कच्चे माल और ईंधन की मार: बंदी की कगार पर लघु-मध्यम उद्योग, GST 18% से घटाकर 5% करने की मांग।

कच्चे माल और ईंधन की बढ़ती लागत से MSME सेक्टर पर संकट गहरा गया है। नोएडा के उद्यमियों ने सरकार से एक साल के लिए औद्योगिक उत्पादों पर GST 18% से घटाकर 5% करने की मांग की है।
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नोएडा न्यूज़ | विगत 18 महीनों से जारी यूक्रेन-रूस और अमेरिका-ईरान संकट के चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे माल और ईंधन की कीमतों में 150 से 200 प्रतिशत की बेतहाशा वृद्धि हुई है। इस भारी उछाल ने देश के लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSMEs) की कमर तोड़ दी है। बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और घटती उत्पादन क्षमता के कारण कई उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। इस गंभीर संकट से उबरने के लिए NEA (नौएडा एन्ट्रेप्रिनियोर्स एसोसिएशन) उद्यमियों ने सरकार से टैक्स में फौरी राहत देने और एक वर्ष के लिए औद्योगिक उत्पादों पर GST की दर को 18% से घटाकर 5% करने की पुरजोर मांग की है। बता दें कि अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव के कारण पॉलीमर, मेटल, इलेक्ट्रिकल, कॉपर, सोल्डर और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स जैसे आवश्यक कच्चे माल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसके साथ ही ईंधन (फ्यूल) के दामों में हुई रिकॉर्ड बढ़ोतरी ने माल ढुलाई और विनिर्माण लागत (Manufacturing Cost) को अत्यधिक बढ़ा दिया है।कार्यशील पूंजी (Working Capital) की कमी के कारण उद्योगों में उत्पादन का स्तर अपने न्यूनतम स्तर पर आ गया है।निर्माण लागत बढ़ने से छोटे उद्यमी बड़े कॉरपोरेट्स और विदेशी बाजारों के सामने टिक नहीं पा रहे हैं।आर्थिक रूप से असहाय महसूस कर रहे कई कारखाने या तो बंद हो चुके हैं या बंद होने के अंतिम कगार पर हैं, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार का संकट भी मंडरा रहा है।
GST दर को 5% करने का तर्क: ‘उद्योग बचेंगे, तभी तो टैक्स देंगे’
उद्यमियों का सुझाव है कि वर्तमान में अधिकांश औद्योगिक उत्पादों पर 18 प्रतिशत की उच्च दर से GST लग रहा है, जो इस मंदी के दौर में कारोबारियों पर अत्यधिक आर्थिक बोझ डाल रहा है। सरकार से मांग की गई है कि इस दर को तत्काल प्रभाव से एक वर्ष के लिए 5 प्रतिशत किया जाए।इस राहत के पीछे उद्यमियों ने व्यावहारिक तर्क दिए हैं कि
यदि टैक्स की दरें कम होती हैं, तो बंद होने जा रहे उद्योग दोबारा जीवित हो सकेंगे। उद्योग चलेंगे, तो वे भविष्य में भी सरकार को टैक्स देते रहेंगे, जिससे दीर्घकाल में सरकारी खजाने में बढ़ोतरी ही होगी।GST घटने से उद्यमियों के पास नकदी का प्रवाह बढ़ेगा, जिससे वे कच्चे माल की बढ़ी हुई कीमतों का सामना कर सकेंगे। यदि समय रहते यह कदम नहीं उठाया गया और उद्योग बंद हो गए, तो सरकार को न सिर्फ GST बल्कि इनकम टैक्स और अन्य प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष करों से भी हाथ धोना पड़ेगा।
देश के विकास के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत!
लघु और मध्यम उद्योग किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं। कच्चे माल और ईंधन की मार झेल रहे इन सेक्टर्स को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बनाए रखने के लिए नीतिगत सुधारों की तत्काल आवश्यकता है। उद्यमियों का मानना है कि टैक्स में यह अस्थायी कटौती सरकार के राजस्व को ज्यादा प्रभावित नहीं करेगी, बल्कि उद्योगों को संजीवनी देकर देश के विकास चक्र को सुचारू रूप से चलाने में मदद करेगी।


