हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच सख्त: नगर निगम से कहा- ढूंढिए कूड़े का स्थाई समाधान, तस्वीरें बयां कर रहीं बदतर हालात।

Lucknow News: सड़क किनारे खुले में कूड़ा डंपिंग पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि कचरे का स्थायी समाधान खोजें और लोगों की सेहत को देखते हुए तत्काल सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करें।

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लखनऊ न्यूज़ | लखनऊ में सड़क किनारे कूड़ा डंपिंग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने नगर निगम पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ लफ्जों में कहा है कि सड़क किनारे इस तरह कचरा फैलाना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। बता दें कि राजधानी लखनऊ को साफ-सुथरा बनाने के दावों के बीच, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था को लेकर नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई है। मामला मड़ियांव इलाके के ब्रह्मनगर स्थित कबीर मंदिर के सामने खुले में कूड़ा फेंकने से जुड़ा हुआ है। स्थानीय निवासी कुलदीप द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस सैयद कमर हसन रिजवी की खंडपीठ ने यह सख्त आदेश पारित किया।सुनवाई के दौरान जब नगर निगम की तरफ से इलाके की तस्वीरें कोर्ट के सामने पेश की गईं, तो उन्हें देखकर कोर्ट ने बेहद तल्ख टिप्पणी की। जजों ने कहा कि मौके की स्थिति याचिका में बताई गई समस्या से भी कहीं ज्यादा बदतर और भयानक है। सड़क किनारे दूर तक बिखरा हुआ कचरा साफ नजर आ रहा है।

नगर निगम का अजीब तर्क, कोर्ट ने नकारा?

नगर निगम के वकील ने दलील देने की कोशिश की कि यह कचरा किसी रिहायशी इलाके में नहीं, बल्कि हाईवे के किनारे डाला जा रहा है। इस पर कोर्ट ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यह तर्क पूरी तरह से बेमानी है। हाईवे या सड़क के किनारे इस तरह खुले में कचरा डालना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। इससे उठने वाली दुर्गंध और गंदगी से वहां रहने वाले लोगों और राहगीरों के स्वास्थ्य और स्वच्छता (Hygiene) पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

कोर्ट के कड़े निर्देश और अल्टीमेटम!

कोर्ट ने नगर निगम से साफ कहा है कि सड़क के किनारे से हटाकर इस कचरे के लिए किसी अन्य उपयुक्त स्थान की संभावना तलाशी जाए।बेंच ने सुझाव दिया कि यदि संभव हो, तो कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए उस जगह पर तुरंत एक कॉम्पैक्टर मशीन स्थापित करने के उपाय किए जाएं। कोर्ट ने आदेश दिया कि जब तक इस समस्या का कोई स्थाई समाधान (Permanent Solution) लागू नहीं हो जाता, तब तक लोगों की सेहत की सुरक्षा के लिए वहां साफ-सफाई के अस्थाई उपाय तुरंत सुनिश्चित किए जाएं।हाईकोर्ट ने अब इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए अगली सुनवाई 30 सितंबर के लिए तय की है, जिसमें नगर निगम को अपनी प्रगति रिपोर्ट और उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी।

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