नोएडा महर्षि आश्रम जमीन घोटाला: गोपनीय रिपोर्ट में दो राजनीतिक दलों के आधा दर्जन से अधिक बड़े नेताओं के नाम, ED की रडार पर नोएडा प्राधिकरण के अफसर!
नोएडा के चर्चित महर्षि आश्रम जमीन मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ED की कार्रवाई के बाद अब प्राधिकरण और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है, जबकि कथित गोपनीय रिपोर्ट में राजनीतिक कनेक्शन से जुड़े कई नाम सामने आने का दावा किया जा रहा है।
News Diary Today | Noida News
नोएडा न्यूज़| नोएडा के बहुचर्चित महर्षि आश्रम जमीन घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई और जांच के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक महकमे तक हड़कंप मचा हुआ है। जांच रिपोर्टों और सूत्रों के अनुसार, दो प्रमुख राजनीतिक दलों से जुड़े आधा दर्जन से अधिक वरिष्ठ नेताओं के नाम इस महाघोटाले की गोपनीय रिपोर्ट में शामिल होने का दावा किया जा रहा है। नोएडा प्राधिकरण, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग मिलकर इस संबंध में एक बेहद गोपनीय रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। बता दें कि ईडी की गहन तफ्तीश में ‘स्पिरिचुअल रीजनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ (SRMF) ट्रस्ट की बेशकीमती जमीनों को फर्जी दस्तावेजों के सहारे बेचने के एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। इस पूरे घोटाले की नींव मुख्य आरोपी रामचंद्र मोहन ने रखी थी, जिसने वर्ष 2010 में खुद को इस ट्रस्ट का फर्जी कोषाध्यक्ष घोषित किया और मिलते-जुलते नाम से फर्जी पैन कार्ड व बैंक खाते खुलवाकर अरबों की जमीन बेचने की साजिश रची।ED इस मामले के मुख्य मास्टरमाइंड रामचंद्र मोहन और उसके करीबी सहयोगी आकाश मालवीय को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इन दोनों से हुई पूछताछ में राजनीतिक जगत और भू-माफियाओं से जुड़े कई अन्य रसूखदार नाम सामने आए हैं।वर्ष 2019 से 2023 के बीच माफियाओं और कॉलोनाइजरों ने मिलीभगत कर करीब 3,000 बीघा जमीन अवैध रूप से बेच डाली। गेझा, तिलपताबाद और भंगेल जैसे क्षेत्रों में स्थित 33 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की जमीनों को कौड़ियों के दाम (महज 16 करोड़) में फर्जी कागजातों के जरिए प्राइवेट इंफ्रा कंपनियों को हस्तांतरित कर दिया गया।
बिना ‘सांठगांठ’ के कैसे खड़ी हुईं अवैध इमारतें?
जांच एजेंसियों का स्पष्ट मानना है कि नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों और सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत और मोटे कमीशन के बिना इतनी बड़े पैमाने पर जमीनों की अवैध बिक्री, रजिस्ट्री और बिना नक्शा पास कराए 8 से 10 मंजिला अवैध विला, फ्लैट्स और कॉलोनियों का निर्माण संभव ही नहीं था।ED ने हाल ही में नोएडा प्राधिकरण के दफ्तरों से जमीन की खरीद-फरोख्त और लीज से जुड़े कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए हैं।बीते दिनों ईडी की टीम ने नोएडा प्राधिकरण के कर्मचारियों और सब-रजिस्ट्रार-3 से कई घंटों तक कड़ी पूछताछ की है, जिसके बाद बड़े अधिकारियों की संलिप्तता का पर्दाफाश हो रहा है।
एसआईटी (SIT) की समानांतर जांच?
सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) भी इस मामले की समानांतर जांच कर रहा है। एसआईटी ने नोएडा प्राधिकरण की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) और जिलाधिकारी (DM) से पूरे मामले की संयुक्त तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है।जैसे-जैसे पुलिस, प्रशासन और ED की यह गोपनीय रिपोर्ट उत्तर प्रदेश शासन को सौंपने की तैयारी पूरी हो रही है, नोएडा के इस सबसे बड़े लैंड स्कैम में शामिल नेताओं और बड़े अधिकारियों पर कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।


