Bareilly Violence: बरेली हिंसा मामले में मौलाना तौकीर रजा को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। जमानत याचिका खारिज करते हुए जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की पीठ ने ‘सर तन से जुदा’ जैसे नारे को लेकर कड़ी टिप्पणी की और इसे कानून के शासन तथा भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए चुनौती बताया।
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UP High Court | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली हिंसा के मुख्य आरोपी मौलाना तौकीर रजा की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने सुनवाई के दौरान “सर तन से जुदा” के नारे को लेकर बेहद सख्त और ऐतिहासिक टिप्पणी की है। न्यायधीश जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के हिंसक नारे देश की कानून-व्यवस्था के लिए खुली चुनौती हैं। बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि “गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा” जैसे नारे की तुलना किसी भी अन्य धार्मिक नारे से नहीं की जा सकती। कोर्ट ने विभिन्न धार्मिक उद्घोषों का उदाहरण देते हुए अंतर स्पष्ट किया कि “नारा-ए-तकबीर अल्लाहु-अकबर”, “जय श्री राम”, “हर हर महादेव” या “जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल” जैसे नारे आस्था से जुड़े हैं। ये संबंधित ईश्वर, भगवान या गुरु के प्रति सम्मान और श्रद्धा प्रकट करते हैं।इसके विपरीत, “सर तन से जुदा” का नारा किसी भी रूप में धार्मिक अभिव्यक्ति या स्वतंत्रता के दायरे में नहीं आता। यह सीधे तौर पर भारत की संप्रभुता, अखंडता और कानून के शासन को चुनौती देता है। यह लोगों को कानून हाथ में लेने और सशस्त्र विद्रोह के लिए उकसाने का काम करता है।
क्या था पूरा मामला?
सितंबर 2025 में बरेली में “आई लव मोहम्मद” पोस्टर को लेकर विवाद खड़ा हुआ था।इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा ने इसके विरोध में 26 सितंबर 2025 को इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान में मुस्लिम समुदाय को जुटने का आह्वान किया था।स्थानीय प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सार्वजनिक रूप से इकट्ठा होने पर पाबंदी (बीएनएसएस की धारा 163) लगा दी थी।पाबंदी के बावजूद हजारों की भीड़ मैदान की तरफ बढ़ी। जब पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, तो भीड़ ने “सर तन से जुदा” के हिंसक नारे लगाए। पुलिस पर पथराव, पेट्रोल बम फेंके गए और फायरिंग भी की गई, जिसमें कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए थे।
कोर्ट ने क्यों नहीं दी मौलाना को राहत?
बचाव पक्ष की दलील थी कि मौलाना घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं थे और उन्हें नजरबंद किया गया था। हालांकि, दैनिक भास्कर और लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्टों के अनुसार, कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के दावों को सही पाया।मौलाना ने ही बिना प्रशासनिक अनुमति के इतनी बड़ी भीड़ को जुटने के लिए उकसाया था।हिंसा की वारदात के बाद मौलाना ने एक वीडियो जारी कर भीड़ का शुक्रिया अदा किया और उनके इस कृत्य की सराहना की थी।मौलाना के खिलाफ मामले में आरोप पत्र (chargesheet) दाखिल हो चुका है। उनके पुराने आपराधिक इतिहास और सामाजिक सौहार्द को खतरे में डालने की आशंका को देखते हुए अदालत ने उन्हें जमानत देने से साफ इनकार कर दिया। मौलाना तौकीर रजा सितंबर 2025 से ही जेल में बंद हैं।
