यूपी में एफएसडीए का बड़ा एक्शन : 30 करोड़ की नकली दवाएं जब्त, 68 आरोपी गिरफ्तार

:- सीएम योगी का ऐलान – “नकली दवा माफिया को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नकली दवाओं के काले कारोबार पर जोरदार प्रहार किया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) विभाग ने प्रदेशभर में चलाए गए छापेमारी अभियान के तहत 30 करोड़ 77 लाख रुपये से अधिक मूल्य की नकली दवाएं बरामद की हैं। इस दौरान 68 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 1166 दवा विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द कर दिए गए। साथ ही, 6 दवा निर्माण कंपनियों और 5 ब्लड बैंकों के लाइसेंस भी निरस्त किए गए हैं।

एफएसडीए अधिकारियों ने इस पूरे अभियान की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दी। सीएम ने स्पष्ट किया कि नकली दवा बेचने वालों के लिए उत्तर प्रदेश में कोई जगह नहीं है।

1039 छापेमारी अभियान चलाए गए

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एफएसडीए ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेशभर में 1039 छापेमारी अभियान चलाए। इनमें 13,848 दवाओं के नमूने जांच के लिए लिए गए, जिनमें से 96 नमूने पूरी तरह नकली और 497 निम्न गुणवत्ता के पाए गए।

लखनऊ, आगरा और गाजियाबाद में सबसे ज्यादा कार्रवाई

इस अभियान में लखनऊ, आगरा और गाजियाबाद जिलों में सबसे अधिक नकली दवाओं का कारोबार पकड़ा गया। लखनऊ में एसटीएफ की मदद से ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन सहित कई नकली दवाएं बरामद की गईं। आगरा में 5 नवंबर 2024 को 1.36 करोड़ रुपये की फर्जी दवाएं जब्त की गईं, जबकि गाजियाबाद में 6 फरवरी 2025 को 0.9 करोड़ रुपये की नारकोटिक दवाओं की खेप पकड़ी गई। बरेली में नकली कॉस्मेटिक उत्पाद भी बड़ी मात्रा में मिले।

एफएसडीए विभाग ने आयुर्वेदिक दवाओं के नाम पर बेची जा रही एलोपैथिक दवाओं पर भी नजर रखी है। इस संबंध में 14 संदिग्ध नमूनों की जांच चल रही है।

नकली दवा माफिया के लिए कोई स्थान नहीं” – सीएम योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में नकली दवाएं बेचने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “यह अभियान न केवल जनस्वास्थ्य की रक्षा करेगा, बल्कि ड्रग माफिया के खिलाफ एक बड़ा ऑपरेशन भी है।”

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में ऐसी कार्रवाई और तेज की जाएगी ताकि जनता को शुद्ध और प्रभावशाली दवाएं मिलती रहें।

विशेषज्ञों का कहना है कि नकली दवाएं न सिर्फ बीमारी ठीक करने में असफल होती हैं, बल्कि जानलेवा भी हो सकती हैं। यही वजह है कि केंद्र सरकार भी इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है।

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  • Harvir Chauhan

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