SSC Exam में फिर तकनीकी गड़बड़ी! नोएडा में हजारों अभ्यर्थी बिना परीक्षा दिए लौटे,13 सितंबर को दोबारा एग्जाम

News Diary Today | Noida News

Greater Noida/Noida: सरकारी नौकरी की तैयारी में महीनों और कई बार वर्षों की मेहनत लगाने वाले अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा का दिन किसी बड़े अवसर से कम नहीं होता। लेकिन जब परीक्षा केंद्र पहुंचने के बाद सिस्टम ही जवाब दे जाए, तो अभ्यर्थियों के सामने सिर्फ एक तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि अपनी मेहनत, समय और भविष्य को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है।

ग्रेटर नोएडा में SSC Junior Hindi Translator (JHT) परीक्षा के दौरान तकनीकी खराबी की वजह से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को परीक्षा दिए बिना वापस लौटना पड़ा। केंद्र के बाहर नाराज अभ्यर्थियों ने हंगामा किया, जिसके बाद पुलिस को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी।

इसी दौरान नोएडा के एक परीक्षा केंद्र पर SSC Combined Hindi Translator (CHT) परीक्षा भी तकनीकी समस्या के कारण प्रभावित हुई। SSC ने प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा को दोबारा आयोजित करने का फैसला किया है। नोएडा के प्रभावित केंद्र के लिए री-एग्जाम 13 सितंबर 2026 को निर्धारित किया गया है।

परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के बाद मिला ‘री-एग्जाम’ का जवाब

अभ्यर्थियों की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह यही है कि परीक्षा देने के लिए वे निर्धारित समय पर केंद्र तक पहुंचे थे। कई उम्मीदवारों ने यात्रा, रहने और अन्य तैयारियों पर पैसा और समय खर्च किया था।

ऐसे में परीक्षा शुरू होने के समय सर्वर या कंप्यूटर सिस्टम में तकनीकी समस्या आना उनके लिए महज कुछ घंटों की परेशानी नहीं है।

एक अभ्यर्थी के लिए री-एग्जाम का मतलब है—दोबारा यात्रा, दोबारा तैयारी, दोबारा मानसिक दबाव और कई मामलों में पढ़ाई या नौकरी से छुट्टी की नई व्यवस्था।

यही वजह है कि परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी समस्या की खबर सामने आते ही अभ्यर्थियों का गुस्सा बढ़ जाता है।

SSC CHT परीक्षा भी तकनीकी समस्या से प्रभावित

नोएडा के आदर्श परीक्षा केंद्र, सेक्टर-155 में SSC CHT 2026 Tier-I परीक्षा तकनीकी समस्या के कारण प्रभावित हुई। SSC Northern Region ने प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा को 13 सितंबर 2026 को दोबारा कराने की जानकारी दी है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि यह फैसला पूरे देश की CHT परीक्षा को स्थगित करने का नहीं, बल्कि प्रभावित केंद्र के अभ्यर्थियों के लिए है।

यानी समस्या स्थानीय केंद्र की थी, लेकिन सवाल व्यवस्था पर राष्ट्रीय स्तर का है—अगर परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर और सर्वर आधारित है, तो ऐसे केंद्रों के लिए बैकअप सिस्टम कितना मजबूत है?


यह पहली बार नहीं है… और यहीं से बड़ा सवाल शुरू होता है

SSC परीक्षाओं में तकनीकी या प्रशासनिक समस्याओं के कारण परीक्षा प्रभावित होने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं।

जुलाई 2025 में SSC Selection Post Phase-XIII की परीक्षा के दौरान कर्नाटक के हुबली स्थित कुछ केंद्रों पर तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से परीक्षा रद्द और री-शेड्यूल की गई थी। SSC KKR के आधिकारिक नोटिस में EDUCASA International, Hubballi में 24 जुलाई की कुछ शिफ्ट और उसके बाद की निर्धारित शिफ्टों को तकनीकी/प्रशासनिक कारणों से रद्द किए जाने की जानकारी दी गई थी।

इस मामले में भी प्रभावित उम्मीदवारों को बाद में परीक्षा देने का मौका दिया गया। लेकिन सवाल फिर वही था—आखिर परीक्षा के दिन ही सिस्टम क्यों फेल हुआ?

