नोएडा महर्षि आश्रम महाघोटाला ! ED और SIT की जांच से राजनीतिक गलियारों में हड़कंप, गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद के दिग्गज नेताओं की रिपोर्ट पार्टी हाईकमान तक पहुंची

नोएडा के महर्षि आश्रम भूमि घोटाले ने अब राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। ED और SIT की जांच में हजारों करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े, अवैध निर्माण और कथित नेता-अधिकारी-बिल्डर गठजोड़ के बड़े खुलासे सामने आए हैं। आखिर किन सफेदपोश चेहरों पर गिर सकती है गाज? देखिए न्यूज़ डायरी टुडे की यह खास रिपोर्ट।

News Diary Today, Noida

Noida News : उत्तर प्रदेश के शो-विंडो कहे जाने वाले नोएडा में महर्षि आश्रम की हजारों करोड़ रुपये की बेशकीमती जमीन के फर्जीवाड़े और उस पर हुए बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण का मामला अब एक बड़ा सियासी तूफान बन चुका है। खोजी सूत्रों के अनुसार, गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद के कुछ बेहद रसूखदार और प्रमुख नेताओं की इस महाघोटाले में कथित संलिप्तता को लेकर एक विस्तृत व गोपनीय रिपोर्ट सीधे पार्टी हाईकमान तक पहुंचा दी गई है, जिसके बाद से दोनों जिलों के राजनीतिक खेमों में भारी खलबली मची हुई है। बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की जांच में बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, ‘स्पिरिचुअल रिजनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया ट्रस्ट’ (महर्षि ट्रस्ट) की जमीनों को हड़पने के लिए भू-माफियाओं ने एक फर्जी संस्था का गठन किया। इसके बाद नकली बोर्ड रेजोल्यूशन (प्रस्ताव पत्र), फर्जी प्राधिकरण पत्र और जाली मुहरों का इस्तेमाल करके ट्रस्ट की करीब 40 बीघा अधिसूचित जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त की गई और इस घोटाले की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भू-माफियाओं और बिल्डरों के गठजोड़ ने बिना किसी स्वीकृत नक्शे के महर्षि आश्रम की जमीन पर 20 हजार से अधिक अवैध फ्लैट और गगनचुंबी टावर खड़े कर दिए। जांच का दायरा नोएडा के कई प्रमुख गांवों और क्षेत्रों तक फैला हुआ है, जिसमें मुख्य रूप से भंगेल,सलारपुर,गेझा, तिलपता,हाजीपुर इन सभी इलाकों में हजारों करोड़ रुपये के अवैध काले कारोबार (मनी लॉन्ड्रिंग) और बेनामी संपत्तियों के साम्राज्य का पता चला है।

33 करोड़ की जमीन मात्र 16 करोड़ में बेची!

जांच एजेंसियों के रडार पर वर्तमान में सबसे बड़ा संदिग्ध सौदा दिसंबर 2025 का है। इस दौरान गेझा तिलपताबाद क्षेत्र में स्थित महर्षि ट्रस्ट की जमीन, जिसकी सरकारी गाइडलाइन (सर्किल रेट) के अनुसार वास्तविक कीमत 33.61 करोड़ रुपये थी, उसे कागजों पर मात्र 16 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। ED को तगड़ा संदेह है कि स्टांप ड्यूटी और सरकारी राजस्व की चोरी करने के लिए बैनामे में कम कीमत दिखाई गई, जबकि बाकी की भारी-भरकम रकम (करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक) का नकद या ब्लैक मनी के रूप में लेनदेन किया गया है और मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत कार्रवाई करते हुए ED अब तक इस मामले में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज चुकी है और जांच एजेंसी ने नोएडा के निबंधन विभाग के सब-रजिस्ट्रारों को तलब कर घंटों पूछताछ की है, जिन्होंने इन फर्जी दस्तावेजों की रजिस्ट्री की थी और नोएडा विकास प्राधिकरण ने जनता को बड़ा झटका देते हुए कई विवादित खसरा नंबरों की जमीनों को अधिसूचित घोषित कर दिया है और आम जनता को वहां फ्लैट या प्लॉट न खरीदने की सख्त चेतावनी जारी की है।

नेताओं और अधिकारियों पर गिरेगी गाज!

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव की निगरानी में SIT इस पूरे मामले की समानांतर जांच कर रही है। जांच का सबसे संवेदनशील हिस्सा वह अधिकारी-नेता-बिल्डर नेक्सस है, जिसके संरक्षण में सालों से नोएडा अथॉरिटी की नाक के नीचे यह अवैध शहर बसाया जा रहा था और पार्टी हाईकमान के पास गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर के जिन नेताओं की संलिप्तता की फाइल पहुंची है, माना जा रहा है कि आने वाले कुछ ही दिनों में उन पर बड़ी दंडात्मक या संगठनात्मक कार्रवाई हो सकती है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह घोटाला आने वाले दिनों में एक बड़ा सियासी मुद्दा बनने जा रहा है, जिससे कई सफेदपोश चेहरों के बेनकाब होने की पूरी उम्मीद है। मामले में व्यापक स्तर पर जांच और छापेमारी अभी भी जारी है।