October 23, 2026

झुग्गियों में बदहाली देख छलका शालिनी सिंह का दर्द, बुनियादी सुविधाओं को तरसते लोगों की पुकार पर खुद पहुंचीं जमीन पर।

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Noida: नोएडा की झुग्गी बस्तियों में बदहाल जिंदगी की तस्वीर देखकर सामाजिक कार्यकर्ता शालिनी सिंह का दर्द छलक उठा। स्थानीय लोगों की पुकार पर वह सेक्टर-4, 5, 8 और 10 की बस्तियों में पहुंचीं और पानी, जल निकासी, बिजली, सड़क व स्वास्थ्य जैसी समस्याओं का जायजा लिया।

News Diary Today | Noida News

नोएडा न्यूज़ | स्थानीय निवासियों के भावुक आमंत्रण और बार-बार की जा रही पुकार पर संज्ञान लेते हुए, जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता और जननेता शालिनी सिंह आज अचानक शहर की सबसे उपेक्षित झुग्गी बस्तियों के बीच पहुंचीं।चकाचौंध से दूर,तंग गलियों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जी रहे लोगों की दुर्दशा को जब उन्होंने अपनी आँखों से देखा, तो वह अपनी चिंता और नाराजगी नहीं छिपा सकीं। सबसे पहले शालिनी सिंह ने सेक्टर 4,5 फिर सेक्टर 8 एवं 10 का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रशासनिक उदासीनता पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि 21वीं सदी में भी हमारे अपने लोग इस तरह अमानवीय स्थितियों में रहने को मजबूर हैं। बता दें कि नोएडा की झुग्गी-बस्तियों में शालिनी सिंह के कदम रखते ही स्थानीय निवासियों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने उन्हें घेर लिया और अपनी रोज़मर्रा की बुनियादी समस्याओं की लंबी फेहरिस्त उनके सामने रख दी। शालिनी सिंह ने बिना किसी औपचारिक दूरी के, बेहद आत्मीयता से हर एक नागरिक की बात सुनी। कई बुजुर्गों और महिलाओं की आंखों में आंसू थे, जो लंबे समय से व्यवस्था की अनदेखी का शिकार हो रहे हैं।

मूलभूत सुविधाओं की बदहाली पर जताई तीखी चिंता!

बस्ती का दौरा करने के बाद शालिनी सिंह ने वहां व्याप्त गंभीर समस्याओं को रेखांकित किया।बस्ती में पीने के साफ पानी की कोई सुचारू व्यवस्था नहीं है। लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे बीमारियां फैल रही हैं।जल निकासी की कोई व्यवस्था न होने के कारण गलियों में कीचड़ और गंदा पानी जमा है, जो मच्छरों और संक्रामक रोगों का घर बन चुका है।बस्तियों में लटकते हुए खतरनाक बिजली के तार हादसों को दावत दे रहे हैं और बिजली की आपूर्ति न के बराबर है।आस-पास कोई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या बच्चों के लिए ठीक स्कूल न होने से नई पीढ़ी का भविष्य अंधकार में डूब रहा है।

यह केवल राजनीति नहीं, इंसानियत का मुद्दा है”!

शालिनी सिंह ने मीडिया से बात करते हुए स्थानीय प्रशासन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “मैं यहाँ किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं, बल्कि इन मासूम लोगों की कराह सुनकर आई हूँ। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच इन झुग्गियों की यह बदहाली प्रशासनिक नाकामी का जीता-जागता सबूत है। साफ पानी, बिजली और पक्की सड़कें हर नागरिक का मौलिक अधिकार हैं, कोई खैरात नहीं।”उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले एक सप्ताह के भीतर प्रशासन ने इस बस्ती में साफ-सफाई और पानी की मुकम्मल व्यवस्था शुरू नहीं की, तो वह स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर एक बड़ा जन-आंदोलन शुरू करेंगी। शालिनी सिंह के इस दौरे ने जहां एक तरफ सोए हुए प्रशासन को जगाने का काम किया है, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाओं को तरसते इन बेबस लोगों के दिलों में उम्मीद की एक नई किरण जगा दी है।

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