✍️ उत्तम दीक्षित
तहसीलदार दीप्ति देव के नेतृत्व में अतिक्रमण हटाओ अभियान, अनाधिकृत फड़ और कब्जे हटाए गए
न्यूज़ डायरी टुडे, धौलपुर (राजस्थान)
धौलपुर न्यूज़ : राजस्थान के राजाखेड़ा तहसील परिसर में लंबे समय से चल रहे कथित अवैध कब्जों और आमजन से की जा रही अवैध वसूली के मामलों पर प्रशासन ने आखिरकार सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की। तहसीलदार दीप्ति देव के नेतृत्व में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया, जिसमें बिना अनुमति और बिना लाइसेंस परिसर में फड़ लगाकर बैठे अनाधिकृत व्यक्तियों को हटाया गया।
दो दिन का अल्टीमेटम खत्म होते ही चला प्रशासन का बुलडोजर
प्रशासन द्वारा पहले सभी अनधिकृत व्यक्तियों को दो दिन के भीतर अपनी बैठक व्यवस्था हटाने का अल्टीमेटम दिया गया था। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद पुलिस और नगर पालिका प्रशासन की मौजूदगी में जेसीबी की मदद से तहसील परिसर से स्थायी और अस्थायी अतिक्रमण हटाए गए।
कार्रवाई के दौरान कई अवैध रूप से रखी गई सामग्री को जब्त भी किया गया। प्रशासन ने मौके से दो प्लास्टिक कुर्सियां, एक लकड़ी की कुर्सी, एक मेज, दो मोटरसाइकिल, एक टेबल फैन और एक बेंच जब्त की।
सरकारी काम के नाम पर आमजन से हो रही थी अवैध वसूली
सूत्रों के अनुसार तहसील परिसर में कुछ लोगों ने स्थायी रूप से बैठने की व्यवस्था बना ली थी और मूल निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार कार्ड संशोधन और नाम परिवर्तन जैसे सरकारी कार्यों के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूली जा रही थी।
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए पूरे परिसर में अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया।
अधिकारियों के नाम पर चल रहा था वसूली नेटवर्क
सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि कुछ अनाधिकृत व्यक्ति सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों से पैसे वसूल रहे थे। इससे जहां आमजन आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे थे, वहीं प्रशासन की छवि भी धूमिल हो रही थी।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक कुछ टाइप सेंटर संचालकों, डीड राइटरों और अधिवक्ताओं द्वारा अपने बोर्ड लगाकर अनाधिकृत व्यक्तियों को बैठाया गया था, जिनके माध्यम से कथित वसूली नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या कई वर्षों से चली आ रही थी।
प्रशासन ने दी चेतावनी, आगे भी जारी रहेगा अभियान
तहसीलदार दीप्ति देव द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया था कि निर्धारित समय में अतिक्रमण नहीं हटाने पर पुलिस सहायता से कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आदेश की पालना नहीं होने पर प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए ध्वस्तीकरण और जब्ती की कार्रवाई की।
बड़ा सवाल — आखिर अब क्यों हुई कार्रवाई?
स्थानीय नागरिकों के बीच अब यह सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि तहसील परिसर में दलालों और अवैध वसूली का नेटवर्क वर्षों से सक्रिय था, लेकिन प्रशासन ने अब जाकर कार्रवाई क्यों की। लोगों का कहना है कि आमजन लंबे समय से सरकारी कार्यों के लिए अतिरिक्त राशि देने को मजबूर थे।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन को अब शिकायतों की गंभीरता समझ आई या फिर किसी उच्चस्तरीय निर्देश के बाद यह अभियान शुरू किया गया।
कार्रवाई में ये अधिकारी और कर्मचारी रहे मौजूद
तहसीलदार दीप्ति देव के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान में कानूनगो सुरेश चंद, अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी लोकेश माथुर, पुलिस विभाग से सहायक उपनिरीक्षक वीरेंद्र सिंह और देवेंद्र सिंह सहित नगर पालिका कर्मचारी मोहर सिंह, सफाई निरीक्षक पारस, कर्मचारी विजय सिंह उर्फ बॉबी जादौन, नारायण जमादार और अन्य सफाई कर्मचारी मौजूद रहे।