सीवर के ‘काल’ ने फिर छीनी दो जिंदगी : ग्रेटर नोएडा में सुरक्षा उपकरणों के बिना टैंक में उतरे दो युवकों की घुटने से मौत, ठेकेदार गिरफ्तार।

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 स्थित एल्डिको सोसाइटी में सीवर टैंक की जहरीली गैस ने दो जिंदगियां निगल लीं। बिना सुरक्षा उपकरणों के टैंक में उतरे सफाईकर्मी को बचाने गया सिक्योरिटी गार्ड भी मौत का शिकार हो गया। इस दर्दनाक हादसे के बाद पुलिस ने ठेकेदार को गिरफ्तार कर लिया है।

News Diary Today। Greater Noida News

ग्रेटर नोएडा :- ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 स्थित एल्डिको सोसाइटी में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) टैंक की जहरीली गैस से दम घुटने के कारण एक सफाईकर्मी और उसे बचाने उतरे जांबाज सिक्योरिटी गार्ड की दर्दनाक मौत हो गई है. रविवार को हुई इस दिल दहला देने वाली घटना ने एक बार फिर मैनुअल स्कैवेंजिंग (हाथ से मैला ढोने और सीवर की जानलेवा सफाई) से जुड़े कड़े कानूनों और जमीनी लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी ठेकेदार मनोज जैन को गिरफ्तार कर लिया है। बता दें कि यह दर्दनाक वाकया ग्रेटर नोएडा के पॉश इलाके सेक्टर-150 की एल्डिको सोसाइटी में शनिवार और रविवार की दरमियानी रात को घटित हुआ. राजस्थान के करौली जिले का रहने वाला 40 वर्षीय सफाई कर्मचारी शशिकांत शर्मा सोसाइटी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के टैंक को साफ करने के लिए हमेशा की तरह बिना किसी आधुनिक सुरक्षा उपकरण या ऑक्सीजन मास्क के नीचे उतरा था. कुछ ही मिनटों में टैंक के भीतर जमा जहरीली गैसों (जैसे मीथेन और हाइड्रोजन सल्फाइड) ने अपना असर दिखाया और शशिकांत का दम घुटने लगा, जिससे वह वहीं बेहोश हो गया और टैंक के बाहर खड़े लोगों में हड़कंप मच गया. वहीं ड्यूटी पर तैनात फिरोजाबाद का रहने वाला 22 वर्षीय युवा सिक्योरिटी गार्ड आकाश अपनी जान की परवाह किए बिना शशिकांत को बचाने के लिए तुरंत टैंक के भीतर उतर गया। आकाश के भीतर अपने साथी को बचाने का जज्बा तो था, लेकिन वह इस बात से बेखबर था कि अंदर मौत का अदृश्य जाल बिछा है. टैंक में पैर रखते ही जहरीली गैस ने आकाश को भी अपनी चपेट में ले लिया और वह भी बेदम होकर वहीं गिर पड़ा।घटना की सूचना मिलते ही नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। दोनों को बेहद मशक्कत के बाद रस्सियों के सहारे टैंक से बाहर निकाला गया और नजदीकी अस्पताल ले जाया गया. मगर बेहद अफसोस, डॉक्टरों ने दोनों को अस्पताल लाते ही मृत घोषित कर दिया. चंद पलों की लापरवाही ने दो हंसते-खेलते परिवारों के चिराग बुझा दिए।

आखिर कब तक थमेगा मौतों का यह सिलसिला?

यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि सिस्टम की सुस्ती और ठेकेदारों की बेरहमी का एक और जीता-जागता प्रमाण है. भारत में सुप्रीम कोर्ट और सरकार द्वारा हाथ से सीवर की सफाई करने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जा चुका है. इसके बावजूद, चंद रुपयों की बचत के लिए बिल्डर्स और ठेकेदार गरीब मजदूरों की जान दांव पर लगा देते हैं। आखिर क्यों बिना ऑक्सीजन सिलेंडर, सेफ्टी बेल्ट और गैस डिटेक्टर के किसी इंसान को मौत के कुएं में धकेला गया?,जब सीवर की सफाई मशीनों से होना अनिवार्य है, तो निजी सोसाइटियों में गुपचुप तरीके से इंसानों को नीचे क्यों उतारा जा रहा है?,ठेकेदार की गिरफ्तारी तो हो जाती है, लेकिन क्या उन परिवारों को उनका बेटा, पति या पिता वापस मिल पाएगा?,इस व्यवस्था को बदलने के लिए कड़े कानूनों का जमीनी तौर पर लागू होना और सोसाइटियों के प्रबंधन की सीधी जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है, वरना सीवर के ये टैंक यूं ही बेकसूरों की कब्रगाह बनते रहेंगे।

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