नौएडा प्राधिकरण पर बरसीं शालिनी सिंह : 10,000 करोड़ के बजट के बावजूद सड़कें जर्जर, गांवों में पंचायत व्यवस्था की मांग
नोएडा प्राधिकरण के बजट और शहर की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर नोएडा सिटिजन्स फोरम की कार्यकारी अध्यक्ष शालिनी सिंह ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने टूटी सड़कों, खराब पानी, बदहाल पार्कों और गांवों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए ग्राम पंचायत व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।
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नोएडा न्यूज़ | नोएडा प्राधिकरण के भारी-भरकम बजट और जमीनी हकीकत के बीच बढ़ते अंतर को लेकर नोएडा सिटिजन्स फोरम (NCF) की कार्यकारी अध्यक्ष शालिनी सिंह ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का सालाना बजट होने के बावजूद नोएडा विधानसभा क्षेत्र के सेक्टरों और गांवों की स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है। बता दें कि टूटी सड़कें, पीने के पानी की घटिया गुणवत्ता और जर्जर बिजली व्यवस्था से नागरिक त्रस्त हैं।शहर के पार्क बदहाल पड़े हैं, स्वच्छता व्यवस्था ध्वस्त हो रही है और सड़कों पर बेसहारा गौवंश व पशु घूम रहे हैं, जिनके रखरखाव की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।नोएडा प्राधिकरण में नागरिकों की सही सुनवाई नहीं हो रही है। आरडब्ल्यूए (RWA) और एओए (AOA) द्वारा बार-बार शिकायत दर्ज कराने के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी असंतोष व्याप्त है।
गांवों की उपेक्षा और ग्राम पंचायत व्यवस्था की मांग!
शालिनी सिंह ने कहा कि नोएडा विधानसभा क्षेत्र में आने वाले गांवों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है कि प्राधिकरण ने अपने “विकास मॉडल” के नक्शे से गांवों को पूरी तरह बाहर कर दिया है। उन्होंने मांग की कि गांवों के विकास और देखरेख के लिए पूर्व की भांति ग्राम पंचायत व्यवस्था को पुनः लागू किया जाए, ताकि उपेक्षित गांवों की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान हो सके।प्राधिकरण के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि हर साल 10,000 करोड़ रुपये किस मद में खर्च किए जा रहे हैं। क्या इसका कोई पारदर्शी हिसाब-किताब रखा जा रहा है या फिर नोएडा वासियों को भविष्य में पूर्व की तरह कोई बड़ा घोटाला देखने को मिलेगा?।उन्होंने इस बात पर भी हैरानी जताई कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोएडा प्राधिकरण में व्याप्त भ्रष्टाचार पर कड़ी टिप्पणी किए जाने के बावजूद आज तक अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
जवाबदेही और आगामी रणनीति!
अधिकारियों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए NCF की कार्यकारी अध्यक्ष ने सुझाव दिया है कि नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठकों में स्थानीय सांसद और विधायक को शामिल किया जाना अनिवार्य हो, ताकि सरकारी धन का सही इस्तेमाल जनहित में सुनिश्चित किया जा सके।उन्होंने ऐलान किया कि सालों से चली आ रही इन जनसमस्याओं को लेकर जल्द ही नोएडा में एक बड़ी जनसभा का आयोजन किया जाएगा और वास्तविक जमीनी स्थिति से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को अवगत कराया जाएगा।

