October 14, 2026

मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, फैसला सुनते ही रो पड़ी मुस्कान

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मेरठ के बहुचर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई। सजा का ऐलान होते ही मुस्कान रो पड़ी। सौरभ राजपूत हत्याकांड में आए इस फैसले ने एक बार फिर पूरे देश का ध्यान खींचा है।

News Diary Today | Uttar Pradesh News

मेरठ न्यूज़ । उत्तर प्रदेश के मेरठ के बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। नीले ड्रम में सौरभ का शव छिपाने की घटना से देशभर में सुर्खियों में आए इस मामले में बुधवार को सजा का ऐलान किया गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सजा सुनाए जाने के दौरान मुस्कान भावुक होकर रो पड़ी। इस फैसले के साथ ही करीब डेढ़ साल से अधिक समय से चर्चा में रहे इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया का एक अहम चरण पूरा हुआ है।

अदालत के फैसले पर टिकी थीं सबकी निगाहें

मेरठ जिला अदालत में 14 अक्टूबर को सौरभ राजपूत हत्याकांड में सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई। मामले में दोषी करार दी गई मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के सामने पेश किया गया था।

सजा सुनाने से पहले अदालत ने दोनों दोषियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। इसके बाद अदालत ने दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोरतम सजा की मांग की गई थी। सौरभ के परिवार ने भी दोनों दोषियों के लिए फांसी की मांग की थी।

इस फैसले के बाद मामले ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है। हालांकि, मृत्युदंड के मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया और संबंधित उच्च न्यायालय की पुष्टि भी महत्वपूर्ण होती है।

30 सितंबर को दोषी करार दिए गए थे मुस्कान और साहिल

मेरठ की जिला अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराया था। इसके बाद अदालत ने सजा निर्धारित करने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की थी।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, फॉरेंसिक जांच और गवाहों के बयानों के आधार पर अपना पक्ष रखा। इस मामले में कुल 126 सुनवाई की तारीखें पड़ीं और 22 अभियोजन गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

जांच के दौरान घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य, शव की बरामदगी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वारदात में इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई वस्तुओं से संबंधित तथ्यों को अदालत के सामने रखा गया। इन्हीं साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने दोनों को दोषी ठहराया था।

क्या है पूरा नीला ड्रम हत्याकांड?

यह मामला मार्च 2025 में सामने आया था। सौरभ राजपूत मर्चेंट नेवी से जुड़े रहे थे। उनकी हत्या के बाद शव को टुकड़ों में काटकर नीले प्लास्टिक के ड्रम में छिपाए जाने की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।

पुलिस जांच और अभियोजन पक्ष के अनुसार, सौरभ की हत्या के बाद उनके शव के टुकड़ों को ड्रम में रखा गया और सीमेंट तथा अन्य सामग्री की मदद से छिपाने की कोशिश की गई। बाद में पुलिस ने जांच के दौरान ड्रम से शव के अवशेष बरामद किए।

इस मामले में सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों ने दोनों के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने सहित संबंधित आरोपों में मुकदमा चलाया।

मामले की गंभीरता और घटना के तरीके के कारण यह हत्याकांड लंबे समय तक राष्ट्रीय मीडिया में चर्चा का विषय बना रहा।

मार्च 2025 में कैसे हुआ था मामले का खुलासा?

मामले से जुड़े घटनाक्रम के अनुसार, सौरभ राजपूत फरवरी 2025 में विदेश से मेरठ लौटे थे। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि 3 मार्च 2025 को उनकी हत्या की गई और शव को नीले ड्रम में छिपा दिया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि घटना के बाद मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश गए थे। बाद में पुलिस ने मामले की पड़ताल करते हुए दोनों को गिरफ्तार किया।

जांच के दौरान पुलिस ने शव की बरामदगी, पोस्टमार्टम, फॉरेंसिक साक्ष्यों और अन्य परिस्थितिजन्य तथ्यों को आधार बनाया। अभियोजन पक्ष ने अदालत में इन साक्ष्यों के जरिए अपना मामला प्रस्तुत किया।

अदालत में चली लंबी सुनवाई के बाद 30 सितंबर 2026 को दोनों को दोषी करार दिया गया और 14 अक्टूबर को सजा का ऐलान किया गया।

22 गवाहों और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर चली सुनवाई

सौरभ राजपूत हत्याकांड की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए। इनमें मामले से जुड़े परिजनों और अन्य महत्वपूर्ण गवाहों के बयान शामिल थे।

अदालत में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ फॉरेंसिक और वैज्ञानिक जांच से जुड़े तथ्यों पर भी विचार किया गया। मामले में शव की बरामदगी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वारदात से संबंधित वस्तुओं की खरीद तथा अन्य परिस्थितियों से जुड़े साक्ष्य महत्वपूर्ण रहे।

इस मुकदमे में प्रत्यक्षदर्शी की अनुपस्थिति के बावजूद अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी के आधार पर अपना पक्ष रखा। अदालत ने सुनवाई के बाद दोनों को दोषी ठहराया और फिर सजा के प्रश्न पर अलग से विचार किया।

सौरभ के परिवार ने की थी फांसी की मांग

सौरभ राजपूत के परिवार ने शुरुआत से ही इस मामले में कड़ी सजा की मांग की थी। परिवार का कहना था कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषियों को कठोरतम दंड दिया जाना चाहिए।

अभियोजन पक्ष ने भी अदालत में मृत्युदंड की मांग रखी थी। 14 अक्टूबर को अदालत द्वारा दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद मामले में सजा संबंधी फैसला सामने आ गया है।

पीड़ित परिवार के लिए यह फैसला लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। हालांकि, मृत्युदंड के मामलों में कानून के तहत आगे की न्यायिक प्रक्रिया भी पूरी की जाती है।


Author

  • Harvir Chauhan

    Harvir Chauhan
    Editor-in-Chief & Founder, News Diary Today

    हरवीर चौहान एक वरिष्ठ पत्रकार, संपादक और मीडिया उद्यमी हैं, जिन्हें समाचार एवं डिजिटल मीडिया क्षेत्र में 10+ वर्षों का अनुभव है। वे Doordarshan Uttar Pradesh और India News जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे NewsDiaryToday.com और ‘न्यूज़ डायरी टुडे’ साप्ताहिक समाचार पत्र के संस्थापक एवं Editor-in-Chief हैं। वे तथ्यपरक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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