स्कूलों में राखी, मेहंदी और चूड़ियों पर पाबंदी बच्चों के मानवाधिकारों का हनन, होगी सख्त कार्रवाई” – NHRC सदस्य प्रियांक कानूनगो की चेतावनी।

स्कूलों में राखी, मेहंदी और चूड़ियों पर रोक को लेकर NHRC ने सख्त रुख अपनाया है। सदस्य प्रियांक कानूनगो ने कहा कि धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं के नाम पर बच्चों को प्रताड़ित करना मानवाधिकारों और बाल अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। स्कूलों को चेतावनी दी गई है कि शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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NHRC News। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने स्कूलों में हिंदू त्योहारों और परंपराओं पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि सावन या रक्षाबंधन के दौरान मेहंदी लगाना, राखी बांधना या चूड़ियां पहनना हिंदू सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा है। इन पर रोक लगाना बच्चों के बुनियादी मानवाधिकारों और बाल अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। बता दें कि रक्षाबंधन और सावन के दौरान मेहंदी, राखी और चूड़ियां हिंदू आस्था और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं।कानूनगो के मुताबिक, हर साल रक्षाबंधन के समय या उसके तुरंत बाद देश के विभिन्न स्कूलों से बच्चों को इन परंपराओं के कारण प्रताड़ित किए जाने की शिकायतें आयोग के पास आती हैं।उन्होंने तर्क दिया कि मेहंदी का रंग एक-दो दिन में उतर जाता है और बच्चे खुद कुछ समय बाद राखी निकाल देते हैं। इससे स्कूल का अनुशासन या ड्रेस कोड कतई प्रभावित नहीं होता।यदि कोई भी स्कूल इन परंपराओं के नाम पर बच्चों को मानसिक या शारीरिक रूप से परेशान करेगा, तो मानवाधिकार आयोग और बाल अधिकार संस्थाएं उनके खिलाफ बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई करेंगी।

बुनियादी अधिकार’ बनाम ‘स्कूल ड्रेस कोड’,?

प्रियांक कानूनगो ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना बच्चों का मौलिक अधिकार है। स्कूलों को इस मामले में लचीला रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि त्योहारों के समय बच्चों को उनकी परंपराएं निभाने की आजादी मिलनी चाहिए, न कि उन्हें किसी तरह की ‘सजा’ या ‘मानसिक प्रताड़ना’ का सामना करना पड़े। आयोग ऐसी किसी भी शिकायत पर तुरंत संज्ञान लेकर मजबूरन कड़ी कानूनी कार्रवाई करेगा।

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