पहली ही तेज बारिश ने एक बार फिर नोएडा की मानसून तैयारियों की पोल खोल दी। शहर की सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, वाहन पानी में फंस गए, लोग घंटों जाम में परेशान रहे और कई औद्योगिक इकाइयों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। इन हालात के बीच नोएडा सिटीजन फोरम (एनसीएफ) की कार्यकारी अध्यक्षा शालिनी सिंह ने शहर का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और नोएडा प्राधिकरण की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
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नोएडा न्यूज़ | लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर नोएडा प्राधिकरण की मानसून पूर्व तैयारियों की वास्तविकता सामने ला दी। शहर की मुख्य सड़कें, सर्विस रोड, चौराहे, आवासीय और औद्योगिक इलाके जलमग्न हो गए। कई स्थानों पर घंटों तक जाम लगा रहा, वाहन पानी में बंद हो गए और लोग कमर तक पानी में उतरकर अपने गंतव्य तक पहुंचने को मजबूर दिखे।
इन्हीं हालात का जायजा लेने के लिए नोएडा सिटीजन फोरम (एनसीएफ) की कार्यकारी अध्यक्षा शालिनी सिंह शहर की विभिन्न सड़कों और जलभराव प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचीं। निरीक्षण के दौरान कई जगह नालियां ओवरफ्लो होती मिलीं, जबकि कुछ स्थानों पर खुले नालों में बिजली के तार पड़े दिखाई दिए, जिससे बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।
बारिश के बीच हो रही नालों की सफाई पर उठे सवाल
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि जिन नालों की सफाई मानसून शुरू होने से पहले पूरी होनी चाहिए थी, उनकी सफाई बारिश के दौरान भारी मशीनों से कराई जा रही थी। इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए शालिनी सिंह ने कहा कि यदि समय रहते तैयारियां पूरी कर ली जातीं तो आज शहर को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
उन्होंने कहा कि हर वर्ष नालों की सफाई, सीवेज व्यवस्था और जल निकासी पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन पहली ही बारिश में पूरा शहर पानी में डूब जाता है। इससे स्पष्ट है कि कहीं न कहीं गंभीर लापरवाही, निगरानी की कमी और कार्यप्रणाली में खामियां हैं।
“केवल ठेकेदार नहीं, अधिकारियों की भी तय हो जवाबदेही”
शालिनी सिंह ने कहा कि सिर्फ ठेकेदारों पर जुर्माना लगाकर या औपचारिक कार्रवाई कर मामले को खत्म नहीं किया जा सकता। जिन अधिकारियों को इन कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई थी, उनकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि नोएडा को प्रदेश और देश की ‘शो विंडो’ माना जाता है, लेकिन हर मानसून में जलभराव की तस्वीरें शहर की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं। यदि यही स्थिति बनी रही तो नागरिकों का प्रशासन पर भरोसा कमजोर होता जाएगा।
एनसीएफ की प्रमुख मांगें
नोएडा सिटीजन फोरम ने स्थानीय विधायक से हस्तक्षेप की मांग करते हुए पांच प्रमुख मांगें रखीं—
- मानसून पूर्व तैयारियों और जलभराव के कारणों पर सीईओ से विस्तृत रिपोर्ट लेकर उसे सार्वजनिक किया जाए।
- नालों की सफाई और जल निकासी के ठेकों से जुड़ी कंपनियों, भुगतान और जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
- जलभराव रोकने में विफल कंपनियों को तत्काल ब्लैकलिस्ट किया जाए।
- लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
- भविष्य में जलभराव रोकने के लिए समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह कार्ययोजना जनता के सामने प्रस्तुत की जाए।
“अब आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए”
शालिनी सिंह ने कहा कि प्राधिकरण के अधिकारियों को एयर-कंडीशन दफ्तरों से निकलकर जमीनी हालात देखने चाहिए। जब थोड़ी सी बारिश में पूरा शहर ठहर जाए, उद्योगों को नुकसान हो और आम नागरिक जान जोखिम में डालकर निकलने को मजबूर हों, तो इसे केवल प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि प्रशासनिक विफलता माना जाना चाहिए।
