यूपी सरकार का 24 घंटे में यू-टर्न : प्राधिकरण अफसरों के तबादले किए, अगले दिन आदेश निरस्त कर दी पुरानी तैनाती।

उत्तर प्रदेश सरकार ने महज 24 घंटे के भीतर अपने ही तबादला आदेश को पलटते हुए नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण समेत छह प्रमुख औद्योगिक संस्थाओं में किए गए अधिकारियों के स्थानांतरण रद्द कर दिए। सरकार के इस अचानक यू-टर्न ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है और फैसले की प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

News Diary Today, Uttar Pradesh

Lucknow/Noida : उत्तर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास विभाग ने अपने ही आदेश को 24 घंटे के अंदर पलट दिया। 30 मई को नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना प्राधिकरण, यूपीसीडा, गीडा और बुंदेलखंड प्राधिकरण के दर्जनों अफसरों के तबादले किए गए थे। लेकिन 31 मई को नया आदेश जारी कर सभी तबादले निरस्त कर दिए गए और अफसरों को फिर से पुरानी सीट पर तैनात कर दिया गया। शासन के इस यू-टर्न पर सवाल उठ रहे हैं। बता दें औद्योगिक विकास विभाग ने 30 मई को आदेश जारी कर नोएडा-ग्रेटर नोएडा समेत 6 प्राधिकरणों में प्रबंधक, OSD और DGM स्तर के 20 से ज्यादा अफसरों के तबादले कर दिए थे। इसमें आलोक अग्रवाल, रोहित सिंह, करण सिंह त्यागी, शोभा सिंह, सुधीर सिंह, प्रेम चंद्र सेन, हर्ष गर्ग, अनेज कुमार आनंद जैसे अफसर शामिल थे। सालों से एक सीट पर जमे अफसरों को हटाने की बात कही गई थी लेकिन 31 मई की सुबह नया आदेश जारी हुआ। इसमें 30 मई को हुए सभी तबादले निरस्त कर दिए गए। आदेश में कहा गया कि “प्रशासनिक आवश्यकता और जनहित” में तबादले वापस लिए जा रहे हैं। जिन अफसरों का ट्रांसफर हुआ था, उन्हें यथावत पुरानी तैनाती पर बने रहने के निर्देश दिए गए। सूत्रों के मुताबिक 30 मई के आदेश के बाद प्राधिकरणों में हड़कंप मच गया था। जेवर एयरपोर्ट, डाटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और NCR प्लानिंग से जुड़े कई अहम प्रोजेक्ट्स की फाइलें अटक गईं। कई अफसरों ने शासन में पैरवी शुरू कर दी और बताया जा रहा है कि CM कार्यालय तक मामला पहुंचने के बाद रातों-रात आदेश बदलने का फैसला लिया गया। तकनीकी प्रोजेक्ट्स बीच में रुकने और बिल्डर-बायर्स के मामलों के लटकने की आशंका के चलते शासन बैकफुट पर आया।

अफसरों में असमंजस, उठे सवाल?

24 घंटे में आदेश बदलने से प्राधिकरणों में अफसरों के बीच असमंजस है। नोएडा सिटीजन फॉर्म ने शासन की कार्य
प्रणाली पर सवाल उठाए हैं। संस्था के महासचिव का कहना है कि”सरकार बिना होमवर्क तबादले करती है और फिर दबाव में वापस ले लेती है और वही औद्योगिक विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रोजेक्ट्स की समीक्षा के बाद लगा कि अनुभवी अफसरों को हटाने से काम प्रभावित होगा, इसलिए फैसला बदला गया‌ है। यह पहला मौका नहीं है जब तबादले निरस्त हुए हों। जनवरी में भी रोहित सिंह समेत कई अफसरों के तबादले कर 10 दिन में वापस ले लिए गए थे। 19 मई को आलोक अग्रवाल का ट्रांसफर हुआ था, जिसे अब फिर निरस्त कर दिया गया।फिलहाल सभी अफसर 1 जून से अपनी पुरानी सीट पर काम करते रहेंगे। शासन ने संकेत दिए हैं कि जून के दूसरे हफ्ते में फिर से समीक्षा कर तबादला सूची जारी हो सकती है। लेकिन 24 घंटे में आदेश पलटने से शासन की साख पर सवाल खड़े हो गए हैं। (News Diary Today)