आधुनिक भारत के निर्माता थे पंडित जवाहरलाल नेहरू, वैज्ञानिक सोच से देश को दी नई दिशा।

न्यूज़ डायरी टुडे, दिल्ली।

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru को आधुनिक भारत का निर्माता कहा जाता है। उन्होंने स्वतंत्र भारत को लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी और वैज्ञानिक सोच वाला राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी दूरदर्शी नीतियों और विकासवादी सोच ने देश को आधुनिकता की राह पर आगे बढ़ाया। पंडित नेहरू केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे ऐसे दूरदर्शी नेता थे जिन्होंने भारत के भविष्य की मजबूत नींव रखी।

स्वतंत्रता आंदोलन में निभाई अहम भूमिका

14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में जन्मे पंडित जवाहरलाल नेहरू बचपन से ही मेधावी और आधुनिक विचारों वाले व्यक्ति थे। उन्होंने इंग्लैंड से शिक्षा प्राप्त की, लेकिन देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हुए और कई बार जेल भी गए। आजादी की लड़ाई में उनके योगदान ने उन्हें देश के प्रमुख नेताओं में शामिल कर दिया।15 अगस्त 1947 को जब भारत स्वतंत्र हुआ तो पंडित नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने। उन्होंने 27 मई 1964 तक लगातार देश का नेतृत्व किया और अपने कार्यकाल में भारत को विकास और आधुनिकता की नई दिशा दी।

लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता को दी मजबूती

पंडित नेहरू लोकतंत्र के प्रबल समर्थक थे। उनका मानना था कि भारत जैसे विविधताओं वाले देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था ही सबसे उपयुक्त शासन प्रणाली हो सकती है। उन्होंने संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया।उनकी कैबिनेट में देश के विभिन्न वर्गों और समुदायों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया। मंत्रिमंडल में Sardar Vallabhbhai Patel, B. R. Ambedkar, Rajendra Prasad, Maulana Abul Kalam Azad और Syama Prasad Mukherjee जैसे बड़े नेताओं को शामिल कर उन्होंने राष्ट्रीय एकता और समावेशी राजनीति का संदेश दिया।

500 से अधिक रियासतों का हुआ भारत में विलय

आजादी के बाद देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी सैकड़ों रियासतों को एकजुट कर अखंड भारत का निर्माण करना। पंडित नेहरू के नेतृत्व और सरदार पटेल की रणनीति से 500 से अधिक रियासतों का भारतीय संघ में विलय किया गया। इस ऐतिहासिक कदम ने भारत को राजनीतिक रूप से मजबूत और संगठित राष्ट्र बनाया।

पंचवर्षीय योजना से विकास को मिली रफ्तार

पंडित नेहरू का मानना था कि योजनाबद्ध विकास के बिना देश की प्रगति संभव नहीं है। इसी सोच के तहत उन्होंने 1951 में पहली पंचवर्षीय योजना लागू की और योजना आयोग का गठन किया। आर्थिक नियोजन की इस व्यवस्था के जरिए कृषि, उद्योग, शिक्षा, रोजगार और आधारभूत ढांचे के विकास को गति मिली।

पंचवर्षीय योजनाओं का उद्देश्य देश के संसाधनों का सही उपयोग करते हुए गरीबी और बेरोजगारी को कम करना था। हर पांच साल के लिए विकास का लक्ष्य तय किया गया और उसी आधार पर सरकारों को कार्य करना अनिवार्य बनाया गया। यह मॉडल लंबे समय तक भारत की आर्थिक नीतियों का आधार बना रहा।

शिक्षा, विज्ञान और तकनीक को दिया सर्वोच्च महत्व

पंडित नेहरू का सबसे बड़ा योगदान भारत को वैज्ञानिक सोच और आधुनिक तकनीकी शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ाना था। उन्होंने माना कि यदि भारत को विकसित राष्ट्र बनना है तो विज्ञान और तकनीक को बढ़ावा देना होगा।उनकी सोच का परिणाम था कि देश को विश्वस्तरीय संस्थान मिले। उनके कार्यकाल में Indian Institutes of Technology, Indian Institutes of Management और All India Institute of Medical Sciences जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की स्थापना हुई। इन संस्थानों ने भारत को शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलाई।

बड़े उद्योगों और इस्पात संयंत्रों से मजबूत हुई अर्थव्यवस्था

पंडित नेहरू ने देश के औद्योगिक विकास पर विशेष ध्यान दिया। उनके कार्यकाल में भिलाई, बोकारो, राउरकेला और दुर्गापुर जैसे बड़े इस्पात संयंत्र स्थापित किए गए। इन भारी उद्योगों ने भारत को औद्योगिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।उन्होंने बड़े बांधों, कारखानों और उद्योगों को “आधुनिक भारत के मंदिर” बताया था। उनका मानना था कि औद्योगिक विकास से ही रोजगार बढ़ेगा और देश आर्थिक रूप से मजबूत बनेगा।

गुटनिरपेक्ष आंदोलन से दुनिया में बनाई अलग पहचान

विदेश नीति के क्षेत्र में भी पंडित नेहरू ने भारत को नई पहचान दिलाई। उन्होंने गुटनिरपेक्ष आंदोलन की नीति अपनाई, जिसके तहत भारत ने किसी भी महाशक्ति के दबाव में आने के बजाय स्वतंत्र विदेश नीति को प्राथमिकता दी। इस नीति ने भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मानजनक स्थान दिलाने में मदद की।