सुप्रीम कोर्ट ने थानों में CCTV व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार को सख्त संदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि नई योजना की मंजूरी का इंतजार करते हुए मौजूदा फंड को लैप्स न होने दिया जाए और उसका इस्तेमाल तुरंत पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने में किया जाए।
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Supreme court | सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि देश के थानों में सीसीटीवी कैमरे (CCTV Cameras) लगाने और पुलिस आधुनिकीकरण के लिए मौजूदा फंड को बेकार न रहने दिया जाए और न ही इन्हें लैप्स (Lapse) होने दिया जाए। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने साफ किया कि जब तक सरकार की ₹24,000 करोड़ की नई भव्य योजना ‘पुलिस आधुनिकीकरण मिशन’ (PMM) को वित्त मंत्रालय से अंतिम मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक असम योजना (ASUMP) के तहत बचे हुए पैसों का इस्तेमाल तुरंत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में किया जाए। बता दें कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट द्वारा देश के थानों में खराब या गैर-मौजूद सीसीटीवी कैमरों को लेकर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिए जाने के बाद चर्चा में आया है। केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि वे अगले 5 वर्षों के लिए 24,000 करोड़ की एक बड़ी आधुनिकीकरण योजना पर काम कर रहे हैं।इस पर कोर्ट के मित्र (Amicus Curiae) सिद्धार्थ दवे ने चिंता जताई कि नई योजना की मंजूरी में वक्त लग रहा है, जिससे मौजूदा फंड्स लैप्स हो सकते हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से तीखे सवाल पूछे अदालत ने कहा, “आपके पास वर्तमान योजना के तहत पहले से ही फंड मौजूद है। आप उन्हें बेकार क्यों रहने दे रहे हैं? नई योजना के लागू होने तक का इंतजार क्यों किया जाए?”।कोर्ट ने केंद्र के वकील से कहा कि थानों में लगे कैमरों की फंडिंग में निरंतरता रहनी चाहिए। यदि मौजूदा फंड का सही समय पर इस्तेमाल नहीं हुआ, तो यह पैसा कहीं और चला जाएगा।केंद्र सरकार ने अदालत को सूचित किया कि मौजूदा आधुनिकीकरण योजना को 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है, ताकि राज्य जल्द से जल्द अपने प्रस्ताव भेजकर फंड का लाभ उठा सकें।
आखिर क्यों जरूरी है यह आदेश?
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही आदेश दिया हुआ है कि थानों के हर कोने (लॉक-अप, पूछताछ रूम, एंट्री-एग्जिट) में नाइट विजन और ऑडियो रिकॉर्डिंग वाले CCTV होने अनिवार्य हैं।इस मामले की गंभीरता इतनी है कि मद्रास हाई कोर्ट ने भी हाल ही में कहा है कि थानों के CCTV फुटेज को 18 महीने तक सुरक्षित रखना अनिवार्य है, एक मिनट कम रखना भी कोर्ट की अवमानना माना जाएगा।झारखंड जैसे राज्यों में साल 2020 के बाद से कई थानों में एक भी नया कैमरा न लगने को लेकर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई थी। अब इस आदेश के बाद राज्यों के पास बजट का बहाना बनाने का मौका नहीं रहेगा।इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को तय की गई है, जहां केंद्र सरकार को इस फंड ट्रांसफर और इसके उपयोग पर और स्पष्ट निर्देश लेकर आने को कहा गया है।