Noida: मजदूर आंदोलन के मामले में छात्र नेता आकृति चौधरी पर NSA लगाना नोएडा प्रशासन को भारी पड़ गया। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नजरबंदी रद्द करते हुए DM मेधा रूपम और संबंधित पुलिस अधिकारियों के आचरण पर कड़ी नाराजगी जताई और 5 लाख मुआवजे का आदेश दिया।
UP High Court: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नोएडा की डीएम मेधा रूपम के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए छात्र नेता आकृति चौधरी पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने न सिर्फ इस कार्रवाई को ‘शक्तियों का दुरुपयोग’ और ‘अवैध’ माना, बल्कि डीएम मेधा रूपम की सैलरी से आकृति चौधरी को ₹5 लाख का मुआवजा देने का ऐतिहासिक आदेश भी दिया है। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेवा की बेंच ने अपने 15 पन्नों के फैसले में प्रशासन की मनगढ़ंत कहानी को पूरी तरह खारिज कर दिया। बता दें कि अप्रैल 2026 में नोएडा में रोजगार और श्रम से जुड़े मुद्दों को लेकर मजदूरों ने एक बड़ा आंदोलन किया था, जो बाद में हिंसक हो गया था। इस मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) की इतिहास स्नातक और छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद, 13 मई 2026 को गौतमबुद्धनगर (नोएडा) की जिला मजिस्ट्रेट (DM) मेधा रूपम ने पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर आकृति चौधरी के खिलाफ कड़े कानून NSA (रासुका) के तहत नजरबंदी का आदेश जारी कर दिया था। पुलिस का दावा था कि आकृति ने व्हाट्सएप चैट और वीडियो के जरिए मजदूरों को हिंसा के लिए उकसाया था।
हाई कोर्ट द्वारा पकड़ी गईं DM की 5 बड़ी गलतियां?
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि कानून का इस्तेमाल ‘तानाशाही रवैये’ (Despotic conduct) के साथ एक सामान्य लड़की को डराने और मिसाल कायम करने के लिए किया गया। कोर्ट ने DM की मुख्य रूप से इन गलतियों को रेखांकित किया है।
1-सबूतों की बिना जांच किए (Lack of Application of Mind): कोर्ट ने कहा कि जब पुलिस ने केवल आरोपों की रिपोर्ट सौंपी थी, तो डीएम से उम्मीद थी कि वह रिकॉर्ड की बारीक जांच (Threadbare examination) करतीं, लेकिन उन्होंने बिना दिमाग लगाए पुलिस की कहानी पर मुहर लगा दी।
2-व्हाट्सएप चैट और वीडियो में कोई आपत्तिजनक सामग्री न होना: सरकारी वकील कोर्ट में एक भी ऐसा व्हाट्सएप मैसेज या वीडियो क्लिप पेश नहीं कर पाए, जिससे साबित हो कि आकृति ने दंगों, आगजनी या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए उकसाया था।
3-शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को दबाना: कोर्ट ने पाया कि आकृति ने केवल मजदूरों के अधिकारों के समर्थन में शांतिपूर्ण एकजुटता की अपील की थी। कानून व्यवस्था बिगड़ने के झूठे डर के आधार पर किसी को रोकना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है।
4-पूर्वाग्रह और कयासों पर फैसला लेना: हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि NSA जैसी सख्त निवारक नजरबंदी का इस्तेमाल सामान्य आपराधिक कानून के विकल्प के रूप में नहीं किया जा सकता और न ही इसे पूर्वाग्रहों, कयासों और राय के आधार पर थोपा जा सकता है।
5-शपथ का उल्लंघन (Violating Oath of Allegiance): कोर्ट ने कहा कि डीएम ने संविधान और अपने पद के प्रति ली गई निष्ठा की शपथ का उल्लंघन किया है, इसलिए उनका आचरण ‘निंदनीय’ (Worthy of derision) है।
ऐतिहासिक फैसला: सैलरी से कटेगा जुर्माना, सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज होगी ‘फटकार’?
अदालत ने इस मामले को सत्ता के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण मानते हुए ऐतिहासिक आदेश सुनाए है कि आकृति चौधरी को ₹5 लाख का मुआवजा दिया जाएगा। यह राशि सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि डीएम मेधा रूपम और शुरुआत में रिपोर्ट तैयार करने वाले एसएचओ (SHO) स्तर तक के जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के वेतन से वसूल की जाएगी।कोर्ट ने आदेश दिया कि डीएम और संबंधित पुलिस अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड (Service Records) में कोर्ट की इस ‘कड़ी नाखुशी’ (Displeasure) को दर्ज किया जाए, जो उनके करियर के लिए बड़ा झटका है।