जाओ, मां के चरणों में गिरकर अपने पापों की माफी मांगो” — जब सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी विवाद में बेटे को सिखाया मातृ-धर्म

सुप्रीम कोर्ट में संपत्ति विवाद की सुनवाई के दौरान कानून से आगे बढ़कर रिश्तों और संस्कारों की बात सामने आई। बुजुर्ग मां के साथ बेटे के कथित व्यवहार पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए उसे मां से माफी मांगने और उनका आशीर्वाद लेने की नसीहत दी।

News Diary Today | Noida News

Supreme Court | सुप्रीम कोर्ट में 9 सितंबर 2026 को एक संपत्ति विवाद की सुनवाई के दौरान कानून की किताबों से परे, मानवीय संवेदनाओं और भारतीय संस्कारों की एक बेहद भावुक और मार्मिक तस्वीर देखने को मिली. जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने बूढ़ी मां की संपत्ति हड़पने की कोशिश करने वाले एक बेटे को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा, “जाओ, अपनी मां के पैर छुओ, उनके दिल के दर्द को महसूस करो और अपने पापों के लिए उनसे माफी मांगकर उनका आशीर्वाद लो।”बता दें कि अदालत का यह रुख तब सामने आया जब एक कलयुगी बेटे और बहू ने जाली दस्तावेजों के सहारे अपने ही माता-पिता के आशियाने पर मालिकाना हक जताने की कोशिश की थी।यह दर्दनाक दास्तां एक ऐसे बुजुर्ग माता-पिता की है, जिन्होंने बड़े ही चाव और स्नेह से अपने बेटे और बहू को अपने मकान की पहली मंजिल पर बिना किसी किराए के रहने की इजाजत दी थी. लेकिन कुछ समय बाद, बेटे और बहू की नीयत बदल गई. आरोप है कि दोनों ने बुजुर्ग माता-पिता को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया और जाली कागजात तैयार कर मकान को अपने नाम करने का दबाव बनाने लगे।बेटे के इस दुर्व्यवहार से तंग आकर लाचार माता-पिता ने अखबार में बकायदा सार्वजनिक नोटिस देकर अपने बेटे-बहू से सारे रिश्ते तोड़ लिए और उन्हें घर खाली करने का आदेश दिया. मामला जब कोर्ट पहुंचा, तो निचली अदालत और दिल्ली हाईकोर्ट दोनों ने माता-पिता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बेटे को घर खाली करने को कहा था।

सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी और नसीहत!

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ बेटा जब देश की सबसे बड़ी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) पहुंचा, तो वहां उसकी याचिका को खारिज कर दिया गया. फैसला सुनाते हुए जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा भावुक हो उठे और उन्होंने हिंदू धर्म व भारतीय संस्कृति में मां के सर्वोच्च स्थान की याद दिलाई और जस्टिस शर्मा ने अदालत में मौजूद वकीलों की तरफ देखते हुए पूछा क्या इस बेटे ने जो किया, वह गलत नहीं है? हम इस बेटे से कह रहे हैं कि वह अपनी मां के पास वापस जाए, उनके पैर छुए, उनकी भावनाओं को समझे, पैरों में गिरकर अपने गुनाहों की माफी मांगे और उनका आशीर्वाद ले।”अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि जो बेटा अपनी बूढ़ी मां को संपत्ति के लिए दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर कर दे, कानून ऐसे बेटे के दावों को कभी स्वीकार नहीं कर सकता. सर्वोच्च न्यायालय के इस मानवीय स्पर्श और कड़े संदेश ने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं

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  • Harvir Chauhan

    Harvir Chauhan
    Editor-in-Chief & Founder, News Diary Today

    हरवीर चौहान एक वरिष्ठ पत्रकार, संपादक और मीडिया उद्यमी हैं, जिन्हें समाचार एवं डिजिटल मीडिया क्षेत्र में 10+ वर्षों का अनुभव है। वे Doordarshan Uttar Pradesh और India News जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे NewsDiaryToday.com और ‘न्यूज़ डायरी टुडे’ साप्ताहिक समाचार पत्र के संस्थापक एवं Editor-in-Chief हैं। वे तथ्यपरक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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