नोएडा मजदूर आंदोलन : 5 महीने बाद जेल से राहत,हाईकोर्ट ने हटाया NSA, DM के वेतन से 5 लाख मुआवजा देने का आदेश।

नोएडा मजदूर आंदोलन मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी पर लगा NSA रद्द कर दिया। कोर्ट ने सरकारी कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए 5 लाख मुआवजे का आदेश दिया, जिसकी वसूली डीएम के वेतन से करने को कहा गया है।

News Diary Today | Noida News

UP High Court : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा मजदूर प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को पूरी तरह खारिज कर दिया है। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ (डबल बेंच) ने सरकारी दावों को ‘मनगढ़ंत कहानी’ (Concocted Story) करार देते हुए आकृति चौधरी की बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका को स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही, अदालत ने यूपी सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए नोएडा अधिकारियों (जिलाधिकारी) को ₹5 लाख का हर्जाना देने का भी ऐतिहासिक आदेश सुनाया है, जो सीधे डीएम के वेतन से काटा जाएगा। बता दें कि दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की 25 वर्षीय इतिहास स्नातक छात्रा आकृति चौधरी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए, इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पाया कि राज्य सरकार और पुलिस के पास आकृति के खिलाफ हिंसा भड़काने का कोई भी ठोस सबूत या वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं थी। कोर्ट ने सरकारी वकील की दलीलों और गिरफ्तारियों के तरीके में पाई गई गंभीर प्रक्रियात्मक कमियों (Procedural Lapses) के बाद इस निरुद्ध आदेश (Detention Order) को खारिज कर दिया।न्यायालय ने इस कार्रवाई को सत्ता का दुरुपयोग मानते हुए आदेश दिया कि गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) प्रशासन आकृति चौधरी को ₹5 लाख का मुआवजा दे। सबसे बड़ी बात यह है कि यह मुआवजा राशि वहां की जिलाधिकारी (DM) मेधा रूपम के वेतन से रिकवर करने का निर्देश दिया गया है।

क्या था पूरा मामला?

नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में वेतन वृद्धि और काम के घंटों में सुधार को लेकर मजदूरों ने एक बड़ा आंदोलन किया था, जिसमें बाद में पथराव और आगजनी जैसी हिंसक घटनाएं हुई थीं।सामाजिक कार्यकर्ता और थिएटर आर्टिस्ट के रूप में आकृति चौधरी ने केवल मजदूरों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए प्रदर्शन में हिस्सा लिया था, लेकिन पुलिस ने उन्हें मुख्य साजिशकर्ता बता दिया।उत्तर प्रदेश पुलिस ने बिना किसी ठोस फॉरेंसिक या इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के आकृति चौधरी और पत्रकार सत्यम वर्मा पर देश का सबसे सख्त कानून यानी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) तामील कर दिया था।

क्या आकृति चौधरी तुरंत जेल से बाहर आएंगी?

अदालत ने आकृति को तुरंत रिहा करने का आदेश तो दिया है, बशर्ते वे किसी अन्य मामले में वांछित न हों। हालांकि, औद्योगिक श्रमिकों के प्रदर्शन के दौरान दर्ज हुए अन्य मुख्य आपराधिक मुकदमों (FIRs) में अभी तक जमानत (Bail) न मिलने के कारण उन्हें फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा, जब तक कि उन मामलों में भी उन्हें राहत नहीं मिल जाती।आकृति चौधरी की तरफ से देश के जाने-माने वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्विस और इलाहाबाद हाईकोर्ट की अधिवक्ता चार्ली प्रकाश ने पैरवी की थी।

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