नोएडा जिला अस्पताल में 17 संविदा स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती पर गंभीर सवाल उठे हैं। शासन की अनुमति और तय प्रक्रिया को दरकिनार करने के आरोपों के बीच लाखों रुपये के वेतन भुगतान की जांच शुरू हो गई है।
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नोएडा न्यूज़ | नोएडा के जिला संयुक्त अस्पताल (सेक्टर-39) में संविदा पर हुए 17 स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। शासन के आदेशों को दरकिनार कर स्थानीय स्तर पर की गई इन भर्तियों पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियां मिलने पर विभाग ने जवाब तलब किया है। वहीं, इन कर्मचारियों को दिए गए करीब 58 लाख रुपये के वेतन भुगतान के दावे के बाद अब कुल 21 लाख रुपये खातों में ट्रांसफर होने की बात सामने आई है। फिलहाल सभी 17 कर्मचारियों का वेतन रोककर मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है। बता दें कि नोएडा जिला अस्पताल में बिना शासन की अनुमति के 17 स्वास्थ्यकर्मियों की अवैध भर्ती का आरोप।स्थानीय स्तर के अधिकारियों ने सरकारी गाइडलाइंस को नजरअंदाज कर चहेतों को नौकरी दी आरोप।राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी पकड़कर अस्पताल प्रशासन से जवाब मांगा।करीब 58 लाख रुपये के कुल वेतन भुगतान के दावों के बीच 21 लाख खातों में ट्रांसफर होने की पुष्टि।मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी 17 कर्मचारियों का वेतन तत्काल प्रभाव से फ्रीज। भर्ती प्रक्रिया से जुड़े जिम्मेदार डॉक्टर, क्लर्क और प्रशासनिक अधिकारी अब जांच के दायरे में।
भ्रष्टाचार के आरोप और वित्तीय विसंगतियां!
अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, इन 17 कर्मचारियों की भर्ती में तय प्रक्रियाओं और मेरिट को पूरी तरह से छुपाया गया। विज्ञापन और चयन समिति के नियमों को ताक पर रखकर बैकडोर एंट्री कराई गई।इसके बाद इन कर्मचारियों को कुल 58 लाख का वेतन भुगतान दिखाने की कोशिश की गई, जिसमें से करीब ₹21 लाख की राशि अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर भी कर दी गई। जैसे ही वित्तीय विसंगतियों की भनक उच्च अधिकारियों को लगी, इस पूरे लेन-देन पर रोक लगा दी गई। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस खेल में बड़े पैमाने पर वित्तीय भ्रष्टाचार हुआ है।
जांच के घेरे में जिम्मेदार अधिकारी!
इस घोटाले की आंच अब अस्पताल के उन रसूखदार अधिकारियों और कर्मचारियों तक पहुंच गई है, जिन्होंने चयन और फाइल को आगे बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाई थी। शासन स्तर से इस बात की भी जांच की जा रही है कि किसके वित्तीय हस्ताक्षर (डीएससी) से बजट को पास किया गया।इस पूरे मामले पर जिला अस्पताल के सीएमएस (Chief Medical Superintendent) डॉ. अशोक झा ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा, “इस भर्ती प्रकरण में कई गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। हम पूरी रिपोर्ट तैयार कर शासन को पत्र लिख रहे हैं। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी।”
आगे क्या होगा?
यदि जांच में नियुक्तियां अवैध पाई जाती हैं, तो खातों में भेजे गए 21 लाख की रिकवरी की जाएगी।गलत तरीके से नौकरी पाने वाले सभी 17 स्वास्थ्यकर्मियों की सेवाएं तुरंत समाप्त की जा सकती हैं।भर्ती करने वाले दोषी अधिकारियों के खिलाफ निलंबन और एफआईआर (FIR) दर्ज होने की संभावना है।
