नोएडा में एक निजी अस्पताल पर मरीज से कथित तौर पर दोगुना इलाज शुल्क वसूलने और बिना उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल पंजीकरण वाले डॉक्टरों से इलाज कराने के आरोप सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग की जांच में कई अनियमितताएं मिलने के बाद सीएमओ ने अस्पताल प्रबंधन को सख्त निर्देश जारी करते हुए नियमों का पालन नहीं करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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नोएडा न्यूज़ | कुलेशरा के निवासी मरीज प्रशांत कुमार की शिकायत पर ग्रेटर नोएडा, स्वास्थ्य विभाग ने एक निजी अस्पताल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। शिकायतकर्ता प्रशांत कुमार का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें शुरुआत में इलाज का खर्च 50,000 से 60,000 रुपये प्रतिदिन बताया था। हालांकि, डिस्चार्ज और भुगतान के समय उनसे बिना किसी पूर्व सूचना के दोगुनी राशि वसूल कर ली गई। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल के इस कदम को आम जनता को भ्रमित करने वाला और पूरी तरह अनुचित करार दिया है। बता दें कि शिकायत मिलने के बाद जब स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच की, तो अस्पताल प्रबंधन की कई बड़ी कमियां और नियम उल्लंघन सामने आए और अस्पताल ने पंजीकरण के समय जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकरण समिति को जो स्टाफ सूची सौंपी थी, उसके अलावा कई नए डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति की गई थी। इस नए स्टाफ के दस्तावेज और सूचना मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय को नहीं दी गई और द क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2010′ के तहत अस्पताल में काम करने वाले सभी डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ का ‘उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल’ में पंजीकृत होना अनिवार्य है। जांच में पता चला कि अस्पताल में कुछ डॉक्टर और स्टाफ दिल्ली मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत होने के बावजूद उत्तर प्रदेश में अवैध रूप से प्रैक्टिस कर रहे हैं।
सीएमओ के सख्त निर्देश और कार्रवाई की चेतावनी?
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने अस्पताल प्रबंधन को कड़े निर्देश जारी किए हैं और यूपी मेडिकल काउंसिल में गैर-पंजीकृत सभी डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ का तत्काल पंजीकरण कराया जाए और पंजीकरण कराने के बाद इसकी लिखित सूचना और दस्तावेज जल्द से जल्द सीएमओ कार्यालय में जमा किए जाएं और यदि अस्पताल तय समय सीमा के भीतर इन निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो ‘द क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट, 2010’ के तहत अस्पताल के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मरीजों के लिए स्वास्थ्य विभाग की अपील!
इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता और मरीजों को जागरूक रहने की सलाह दी है कि किसी भी अस्पताल में इलाज शुरू कराने से पहले संभावित खर्च का एक लिखित एस्टीमेट (अनुमानित बिल) जरूर मांगें और यदि कोई भी अस्पताल इलाज के नाम पर तय राशि से अधिक वसूली करता है या किसी अन्य प्रकार की अनियमितता बरतता है, तो तुरंत इसकी शिकायत सीएमओ कार्यालय में दर्ज कराएं।

