नोएडा सेक्टर-101 मेट्रो स्टेशन के आसपास बदहाल सड़कें, जलभराव, गंदगी और अव्यवस्थित पार्किंग से हजारों लोग परेशान हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं।
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नोएडा न्यूज़। नोएडा को स्मार्ट सिटी और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे का शहर कहा जाता है, लेकिन नोएडा सेक्टर-101 मेट्रो स्टेशन और उसके आसपास का इलाका इस दावे की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रहा है। यह पूरा क्षेत्र इस समय बदहाल सड़कों, चोक पड़े ड्रेनेज सिस्टम, अवैध पार्किंग, गंदगी और दम तोड़ती हरियाली का गवाह बना हुआ है। सबसे विडंबनापूर्ण स्थिति यह है कि सालों से शिकायतें करने के बावजूद, विभिन्न सरकारी विभाग जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल पल्ला झाड़ रहे हैं। बता दें कि यह मार्ग कोई सामान्य सड़क नहीं है। सेक्टर-101 मेट्रो स्टेशन का यह चौराहा और मुख्य मार्ग 20 से अधिक ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों (जैसे सेक्टर-74, 75, 76, 77, 78 और 101 के अपार्टमेंट्स) के हजारों परिवारों के आवागमन का मुख्य जरिया है। इसके अलावा, रोजाना दिल्ली-एनसीआर आने-जाने वाले हजारों दैनिक यात्री इसी मेट्रो स्टेशन का उपयोग करते हैं।स्थानीय निवासी और जागरूक नागरिक रंजन सामंतराय ने बताया, “हम वर्षों से इस बदहाली को झेल रहे हैं। सड़कों पर गहरे गड्ढे हो चुके हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं। ड्रेनेज (जल निकासी) की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है, जिससे मामूली बारिश में भी पूरा इलाका तालाब बन जाता है। स्वच्छता के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है और हरियाली वाले पैच अब डंपिंग ग्राउंड में तब्दील हो चुके हैं।”
इन पांच मुख्य समस्याओं से घिरा है क्षेत्र?
खस्ताहाल सड़कें: मेट्रो स्टेशन के नीचे और एप्रोच रोड पर इतने गड्ढे हैं कि गाड़ियों के पुर्जे ढीले हो जाएं। रात के समय यहां से गुजरना किसी खतरे से खाली नहीं है।
ध्वस्त ड्रेनेज और जलभराव: नालियों की नियमित सफाई न होने के कारण गंदा पानी सड़कों पर बहता है। मच्छरों के पनपने से बीमारियों का खतरा चौबीसों घंटे बना रहता है।
पार्किंग का अभाव और जाम: मेट्रो स्टेशन के पास कोई सुव्यवस्थित पार्किंग न होने के कारण ऑटो, ई-रिक्शा और निजी वाहन सड़कों पर ही बेतरतीब खड़े रहते हैं, जिससे हर समय ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है।
स्वच्छता का संकट: जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। कूड़ा उठाने की कोई नियमित व्यवस्था दिखाई नहीं देती, जिससे राहगीरों का बदबू के कारण निकलना दूभर है।
उजड़ती हरियाली: मेट्रो पिलर्स और डिवाइडर के बीच जो ग्रीन बेल्ट विकसित की जानी थी, वह अब धूल और कचरे से पटी पड़ी है।
विभागों की आपसी खींचतान में फंसा समाधान!
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जब भी नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) से शिकायत की जाती है, तो वे इसे एक्वा लाइन (NMRC) या अन्य विंग का मामला बता देते हैं। वहीं दूसरी ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। विभागों के बीच ‘जिम्मेदारी ट्रांसफर’ के इस खेल में टैक्स देने वाला आम नागरिक खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है।सड़कों का तत्काल पुनर्निर्माण (Resurfacing) किया जाए।ड्रेनेज सिस्टम को री-डिजाइन कर नालियों की गहरी सफाई हो।ई-रिक्शा और वाहनों के लिए एक समर्पित पार्किंग जोन बनाया जाए।कचरा प्रबंधन और ग्रीन बेल्ट का सौंदर्यीकरण युद्ध स्तर पर शुरू हो।जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि विभागों ने अपनी सुस्ती नहीं छोड़ी और इस समस्या का कोई स्थायी और ठोस समाधान नहीं निकाला, तो निवासी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।