जेवर एयरपोर्ट-गंगा एक्सप्रेसवे लिंक प्रोजेक्ट में L&T को तगड़ा झटका: तकनीकी बोली खारिज करने का फैसला हाई कोर्ट में बरकरार!

जेवर एयरपोर्ट–गंगा एक्सप्रेसवे लिंक प्रोजेक्ट के टेंडर में L&T को बड़ा झटका लगा है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने कंपनी की तकनीकी बोली को गैर-उत्तरदायी मानकर खारिज करने के UPEIDA के फैसले को बरकरार रखा है।
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प्रयागराज/ नोएडा | इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बुलंदशहर के रास्ते गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले लिंक एक्सप्रेसवे (पैकेज-1) परियोजना के टेंडर मामले में दिग्गज बुनियादी ढांचा कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को बहुत बड़ा झटका दिया है। न्यायालय ने उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा – UPEIDA) द्वारा L&T की तकनीकी बोली को ‘गैर-उत्तरदायी’ (Non-Responsive) घोषित कर खारिज करने के फैसले पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है। बता दें कि यह महत्वपूर्ण फैसला न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की पीठ ने 29 सितंबर को सुनाया, जिसके तहत यूपीडा के निर्णय को पूरी तरह न्यायसंगत और तर्कसंगत ठहराया गया है।अदालत के दस्तावेजों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश जल जीवन मिशन ने 13 अप्रैल 2026 को L&T कंपनी पर सरकारी प्रतिबंध (रोक) लगाया था। यूपीडा द्वारा जारी इस मौजूदा एक्सप्रेसवे टेंडर में तकनीकी और वित्तीय बोली जमा करने की अंतिम तारीख 7 सितंबर 2026 तय की गई थी।चूंकि 7 सितंबर तक L&T पर यह सरकारी प्रतिबंध पूरी तरह प्रभावी था, इसलिए तकनीकी मूल्यांकन समिति ने कंपनी को निविदा शर्तों के तहत अपात्र घोषित कर दिया। हालांकि, इस अंतिम तिथि के ठीक 7 दिन बाद यानी 14 सितंबर 2026 को कंपनी से यह प्रतिबंध हटा (स्थगित हो) गया था, लेकिन कोर्ट ने साफ किया कि बाद में प्रतिबंध हटने से आवेदन के समय की अयोग्यता खत्म नहीं हो जाती।
हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां!
कोर्ट में सुनवाई के दौरान L&T के वकीलों ने दलील दी थी कि कंपनी द्वारा प्रस्तावित बोली यूपीडा के अनुमान से करीब ₹252 करोड़ रुपये कम (सबसे सस्ती) थी। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यदि कोई कंपनी बुनियादी और अनिवार्य पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करती, तो केवल कम कीमत का प्रस्ताव दे देने से उसे वित्तीय मूल्यांकन या टेंडर में शामिल होने का कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता।पीठ ने स्पष्ट किया कि यूपीडा की तकनीकी मूल्यांकन समिति का निर्णय निविदा की तय शर्तों के अनुरूप था। इसमें किसी भी तरह की दुर्भावना या मनमानापन नहीं था। कोर्ट ने मामले में दिए गए सभी पूर्व अंतरिम आदेशों को भी समाप्त कर दिया है।इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब यह साफ हो गया है कि देश की इस प्रतिष्ठित परियोजना का काम L&T को नहीं मिल सकेगा, और यूपीडा अब नियमानुसार अन्य पात्र कंपनियों के साथ इस एक्सप्रेसवे लिंक का निर्माण कार्य आगे बढ़ाएगी।


