती रहेगी।
क्यों खास है यह फैसला?
राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में सरकार के इस कदम को बेहद सकारात्मक माना जा रहा है। महिला आयोग के पास वर्तमान में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, घरेलू हिंसा के मामलों की सुनवाई और सरकार की महिला-केंद्रित योजनाओं को जमीन पर उतारने की अहम जिम्मेदारियां हैं। कार्यकाल बढ़ने से आयोग की टीम को अपने अधूरे पड़े कार्यों और पेंडिंग शिकायतों के त्वरित निस्तारण को बिना किसी प्रशासनिक रुकावट के पूरा करने का एक और शानदार अवसर मिल गया है। इस फैसले की जानकारी मिलते ही महिला आयोग के दफ्तर और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है।


