ग्रेटर नोएडा वेस्ट के LA रेसिडेंसिया के सैकड़ों फ्लैट खरीदारों के लिए बड़ी राहत है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने GNIDA को रजिस्ट्री से जुड़े खरीदारों के आवेदनों पर 3 महीने के भीतर कानून के तहत फैसला लेने का निर्देश दिया है।
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ग्रेटर नोएडा | ग्रेटर नोएडा वेस्ट के LA रेसिडेंसिया (LA Residentia) प्रोजेक्ट के सैकड़ों फ्लैट खरीदारों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आई है। माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) ने एक ऐतिहासिक रुख अपनाते हुए ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) को कड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि घर खरीदारों द्वारा फ्लैट रजिस्ट्री को लेकर दिए गए ज्ञापनों (Representations) पर कानून के तहत तीन महीने के भीतर अंतिम निर्णय लिया जाए। बता दें कि यह महत्वपूर्ण आदेश 23 सितंबर 2026 को माननीय न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और माननीय न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने श्रीमती किरण कपूर और 42 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व 4 अन्य (Writ-C No. 26874 of 2026) की सुनवाई करते हुए पारित किया।
क्या है पूरा मामला?
LA रेसिडेंसिया प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक करने वाले खरीदार लंबे समय से मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान चल रहे थे। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने बिल्डर को अपने हिस्से का पूरा भुगतान (Full Payment) कर दिया है और रजिस्ट्री के लिए जरूरी सभी औपचारिकताएं भी पूरी कर ली हैं।इसके बावजूद, LA रेसिडेंसिया डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और GNIDA के बीच बकाया राशि (Dues) और अन्य देनदारियों को लेकर चल रहे आपसी विवाद के कारण खरीदारों की सब-लीज डीड (रजिस्ट्री) लटकी हुई थी। बिल्डर और अथॉरिटी के इस झगड़े में बेकसूर होमबायर्स पिस रहे थे, जिसके बाद उन्होंने न्याय के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का हवाला!
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 16 दिसंबर 2025 को राम किशोर अरोड़ा बनाम बैंक ऑफ महाराष्ट्र व अन्य (Civil Appeal No. 11052 of 2025) मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया। इस फैसले में देश की सर्वोच्च अदालत ने साफ किया था कि जिन घर खरीदारों ने अपनी तरफ से पूरा भुगतान कर दिया है, उनके अधिकारों और हितों की रक्षा की जानी चाहिए। उन्हें बिल्डर और बैंकों या अथॉरिटी के विवाद के कारण प्रताड़ित नहीं किया जा सकता।इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए GNIDA को सुस्त रवैया छोड़ने का आदेश दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस आदेश की प्रमाणित प्रति (Certified Copy) प्राप्त होने के दिन से अधिकतम तीन महीने के भीतर खरीदारों के आवेदनों का निपटारा किया जाए और सब-लीज डीड (रजिस्ट्री) के निष्पादन पर स्पष्ट फैसला लिया जाए।
खरीदारों के लिए इसके क्या मायने हैं?
यह आदेश उन सभी होमबायर्स के लिए एक बड़ी कानूनी जीत है जो अपनी गाढ़ी कमाई लगाने के बाद भी अपने ही घर के मालिकाना हक (Registry) के लिए तरस रहे थे।अब GNIDA मामले को ठंडे बस्ते में नहीं डाल सकती; उसे तय समय में जवाब देना ही होगा।3 महीने की इस समय-सीमा से फ्लैट मालिकों को जल्द ही उनके वैध लीज डीड मिलने का रास्ता साफ हो गया है।यह आदेश ग्रेटर नोएडा वेस्ट के उन अन्य प्रोजेक्ट्स के खरीदारों के लिए भी उम्मीद की किरण है जो बिल्डर-अथॉरिटी के विवाद के कारण रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे हैं।
