नोएडा: आतंकवादियों के खिलाफ अदम्य साहस दिखाने से लेकर कोरोना काल में मानव सेवा की मिसाल पेश करने तक, वरिष्ठ IPS अधिकारी डॉ. राजीव नारायण मिश्रा की सेवायात्रा आज 31 अक्टूबर 2026 को समाप्त हो रही है। राष्ट्रपति वीरता पदक समेत कई सम्मान हासिल करने वाले इस जांबाज अधिकारी की विदाई उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए एक यादगार पल है।
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नोएडा न्यूज़ | गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) कमिश्नरेट में अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) के पद पर तैनात वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डॉ. राजीव नारायण मिश्रा (DIG रैंक) आज, 31 अक्टूबर 2026 को अपनी लंबी और गौरवशाली सेवाओं के बाद सेवानिवृत्त (रिटायर) हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस के सबसे काबिल और निर्भीक अफसरों में शुमार डॉ. मिश्रा की विदाई से आज पूरा पुलिस महकमा भावुक है। बता दें कि राजीव नारायण मिश्रा के करियर की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम रोचक नहीं है। वे एक ऐसे दृढ़ निश्चयी व्यक्तित्व के धनी हैं, जिन्होंने 11 बार असफलताओं का सामना करने के बाद भी हार नहीं मानी और आखिरकार भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में अपनी जगह बनाई।उनके पूरे करियर का सबसे रोमांचक और ऐतिहासिक पल 5 जुलाई 2005 को आया, जब अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि परिसर पर आतंकी हमला हुआ था। उस समय मोर्चे पर डटे राजीव नारायण मिश्रा ने सीआरपीएफ के साथ मिलकर अद्वितीय रणनीतिक सूझबूझ और अदम्य साहस का परिचय देते हुए 5 आतंकवादियों को मार गिराया था। इस जांबाजी के लिए उन्हें देश के प्रतिष्ठित राष्ट्रपति वीरता पदक (Gallantry Medal) से सम्मानित किया गया था।
एक कड़क पुलिस अधिकारी के पीछे का संवेदनशील दिल!
डॉ. राजीव नारायण मिश्रा की पहचान सिर्फ एक सख्त और तेजतर्रार पुलिस अफसर की ही नहीं रही, बल्कि वे अपने सहकर्मियों और आम जनता के बीच अत्यंत सरल, सहज और संवेदनशील इंसान के रूप में लोकप्रिय रहे हैं।महामारी के संकट के दौरान जब लोग अपनों को खो रहे थे, तब उन्होंने प्रयागराज में तैनात रहते हुए एक मिसाल पेश की। उन्होंने अपनी पीएसी (PAC) यूनिट के ओपीडी (OPD) को एक सक्रिय L-1 कोविड अस्पताल में बदलवा दिया, जिससे हजारों लोगों की जान बचाई जा सकी। बाद में उनके इस मानवीय मॉडल को पूरे उत्तर प्रदेश में लागू किया गया।आज जब वे अपनी वर्दी को अंतिम बार उतारेंगे, तो उनके सहकर्मियों की आँखें नम हैं। अपने मातहतों को हमेशा परिवार की तरह मानने वाले डॉ. मिश्रा की विदाई पर आज नोएडा पुलिस लाइंस भावुक संदेशों और शुभकामनाओं से सराबोर है।
उपलब्धियों का सफरनामा?
मूल रूप से कानपुर देहात के रहने वाले डॉ. राजीव नारायण मिश्रा 1994 में राज्य पुलिस सेवा में आए और बाद में 2010 बैच के आईपीएस अधिकारी बने। मई 2025 में उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भरोसेमंद और काबिल अफसरों के रूप में गौतम बुद्ध नगर की कानून-व्यवस्था सुधारने की बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी।अपने करियर में वे वाराणसी में 34वीं वाहिनी पीएसी के कमांडेंट, प्रयागराज में माघ मेला के एसएसपी/डीआईजी और प्रयागराज पूर्वी जोन पीएसी के प्रभारी आईजी (PAC IG) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे।उनके उत्कृष्ट सेवाकाल के दौरान उन्हें राष्ट्रपति वीरता पदक (2013), सराहनीय सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक (2018), प्लैटिनम डीजीपी कमेंडेशन डिस्क (2022) और हाल ही में अति उत्कृष्ट सेवा पदक (2025) से नवाजा गया।नोएडा में तैनाती के दौरान उन्होंने साइबर क्राइम के खिलाफ बड़ी रिकवरी कराई और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए ऑटोमेटेड चालान प्रणाली को बढ़ावा दिया। इसके साथ ही वे सोशल मीडिया और पॉडकास्ट के जरिए यूपीएससी (UPSC) की तैयारी करने वाले युवाओं का मार्गदर्शन भी करते रहे हैं।आज उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास का एक सुनहरा अध्याय आधिकारिक रूप से विश्राम ले रहा है। डॉ. राजीव नारायण मिश्रा को उनके उज्ज्वल, स्वस्थ और सुखी भविष्य के लिए असीम शुभकामनाएं!