2025 में SSC CGL के दौरान भी सामने आई थी ऐसी तस्वीर

सितंबर 2025 में SSC CGL Tier-I परीक्षा को लेकर भी दिल्ली-NCR, गुरुग्राम, जम्मू और अन्य क्षेत्रों के कुछ केंद्रों से तकनीकी गड़बड़ियों और परीक्षा रद्द होने की खबरें सामने आई थीं।

SSC ने उस समय स्पष्ट किया था कि कुल 2,435 निर्धारित शिफ्टों में से 25 शिफ्ट प्रभावित हुईं और 7,705 अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा के लिए शेड्यूल किया गया। आयोग ने यह भी कहा था कि व्यापक स्तर पर परीक्षा रद्द नहीं हुई थी और प्रक्रिया आगे बढ़ रही थी।

संख्या भले ही कुल परीक्षा के मुकाबले छोटी दिखाई दे, लेकिन जिस अभ्यर्थी की शिफ्ट रद्द होती है, उसके लिए वह ‘छोटी संख्या’ नहीं होती।

उसके लिए वही एक परीक्षा होती है।

वही एक दिन होता है।

और उसी दिन सिस्टम फेल होने पर उसकी महीनों की तैयारी अचानक अधर में चली जाती है।


असली समस्या री-एग्जाम नहीं, भरोसे की है

यहां एक महत्वपूर्ण सवाल है।

क्या री-एग्जाम करा देना ही समस्या का समाधान है?

कागज पर इसका जवाब हां हो सकता है। प्रभावित उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा का मौका मिल जाता है। लेकिन जमीनी स्तर पर समस्या इससे कहीं बड़ी है।

एक प्रतियोगी परीक्षा में अभ्यर्थी सिर्फ प्रश्नों की तैयारी नहीं करता। वह अपनी पूरी दिनचर्या को परीक्षा की तारीख के हिसाब से व्यवस्थित करता है।

कई उम्मीदवार दूसरे शहर से यात्रा करके आते हैं। कोई ट्रेन से आता है, कोई बस से। कोई परीक्षा केंद्र के आसपास एक दिन पहले होटल में रुकता है। किसी ने छुट्टी ली होती है तो कोई नौकरी या पढ़ाई से समय निकालकर परीक्षा देने पहुंचता है।

ऐसे में अंतिम समय पर परीक्षा रद्द होने का आर्थिक और मानसिक असर भी होता है।

और सबसे बड़ी चीज—परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा।


सवाल सिर्फ सर्वर का नहीं, बैकअप सिस्टम का है

आज जब सरकारी भर्ती परीक्षाएं बड़े पैमाने पर कंप्यूटर आधारित हो चुकी हैं, तब तकनीकी खराबी की संभावना को पूरी तरह खत्म करना मुश्किल है।

लेकिन एक मजबूत परीक्षा प्रणाली का मतलब यह नहीं है कि उसमें कभी तकनीकी खराबी नहीं आएगी।

मजबूत सिस्टम का मतलब है कि तकनीकी खराबी आने के बावजूद परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह ठप न हो।

इसके लिए जरूरी है कि परीक्षा केंद्रों पर:

  • पर्याप्त सर्वर बैकअप हो।
  • इंटरनेट कनेक्टिविटी का वैकल्पिक इंतजाम हो।
  • बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था हो।
  • सर्वर और कंप्यूटर का परीक्षा से पहले वास्तविक परिस्थितियों में टेस्ट किया जाए।
  • परीक्षा शुरू होने से पहले तकनीकी ऑडिट किया जाए।
  • अचानक समस्या आने पर तत्काल निर्णय लेने वाली टीम मौजूद हो।
  • प्रभावित अभ्यर्थियों को समय पर स्पष्ट जानकारी दी जाए।
  • री-एग्जाम के साथ उनके यात्रा और अन्य नुकसान की शिकायतों के लिए पारदर्शी व्यवस्था हो।

क्योंकि एक हाई-स्टेक्स सरकारी परीक्षा में ‘सॉरी, तकनीकी समस्या आ गई’ पर्याप्त जवाब नहीं हो सकता।


अभ्यर्थियों की नाराजगी को सिर्फ हंगामा मानना भी सही नहीं

ग्रेटर नोएडा में परीक्षा प्रभावित होने के बाद अभ्यर्थियों का केंद्र के बाहर नाराज होना स्वाभाविक है।

हालांकि किसी भी परिस्थिति में कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, लेकिन प्रशासन और परीक्षा एजेंसी के लिए यह समझना भी जरूरी है कि परीक्षा केंद्र के बाहर खड़ा अभ्यर्थी सिर्फ भीड़ का हिस्सा नहीं है।

