छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि पति को केवल ‘सांवला’ या ‘मोटा’ कहना अपने आप में मानसिक क्रूरता साबित नहीं करता। अदालत ने पति की तलाक की अपील खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
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छत्तीसगढ़ न्यूज़ | छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद और तलाक से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी की है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि पत्नी द्वारा पति के रंग या शरीर को लेकर ‘सांवला’ (Black Complexioned) या ‘मोटा’ (Fatty-shaped) कहा जाना अपने आप में ‘मानसिक क्रूरता’ (Mental Cruelty) का आधार नहीं बन सकता। इस टिप्पणी के साथ जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने पति की तलाक की अपील को सिरे से खारिज कर दिया। बता दें कि यह मामला छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले का है। यहां के निवासी 28 वर्षीय आकाश घोष का विवाह 7 मार्च 2019 को पूजा सीत के साथ हुआ था। शादी के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच अनबन शुरू हो गई और वे अलग रहने लगे।पति ने कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी उसे अक्सर ‘सांवला और मोटा’ कहकर सार्वजनिक व पारिवारिक तौर पर अपमानित करती है। उसने यह भी दावा किया कि पत्नी बिना किसी ठोस वजह के मायके चली गई और उस पर झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देती है, जो कि मानसिक क्रूरता है।वहीं पत्नी ने पति के आरोपों को गलत बताया। उसने आरोप लगाया कि उसका पति शराब का सेवन करता है और उसके किसी अन्य महिला के साथ संबंध हैं। उसने यह भी कहा कि गर्भावस्था के दौरान पति ने उसकी सही से देखभाल नहीं की, जिसके बाद जुड़वां बच्चों का गर्भपात हो गया और वह इलाज के लिए रायगढ़ गई थी।
हाईकोर्ट का फैसला और कानूनी बारीकियां!
हाईकोर्ट ने इस मामले की गहन सुनवाई करते हुए कई अहम पहलुओं को रेखांकित किया।कोर्ट ने पाया कि पति अपनी पत्नी पर लगाए गए क्रूरता और बिना कारण छोड़ने (परित्याग) के आरोपों को साबित करने के लिए अदालत के सामने कोई ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य (Cogent Evidence) पेश नहीं कर सका।अदालत ने स्पष्ट किया कि वैवाहिक जीवन की सामान्य नोकझोंक, मौखिक बयानों या केवल ‘काला-मोटा’ कहने के आरोपों को तब तक विवाह-विच्छेद का आधार नहीं माना जा सकता जब तक कि उनके पीछे की गंभीर क्रूरता साबित न हो।हाईकोर्ट ने जांजगीर की फैमिली कोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया जिसने पति की तलाक की अर्जी खारिज कर दी थी। इसके साथ ही कोर्ट ने पति को निर्देश दिया कि वह पत्नी के माता-पिता द्वारा दिए गए उपहार और संपत्ति (स्त्रीधन) को वापस लौटाए।