नोएडा अंतरिक्ष गोल्फ व्यू मामला: 5 साल की देरी पर बिल्डर की दलीलें खारिज, कोर्ट ने ब्याज का आदेश रखा बरकरार।

नोएडा के अंतरिक्ष गोल्फ व्यू मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने होमबायर्स के हक में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फ्लैट का कब्जा स्वीकार करने के बाद भी बिल्डर की देरी का ब्याज मांगने का खरीदार का अधिकार खत्म नहीं होता।

News Diary Today | Uttar Pradesh News

लखनऊ/नोएडा: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने घर खरीदारों (Homebuyers) के हक में एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई खरीदार किसी फ्लैट का कब्जा (Possession) देरी से भी स्वीकार कर लेता है, तो भी बिल्डर द्वारा की गई देरी के लिए ब्याज (Interest for Delay) मांगने का उसका कानूनी अधिकार खत्म नहीं होता। बता दें कि न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की एकल पीठ ने अंतरिक्ष डेवलपर्स एंड प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर की गई अपील को सिरे से खारिज करते हुए यह बड़ा आदेश दिया है।यह पूरा मामला नोएडा के सेक्टर-78 में स्थित ‘अंतरिक्ष गोल्फ व्यू’ (Antriksh Golf View) प्रोजेक्ट से जुड़ा है। खरीदार श्याम सुंदर अग्रवाल ने साल 2010 में इस परियोजना में एक फ्लैट बुक कराया था। बिल्डर के साथ हुए समझौते (Agreement) के मुताबिक, उन्हें नवंबर 2012 तक फ्लैट का कब्जा मिल जाना चाहिए था। लेकिन बिल्डर ने उन्हें लगभग 5 साल तक इंतजार कराया और मई 2017 में कब्जे की पेशकश की।रोचक बात यह है कि जब मई 2017 में बिल्डर ने कब्जा देने की बात कही, तब भी प्रोजेक्ट के पास न तो अधिभोग प्रमाण पत्र (Occupancy Certificate – OC) था और न ही अन्य जरूरी वैधानिक दस्तावेज।परेशान होकर खरीदार ने उत्तर प्रदेश रेरा (UP RERA) का दरवाजा खटखटाया। रेरा अपीलीय न्यायाधिकरण ने बिल्डर को निर्देश दिया कि वह खरीदार को दिसंबर 2012 से मई 2017 तक की अवधि के लिए जमा राशि पर MCLR (मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट) से 1% अधिक की दर से विलंब ब्याज (Delay Interest) का भुगतान करे।

कोर्ट में बिल्डर के बहाने और हाईकोर्ट की फटकार!

रेरा के इस फैसले के खिलाफ बिल्डर ‘अंतरिक्ष डेवलपर्स’ ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। बिल्डर ने कोर्ट में दो मुख्य दलीलें दीं, जिन्हें कोर्ट ने पूरी तरह नकार दिया।बिल्डर ने तर्क दिया कि ओखला पक्षी विहार (Okhla Bird Sanctuary) के आसपास 10 किलोमीटर के दायरे में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा निर्माण और ओसी (OC) जारी करने पर रोक लगाई गई थी, जिसके कारण प्रोजेक्ट में देरी हुई। कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया।बिल्डर का कहना था कि चूंकि खरीदार ने मई 2017 में कब्जा स्वीकार कर लिया है, इसलिए अब वह देरी के लिए ब्याज का दावा नहीं कर सकता।न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार ने कहा कि रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (RERA) के तहत ऐसा कोई नियम या समय सीमा (Limitation Period) नहीं है जो खरीदार को कब्जा लेने के बाद ब्याज मांगने से रोके। खरीदार जब तक किसी प्रोजेक्ट से जुड़ा हुआ है, वह कब्जा मिलने के दिन तक हर महीने की देरी के लिए ब्याज पाने का वैधानिक हकदार है।

Author

  • Harvir Chauhan

    Harvir Chauhan
    Editor-in-Chief & Founder, News Diary Today

    हरवीर चौहान एक वरिष्ठ पत्रकार, संपादक और मीडिया उद्यमी हैं, जिन्हें समाचार एवं डिजिटल मीडिया क्षेत्र में 10+ वर्षों का अनुभव है। वे Doordarshan Uttar Pradesh और India News जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे NewsDiaryToday.com और ‘न्यूज़ डायरी टुडे’ साप्ताहिक समाचार पत्र के संस्थापक एवं Editor-in-Chief हैं। वे तथ्यपरक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    Follow Harvir Chauhan on Social Media
    X (Twitter) : @chauhan_harvir
    Facebook page link
    https://www.facebook.com/share/1Dw1j5y1ja/
    Email: [email protected]