ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस अग्निकांड में 9 यात्रियों की मौत के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने रात में स्लीपर बसों की औचक जांच और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
News Diary Today | Noida News
ग्रेटर नोएडा न्यूज़ | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर दिल्ली से महोबा जा रही एक निजी एसी स्लीपर बस में आग लगने से 9 यात्रियों की दर्दनाक मौत के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है. कोर्ट ने इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) और परिवहन विभाग के आला अधिकारियों को तलब कर सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। बता दें कि न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को निम्नलिखित कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।स्लीपर बसें मुख्य रूप से रात के समय चलती हैं, इसलिए मुख्य सचिव ने कोर्ट को आश्वस्त किया है कि रात में परिवहन और पुलिस विभाग मिलकर विशेष और औचक निरीक्षण अभियान चलाएंगे।कोर्ट ने साफ किया कि यदि बस में तय अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) और स्लीपर कोच मानकों का उल्लंघन पाया गया, तो केवल ड्राइवर और परिचालक ही नहीं बल्कि बस के परमिट लाइसेंसधारक (मालिक) के खिलाफ भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए. गंभीर मामलों में ऐसे लाइसेंसधारियों की सभी बसों को प्रतिबंधित (Ban) करने पर विचार करने को कहा गया है।हाईकोर्ट ने परिवहन विभाग से पिछले तीन वर्षों में उत्तर प्रदेश से जारी किए गए स्लीपर बस परमिटों की संख्या, सुरक्षा जांच का रिकॉर्ड और राज्य के बॉर्डर पर की जाने वाली औचक चेकिंग का पूरा डेटा हलफनामे के रूप में मांगा है।कोर्ट और विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया है कि बसों के केवल इंजन या ब्रेक ही नहीं, बल्कि हर ट्रिप से पहले उनके इलेक्ट्रिकल सिस्टम, एसी यूनिट, मॉडिफिकेशन्स और इमरजेंसी गेटों की गहन जांच होनी चाहिए ताकि ऐसी भीषण आगजनी को रोका जा सके।
क्या है पूरा मामला? (चलती बस बनी काल)
यह भीषण हादसा ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे पर दयानतपुर गांव के पास हुआ, जब दिल्ली से महोबा की ओर जा रही स्लीपर बस के एसी कंपार्टमेंट में अचानक शॉर्ट सर्किट की वजह से चिंगारी उठी और देखते ही देखते पूरी बस आग का गोला बन गई।नियमों के मुताबिक स्लीपर बसों का डिजाइन 2×1 (एक तरफ दो बर्थ, बीच में गैलरी और दूसरी तरफ एक बर्थ) होना चाहिए, लेकिन मुनाफे के लिए संचालक इसे 2×2 में तब्दील कर देते हैं. इस अवैध मॉडिफिकेशन के चलते गैलरी इतनी संकरी हो जाती है कि आपातकाल में यात्रियों को भागने का रास्ता नहीं मिलता।खिड़कियां पूरी तरह पैक होने के चलते अंदर जहरीला धुआं भर गया. कई यात्रियों ने खिड़कियों से कूदकर अपनी जान बचाई, लेकिन 9 लोग अंदर ही फंसे रह गए और जिंदा जल गए।इस मामले में कोर्ट ने पूर्व के हादसों (कन्नौज, मथुरा, रायबरेली-प्रयागराज हाईवे) का हवाला देते हुए राज्य सरकार को एक पुख्ता और सुरक्षित रेगुलेटरी इकोसिस्टम बनाने का आदेश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को तय की गई है।