सरकारी खजाने को चूना नहीं चलेगा’— SC/ST राहत राशि घोटाले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, पूरे यूपी में जांच के आदेश।

UP High Court: SC/ST एक्ट के तहत मिलने वाली राहत राशि के कथित दुरुपयोग पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पूरे उत्तर प्रदेश में योजना के तहत बांटी गई राशि की जांच के आदेश देते हुए 90 दिनों में रिपोर्ट मांगी है।

News Diary Today | Uttar Pradesh

UP High Court | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में SC/ST एक्ट के तहत मिलने वाली आर्थिक राहत राशि के दुरुपयोग पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि ‘सरकारी खजाने को चूना लगाना’ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पूरे यूपी में इस योजना के तहत बांटी गई राशि की सघन जांच के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने जिला प्रशासनों को तीन महीने (90 दिन) के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश जारी किया है। बता दें कि यह आदेश जस्टिस संतोष राय की सिंगल बेंच ने झांसी के संतोष कुमार धोहरे और अरविंद कुमार की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया. याचिकाकर्ताओं ने झांसी की विशेष अदालत (SC/ST एक्ट) के 23 जुलाई 2024 के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी बकाया राहत राशि के भुगतान के आवेदन को खारिज कर दिया गया था।जब यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा, तो सरकारी वकीलों (अपर शासकीय अधिवक्ता राजेश कुमार शुक्ल और शिखर टंडन) ने अदालत के सामने जो आंकड़े पेश किए, उसने सबको चौंका दिया।

एक ही परिवार और 23 लाख का खेल!

जांच में सामने आया कि अपीलकर्ता संतोष कुमार धोहरे और उनके परिवार के सदस्यों ने मिलकर अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज कराए और अब तक ₹23,36,250 (23 लाख से ज्यादा) की भारी-भरकम राहत राशि डकार चुके हैं।इतना ही नहीं, इस परिवार के 10 से 12 और मामले अभी भी जिला स्तरीय समिति के सामने लंबित हैं, जिनमें वे और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।जब कोर्ट ने इस पर जवाब मांगा, तो याचिकाकर्ता पक्ष इन आंकड़ों का खंडन नहीं कर सका।

हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी और सख्त निर्देश!

हाईकोर्ट ने कहा कि बार-बार मुकदमे दर्ज कराना ही सीधे तौर पर गलत नहीं है, लेकिन एक ही परिवार द्वारा इतनी बड़ी संख्या में केस दर्ज कराकर लाखों रुपये की राहत राशि निकालना एक ऐसा पैटर्न दिखाता है जिसकी निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है।न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन को कड़े निर्देश दिए हैं‌‌।राज्य के सभी जिलों में इस बात की जांच की जाए कि कहीं इस जन-कल्याणकारी योजना का संगठित रूप से दुरुपयोग तो नहीं हो रहा है।सभी जिला प्रशासनों और कल्याण समितियों को 3 महीने के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपनी होगी।यूपी के सभी जिलों के विशेष SC/ST न्यायाधीशों को सतर्क रहने को कहा गया है ताकि योजना का लाभ केवल वास्तविक पीड़ितों को ही मिले. हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि इस जांच का मकसद किसी वास्तविक पीड़ित के कानूनी अधिकार को रोकना या पूर्वाग्रह से देखना नहीं है।इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस फैसले की प्रति उत्तर प्रदेश के सभी जिला जजों, जिलाधिकारियों (DM), कप्तानों (SSP/SP), मुख्य सचिव और गृह विभाग के प्रमुख सचिव को तुरंत भेजने का आदेश दिया है ताकि पूरे राज्य में इस पर तुरंत एक्शन लिया जा सके

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