यूपी में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने बिना वैध परमिट चल रही स्कूल वैन पर कार्रवाई और हर स्कूल में सुरक्षा समिति सक्रिय करने के निर्देश दिए हैं।
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यूपी हाईकोर्ट | इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश में स्कूली बच्चों के परिवहन और उनकी सुरक्षा को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा रुख अपनाया है। गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स एसोसिएशन द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान कोर्ट में राज्य की स्कूली परिवहन व्यवस्था को लेकर कई चौंकाने वाले और गंभीर खुलासे हुए हैं। बता दें कि मामले की सुनवाई के दौरान राज्य परिवहन आयुक्त ने खुद कोर्ट के सामने यह हैरान करने वाली जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश में चल रहीं अधिकांश स्कूल वैनों के पास नियमों के तहत आवश्यक वैध परमिट नहीं हैं। बिना परमिट के बच्चों को ढो रही ये वैन नियमों की धज्जियां उड़ाकर उनकी जान जोखिम में डाल रही हैं।हाईकोर्ट ने साफ किया कि स्कूली बच्चों को सार्वजनिक स्थानों पर ले जाने वाले वाहनों के लिए कमर्शियल परमिट होना अनिवार्य है। इसके लिए नियम तय किए गए हैं।स्कूल वैन के परमिट के लिए अभिभावकों या अभिभावकों के समूह के साथ एक लिखित समझौता (अनुबंध) करना आवश्यक है।इस समझौते को स्कूल प्रशासन द्वारा सक्षम प्राधिकारी (परिवहन विभाग) के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।इस वैध समझौते के सत्यापन के आधार पर ही स्कूल वैन का परमिट जारी किया जाएगा।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस बृज राज सिंह की खंडपीठ ने इस ढुलमुल व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि वह एक सप्ताह के भीतर सभी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करें। अदालत ने सभी जिलाधिकारियों (DMs) को आदेश दिया है कि वे एक महीने के भीतर अपने-अपने जिलों में इन कमेटियों को पूरी तरह सक्रिय कर अनुपालन रिपोर्ट सौंपें।
नियम 222-E: जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनेगी जिला समिति!
उत्तर प्रदेश मोटर वाहन नियमावली के नियम 222-ई (Rule 222-E) के तहत जिला स्तर पर ‘जिला स्कूल वाहन सुरक्षा समिति’ के गठन का प्रावधान है।इस समिति की अध्यक्षता संबंधित जिले के जिलाधिकारी (DM) करेंगे।इस उच्च स्तरीय समिति में परिवहन विभाग, शिक्षा विभाग, यातायात पुलिस जैसे विभिन्न विभागों के अधिकारी और स्कूल परिवहन सेक्टर के प्रतिनिधि शामिल होंगे।यह समिति वाहनों के फिटनेस, परमिट की वैधता, सीटिंग क्षमता और चालकों के प्रशिक्षण की नियमित निगरानी करेगी।
नियम 222-G: हर स्कूल में परिवहन सुरक्षा समिति जरूरी!
इसके साथ ही, नियम 222-जी (Rule 222-G) के तहत राज्य के प्रत्येक स्कूल में व्यक्तिगत रूप से ‘स्कूल परिवहन सुरक्षा समिति’ का गठन करना अनिवार्य है। वर्तमान में किसी भी स्कूल में यह समिति सक्रिय रूप से काम नहीं कर रही थी, जिस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है।इस स्कूल स्तरीय समिति की अध्यक्षता स्कूल के प्रधानाचार्य (प्रिंसिपल) करेंगे और इसमें स्थानीय पुलिस, शिक्षा विभाग के अधिकारी व वाहन ऑपरेटर्स शामिल होंगे। यह समिति हर वाहन के फिटनेस और बीमा की समय-समय पर जांच कर आरटीओ (RTO) को रिपोर्ट करेगी।