UP High Court News: अब पुलिस की मनमानी पड़ेगी भारी! इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि बिना कानूनी आधार किसी निर्दोष को हिरासत में रखना पुलिस अधिकारियों को महंगा पड़ेगा। अवैध हिरासत के हर दिन के लिए ₹25,000 तक का हर्जाना दोषी पुलिसकर्मी के वेतन से वसूला जा सकता है। आखिर क्या है पूरा मामला और आम जनता के लिए यह फैसला क्यों है बेहद महत्वपूर्ण? जानिए इस रिपोर्ट में।
News Diary Today, Noida |
UP High Court : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस की मनमानी पर कड़ा प्रहार करते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है कि अवैध हिरासत में रखे जाने पर पीड़ित को ₹25,000 प्रतिदिन का मुआवजा दिया जाएगा, जिसे दोषी पुलिस अधिकारियों के वेतन से वसूला जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ‘शांति भंग’ (धारा 107/116) के नाम पर निर्दोष नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को जीने और गरिमा का अधिकार देता है। बता दें कि यह ऐतिहासिक फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस संजीव कुमार की खंडपीठ ने मंतबर मिश्रा नामक नागरिक की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया। याचिकाकर्ता को एक घरेलू विवाद की शिकायत पर पुलिस (सब-इंस्पेक्टर सूर्य प्रकाश दुबे) द्वारा बिना किसी ठोस कानूनी आधार के घर से उठाकर 24 घंटे तक लॉकअप में बंद रखा गया था। पुलिस ने अपनी इस अवैध हिरासत को छिपाने के लिए बाद में कागजों पर धारा 107/116 (शांति भंग की आशंका) की कार्रवाई दिखा दी और अदालत ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली को आड़े हाथों लेते हुए बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया और कहा कि पुलिस अधिकारियों को लगता है कि उनके गलत कामों पर किसी का ध्यान नहीं जाएगा। वे सोचते हैं कि हजारों उल्लंघनों में से शायद ही कोई एक नागरिक अपने अधिकारों के लिए कोर्ट तक आने की हिम्मत जुटा पाएगा और अदालत ने साफ किया कि पुलिस अधिकारी राज्य की शक्ति का दुरुपयोग कर नागरिकों को डरा नहीं सकते। कोई भी अधिकारी कानून से बड़ा नहीं है और कोर्ट ने पकड़ लिया कि 24 घंटे बाद शुरू की गई शांति भंग की कार्रवाई सिर्फ अपनी अवैध हिरासत के पाप को छिपाने का एक ‘बहाना’ थी और हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन को कड़ा सबक सिखाते हुए कहा कि पीड़ित को अवैध रूप से 24 घंटे लॉकअप में रखने के बदले ₹25,000 का अंतरिम मुआवजा और ₹10,000 का मुकदमा खर्च (कुल ₹35,000) 30 दिनों के भीतर देने का आदेश दिया गया और कोर्ट ने राज्य सरकार को पूरी छूट दी है कि वह यह मुआवजा राशि पीड़ित को देने के बाद दोषी पुलिस अधिकारी (SI सूर्य प्रकाश दुबे) के वेतन या अन्य फंड से वसूल करे और कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना कानूनी आधार के 24 घंटे से ज्यादा की हिरासत अब भारी पड़ेगी, जिसके तहत प्रतिदिन ₹25,000 की दर से (जैसे 8 दिन की अवैध हिरासत पर ₹2 लाख) का हर्जाना भुगतना होगा और हाईकोर्ट ने इन नए दिशा-निर्देशों को पूरे यूपी में सख्ती से लागू करने को कहा है और प्रयागराज पुलिस कमिश्नर से 14 सितंबर तक अनुपालन रिपोर्ट मांगी है।
आम जनता के लिए क्यों बड़ी खबर है?
अक्सर देखा जाता है कि छोटे-मोटे विवादों में पुलिस अपनी धौंस दिखाने के लिए धारा 151 या 107/116 के तहत लोगों को बिना वजह थानों में बैठा लेती है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब कोई भी पुलिसकर्मी किसी निर्दोष को लॉकअप में डालने से पहले सौ बार सोचेगा, क्योंकि अब नुकसान सरकार का नहीं, बल्कि सीधे दोषी पुलिस अफसर की अपनी जेब (Remuneration) का होगा।