यूपी के खेतों से सीधे विदेश की थाली तक : नोएडा एयरपोर्ट के पास 5 एकड़ में बनेगा राज्य का पहला ‘इंटीग्रेटेड फूड एक्सपोर्ट हब’

यूपी के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी! नोएडा एयरपोर्ट के पास 5 एकड़ में राज्य का पहला इंटीग्रेटेड फूड एक्सपोर्ट हब तैयार किया जा रहा है। यहां खेत से निकली फसल की टेस्टिंग, पैकेजिंग, प्री-कूलिंग और क्वारंटीन की सुविधा मिलेगी, जिससे आम, अमरूद, सब्जियां, अनाज और अन्य कृषि उत्पाद सीधे विदेशी बाजारों तक पहुंच सकेंगे।

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नोएडा न्यूज़ | अब उत्तर प्रदेश के आम, अमरूद, सब्जियां और अनाज बिना किसी देरी के सीधे अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और यूएई (UAE) जैसे बड़े देशों के बाजारों में पहुंचेंगे।नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के चालू होने के बाद यह पार्क एक्सपोर्ट को सुपरफास्ट रफ्तार देगा। खेत से फसल निकलेगी और कुछ ही घंटों में विमान से विदेशों के लिए उड़ान भर लेगी। इसे तकनीकी रूप से इंटीग्रेटेड टेस्टिंग एवं ट्रीटमेंट पार्क कहा जा रहा है। यहाँ केवल पैकेजिंग ही नहीं होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत लैब टेस्टिंग, प्री-कूलिंग और क्वारंटीन की आधुनिक सुविधाएं भी होंगी। बता दें कि उत्तर प्रदेश को $1 ट्रिलियन की इकोनॉमी बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। इन्वेस्ट यूपी (Invest UP) के अनुसार, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास करीब 5 एकड़ जमीन पर राज्य का पहला अत्याधुनिक एग्री व फूड एक्सपोर्ट हब (इंटीग्रेटेड टेस्टिंग एवं ट्रीटमेंट पार्क) विकसित किया जा रहा है।इस पार्क के बनने से उत्तर प्रदेश के किसानों और व्यापारियों के कृषि उत्पाद सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बिक सकेंगे।

किन उत्पादों को मिलेगा वैश्विक बाजार?

इस फूड एक्सपोर्ट हब में मुख्य रूप से निम्नलिखित उत्पादों की प्रोसेसिंग, ग्रेडिंग, सॉर्टिंग और पैकेजिंग की जाएगी।

फल और सब्जियां: (विशेषकर पश्चिमी यूपी के आम और अमरूद)

अनाज और दालें: गेहूं, चावल और विभिन्न प्रकार की दालें

डेयरी प्रोडक्ट्स: दूध और दूध से बने अन्य प्रसंस्कृत (processed) खाद्य पदार्थ

मिलेंगी ये वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं!

विदेशी बाजारों में उत्पादों को भेजने के लिए कड़े क्वालिटी स्टैंडर्ड्स से गुजरना पड़ता है। इसके लिए इस 5 एकड़ के हब में ये सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं।

कोल्ड स्टोरेज और प्री-कूलिंग: ताकि फल-सब्जियां लंबे समय तक फ्रेश रहें।

क्वारंटीन और स्पेशल कलेक्शन सेंटर: अंतरराष्ट्रीय मानकों की जांच के लिए।

रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर: किसानों और एक्सपोर्टर्स को ग्लोबल ट्रेंड्स की ट्रेनिंग देने के लिए।

किसानों को कैसे होगा सीधा फायदा?

अब तक यूपी के किसानों को अपने उत्पाद बाहर भेजने के लिए दूसरे राज्यों के बंदरगाहों या दिल्ली पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे लागत बढ़ती थी और सामान खराब होने का डर रहता था। उत्तर प्रदेश राज्य बागवानी नीति एवं विपणन बोर्ड (UPSHEB) ने इसके लिए सीधे किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और एक्सपोर्टर्स के बीच एमओयू (MoU) साइन कराए हैं।गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर और अलीगढ़ समेत पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों की आय में इससे भारी उछाल आने की उम्मीद है। आंकड़े गवाह हैं कि यूपी का कृषि निर्यात साल 2016-17 में ₹727 करोड़ था, जो बढ़कर अब ₹1,132 करोड़ से अधिक हो चुका है और इस नए हब से इसमें रिकॉर्ड तेजी आएगी।

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