Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस को बड़ी राहत देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें जांच प्रक्रिया के लिए 390 पन्नों की विस्तृत चेकलिस्ट और दिशा-निर्देश तय किए गए थे। शीर्ष अदालत ने कहा कि पुलिस की जांच प्रक्रिया में अदालतों का हस्तक्षेप व्यावहारिक सीमाओं के भीतर होना चाहिए।
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Supreme Court: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस को एक बड़ी राहत देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें जांच प्रक्रिया को लेकर पुलिस पर व्यापक दिशा-निर्देश और एक लंबी-चौड़ी चेकलिस्ट थोप दी गई थी। उच्चतम न्यायालय ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि आपराधिक न्याय प्रशासन की अपनी मर्यादाएं होती हैं और अदालतों को पुलिस की जांच प्रक्रिया में इस तरह का हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए जो व्यावहारिक न हो। बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मई 2025 को एक फैसला सुनाते हुए (पैरा 33 के तहत) यूपी पुलिस के लिए जांच और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ा 390 पन्नों का एक लंबा-चौड़ा दिशा-निर्देश और अनिवार्य चेकलिस्ट लागू कर दी थी। हाईकोर्ट के इस भारी-भरकम आदेश के कारण यूपी पुलिस की दैनिक जांच प्रक्रिया और कार्यप्रणाली पर बहुत बड़ा प्रशासनिक बोझ आ गया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस आदेश को हाईकोर्ट के न्यायिक क्षेत्राधिकार से बाहर बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मई 2025 को एक फैसला सुनाते हुए (पैरा 33 के तहत) यूपी पुलिस के लिए जांच और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ा 390 पन्नों का एक लंबा-चौड़ा दिशा-निर्देश और अनिवार्य चेकलिस्ट लागू कर दी थी। हाईकोर्ट के इस भारी-भरकम आदेश के कारण यूपी पुलिस की दैनिक जांच प्रक्रिया और कार्यप्रणाली पर बहुत बड़ा प्रशासनिक बोझ आ गया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस आदेश को हाईकोर्ट के न्यायिक क्षेत्राधिकार से बाहर बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी!
शीर्ष अदालत के जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने साफ किया कि आपराधिक मामलों की जांच करना पूरी तरह से पुलिस का अधिकार क्षेत्र है।अदालतों को पुलिस पर ऐसे अव्यावहारिक नियम या अंतहीन चेकलिस्ट नहीं थोपनी चाहिए जिससे उनका रूटीन काम प्रभावित हो।हाईकोर्ट का यह आदेश न्यायिक सीमाओं को पार करने जैसा था, जिसे लागू रखना कानूनन सही नहीं है।
फैसले का असर: यूपी पुलिस को कैसे मिली राहत?
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद यूपी पुलिस को अब हाईकोर्ट द्वारा तैयार की गई जटिल कानूनी कागजी कार्रवाई और लंबी चेकलिस्ट से मुक्ति मिल गई है। इससे पुलिस बल बिना किसी अतिरिक्त प्रशासनिक दबाव के अपनी सामान्य प्रक्रियाओं के तहत मामलों की त्वरित और निष्पक्ष जांच कर सकेगा।