ग्रेटर नोएडा की कलाधाम सोसाइटी में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कथित लापरवाही ने एक 6 वर्षीय मासूम की जिंदगी छीन ली। बारिश के पानी से भरे 15 फीट गहरे खुले गड्ढे में गिरकर अवयान सूर्य की दर्दनाक मौत हो गई। पुलिस ने ठेकेदार को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि साइट की निगरानी के जिम्मेदार प्राधिकरण के इंजीनियरों और अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
News Diary Today। Noida News। AI IMAGE
G.Noida : ग्रेटर नोएडा की कलाधाम सोसाइटी में बोरिंग के लिए खोदे गए 15 फीट गहरे खुले गड्ढे में गिरकर 6 वर्षीय मासूम अवयान सूर्य (पुत्र सीवान यादव, केंद्रीय विद्यालय के वाइस प्रिंसिपल) की दर्दनाक मौत हो गई। बारिश के पानी से भरे इस जानलेवा गड्ढे के चारों तरफ न तो कोई सुरक्षा बैरिकेडिंग थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड। घटना के बाद नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने ठेकेदार मनोज जैन को गिरफ्तार कर लिया है और प्राधिकरण ने ठेकेदार व सुपरवाइजरों पर FIR दर्ज कर उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेकिन स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि ग्राउंड लेवल पर मॉनिटरिंग के लिए जिम्मेदार ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के JE (जूनियर इंजीनियर), AE (असिस्टेंट इंजीनियर) और उच्च अधिकारियों पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?। बता दें कि यह दर्दनाक हादसा शनिवार शाम करीब 6:30 बजे हुआ। कलाधाम सोसाइटी में रहने वाला 6 साल का अवयान अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। खेलते समय वह अचानक सोसाइटी परिसर के अंदर ही खोदे गए इस गहरे दलदलनुमा गड्ढे में जा गिरा और साथ खेल रहे बच्चों के शोर मचाने पर सोसाइटी के तीन निवासी तुरंत गड्ढे में उतरे और अवयान को बाहर निकाला। उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। कलाधाम सोसाइटी के जनरल सेक्रेटरी देवेंद्र शुक्ला और प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, बोरिंग पार्क एरिया में होनी थी, लेकिन ठेकेदार ने इसे पार्किंग एरिया के पास शुरू कर दिया। प्राधिकरण के जनरल मैनेजर ए.के. सिंह ने माना कि ठेकेदार ने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किए बिना काम शुरू किया था और सुरक्षा के नाम पर सिर्फ दो नाकाफी बांस लगाए थे। पुलिस और प्रशासन ने हादसे के बाद मुख्य ठेकेदार मनोज जैन को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सुपरवाइजर जॉनी और टेक्निकल सुपरवाइजर आकाश राजपूत के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है।प्राधिकरण ने संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की कागजी कार्रवाई शुरू कर दी है।
जनता का सुलगता सवाल: इंजीनियरों और अधिकारियों पर मेहरबानी क्यों?
हादसे के बाद ग्रेटर नोएडा के निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। लोगों का सीधा आरोप है कि हर बार छोटे कर्मचारियों या बाहरी ठेकेदारों को बलि का बकरा बनाकर बड़े अधिकारी बच निकलते हैं जबकि किसी भी सोसाइटी के भीतर सरकारी प्रोजेक्ट या बोरिंग की खुदाई बिना स्थानीय जूनियर इंजीनियर (JE) और असिस्टेंट इंजीनियर (AE) की देखरेख या अप्रूवल के कैसे हो सकती है? यदि ठेकेदार गलत जगह खोद रहा था, तो विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने साइट का निरीक्षण क्यों नहीं किया? और इसी साल जनवरी में नोएडा के सेक्टर 150 में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार भी निर्माण स्थल के पास पानी से भरे गड्ढे में गिरने से उनकी मौत हो गई थी। उस समय प्राधिकरण ने शहर के सभी खुले गड्ढों को सुरक्षित करने का दावा किया था, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस है।निवासियों का कहना है कि जब तक इस घोर लापरवाही के लिए साइट के जिम्मेदार सरकारी इंजीनियरों को सस्पेंड कर जेल नहीं भेजा जाता, तब तक निजी ठेकेदार ऐसे ही नियमों की धज्जियां उड़ाते रहेंगे और मासूमों की जान जाती रहेगी।ग्रेटर नोएडा वेस्ट और मुख्य शहर के नागरिक अब सोशल मीडिया और सड़कों पर उतरकर “सिर्फ ठेकेदार नहीं, दोषी अधिकारियों पर भी FIR करो” की मांग कर रहे हैं ताकि अवयान को सच्चा न्याय मिल सके।