देशभर में गौ संरक्षण को लेकर एक बार फिर बड़ा जनआंदोलन देखने को मिला। सोमवार को ‘गौ सम्मान आह्वान अभियान’ के तहत लगभग 5 हजार तहसीलों में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे गए। इसी कड़ी में राजस्थान के धौलपुर में संत समाज, गौसेवकों और स्थानीय नागरिकों ने एकजुट होकर गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और निराश्रित गौवंश के संरक्षण के लिए ठोस नीति बनाने की मांग उठाई।
✍️ उत्तम दीक्षित
न्यूज़ डायरी टुडे, राजस्थान।
धौलपुर,राजस्थान | धौलपुर में आयोजित कार्यक्रम में संत समाज के प्रमुख प्रतिनिधियों—महंत हनुमान दास, महंत रणछोड़दास, कथावाचक ऋषिकेश और बालव्यास—की उपस्थिति रही। बड़ी संख्या में गौभक्तों और स्थानीय नागरिकों ने इसमें भाग लेकर अपनी आवाज बुलंद की।
गणेश मंदिर से तहसील तक निकाला गया मार्च
कार्यक्रम की शुरुआत भार्गव वाटिका स्थित नए गणेश मंदिर से हुई, जहां से लोगों ने तहसील कार्यालय तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला। इस दौरान गौहत्या पर प्रतिबंध और गौ संरक्षण को लेकर नारे लगाए गए।
बेसहारा गौवंश बना बड़ी समस्या
ज्ञापन में कहा गया कि वर्तमान समय में बड़ी संख्या में गौवंश सड़कों पर बेसहारा घूम रहा है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है। साथ ही उन्हें पर्याप्त भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।
प्रशासन से ये प्रमुख मांगें रखीं गईं
गौसेवकों ने प्रशासन से मांग की कि:
- गौशालाओं की संख्या बढ़ाई जाए
- निराश्रित गौवंश के लिए विशेष अभियान चलाया जाए
- चारा, पानी और चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं
- गौहत्या पर सख्त और प्रभावी प्रतिबंध लागू किया जाए
‘गौ सम्मान दिवस’ पर देशभर में एकजुटता
इस अभियान के तहत ‘गौ सम्मान दिवस’ भी मनाया गया, जिसमें देशभर की हजारों तहसीलों में ज्ञापन सौंपकर सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया गया।
गौसेवा को बताया सामाजिक जिम्मेदारी
वक्ताओं ने कहा कि गौसेवा केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी भी है। इसके लिए सरकारी और सामाजिक स्तर पर ठोस कदम उठाने जरूरी हैं।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने गौमाता की सेवा, सुरक्षा और संरक्षण के लिए निरंतर कार्य करने और समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।