डॉक्टरों की अस्पष्ट हैंडराइटिंग पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त! पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढ़ने में दिक्कत पर कोर्ट ने गौतमबुद्धनगर के CMO और मेडिकल ऑफिसर को तलब किया है। साथ ही रिपोर्टों को डिजिटल और स्पष्ट बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
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नोएडा न्यूज़ | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डॉक्टरों द्वारा हाथ से लिखी जाने वाली अस्पष्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि खराब लिखावट के कारण रिपोर्ट को पढ़ना और समझना बेहद मुश्किल हो जाता है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में बाधा आती है। इस मामले में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने गौतमबुद्धनगर (नोएडा) के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और संबंधित मेडिकल ऑफिसर को तलब कर लिया है। बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौतमबुद्धनगर के CMO और मेडिकल ऑफिसर को आदेश दिया है कि वे अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर हों।कोर्ट ने मामले की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की एक बिल्कुल साफ और पठनीय प्रति (Clear Copy) तुरंत दाखिल करने का निर्देश दिया है।मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अपने साल 2023 के उस पुराने आदेश का हवाला दिया, जिसमें रिपोर्टों को डिजिटल और स्पष्ट बनाने के निर्देश दिए गए थे।
अब पूरी तरह बदलेगा सिस्टम: पोर्टल पर अपलोड होंगी रिपोर्ट!
अदालत ने मेडिकल रिपोर्टिंग में पारदर्शिता और सुगमता लाने के लिए तकनीकी बदलावों पर जोर दिया है। अब पोस्टमार्टम, इंजरी (चोट) और यौन उत्पीड़न (Sexual Assault) से जुड़ी सभी रिपोर्टों को सीधे आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।उत्तर प्रदेश पुलिस इन सभी संवेदनशील और जरूरी रिपोर्टों को CCTV/डिजिटल सिस्टम के जरिए सीधे पोर्टल पर देख सकेगी, जिससे जांच में तेजी आएगी।डॉक्टरों की हाथ से लिखी ‘अपठनीय’ रिपोर्टों के कारण मामलों में होने वाली देरी पर कोर्ट ने गहरी चिंता व्यक्त की है।इस बेहद महत्वपूर्ण और व्यवस्था सुधार से जुड़े मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को तय की गई है, जहां दोनों अधिकारियों को कोर्ट के सामने जवाब देना होगा।