वह उस व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है, जिसके आधार पर पूरी भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

उसने आवेदन किया।

फीस जमा की।

तैयारी की।

एडमिट कार्ड लिया।

परीक्षा केंद्र पहुंचा।

और फिर अगर तकनीकी समस्या के कारण परीक्षा नहीं हुई, तो उसकी नाराजगी को सिर्फ ‘व्यवस्था बिगाड़ने’ के नजरिए से देखना समस्या की जड़ तक पहुंचने से बचना होगा।


बार-बार री-एग्जाम… लेकिन स्थायी समाधान कब?

SSC जैसी केंद्रीय भर्ती संस्था से उम्मीदवारों की अपेक्षा सिर्फ परीक्षा आयोजित कराने की नहीं है।

अपेक्षा यह है कि परीक्षा विश्वसनीय, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुरक्षित तरीके से आयोजित हो।

2025 में Selection Post परीक्षा के दौरान तकनीकी/प्रशासनिक समस्याएं सामने आईं। उसी साल CGL परीक्षा में भी कुछ शिफ्ट प्रभावित हुईं और हजारों उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी। अब सितंबर 2026 में हिंदी ट्रांसलेटर परीक्षाओं से जुड़ी तकनीकी समस्या ने फिर वही सवाल खड़ा कर दिया है।

हर बार समाधान के रूप में री-एग्जाम घोषित कर देना जरूरी तो है, लेकिन पर्याप्त नहीं।

जरूरत इस बात की है कि हर बड़ी तकनीकी विफलता के बाद उसकी स्वतंत्र समीक्षा हो, कारण सार्वजनिक किए जाएं और यह बताया जाए कि अगली परीक्षा में उस समस्या को रोकने के लिए क्या बदला गया।


अभ्यर्थियों का सवाल सीधा है—‘मेरी गलती क्या थी?’

इस पूरे मामले की सबसे मार्मिक बात शायद यही है।

अभ्यर्थी ने अपनी तरफ से तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ी।

उसने परीक्षा के लिए समय पर पहुंचने की कोशिश की।

उसने नियमों का पालन किया।

लेकिन परीक्षा केंद्र की तकनीकी व्यवस्था उसके नियंत्रण में नहीं थी।

फिर भी नुकसान उसी का हुआ।

इसलिए अब सवाल केवल यह नहीं होना चाहिए कि 13 सितंबर को दोबारा परीक्षा कब होगी।

सवाल यह भी होना चाहिए कि 13 सितंबर को वही समस्या दोबारा न हो, इसकी गारंटी के लिए SSC और परीक्षा केंद्रों ने क्या बदला है?

क्योंकि उम्मीदवारों को सिर्फ नई तारीख नहीं चाहिए।

उन्हें विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था चाहिए।

निष्कर्ष

SSC JHT और CHT परीक्षा में सामने आई तकनीकी समस्या एक बार फिर उस बड़े मुद्दे की ओर ध्यान खींचती है, जिसे अक्सर ‘ग्लिच’ कहकर छोटा कर दिया जाता है।

लेकिन प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थी के लिए यह सिर्फ ग्लिच नहीं है।

यह उसकी मेहनत, समय, पैसा और भविष्य से जुड़ा मामला है।

री-एग्जाम तत्काल राहत दे सकता है, लेकिन स्थायी समाधान तभी माना जाएगा जब परीक्षा व्यवस्था ऐसी बने जिसमें सर्वर फेल होने की स्थिति में भी अभ्यर्थी को परीक्षा से वंचित न होना पड़े।

क्योंकि परीक्षा व्यवस्था में तकनीकी गलती की कीमत सिस्टम नहीं, अक्सर उम्मीदवार चुकाता है।

Author

  • Harvir Chauhan

    Harvir Chauhan
    Editor-in-Chief & Founder, News Diary Today

    हरवीर चौहान एक वरिष्ठ पत्रकार, संपादक और मीडिया उद्यमी हैं, जिन्हें समाचार एवं डिजिटल मीडिया क्षेत्र में 10+ वर्षों का अनुभव है। वे Doordarshan Uttar Pradesh और India News जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे NewsDiaryToday.com और ‘न्यूज़ डायरी टुडे’ साप्ताहिक समाचार पत्र के संस्थापक एवं Editor-in-Chief हैं। वे तथ्यपरक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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