HIV पर बड़ी जीत : 23 लाख की दवा अब मिलेगी सिर्फ 3,500 रुपये में!

✍️ योगेश राणा

न्यूज़ डायरी, नोएडा।

स्वास्थ्य के क्षेत्र से एक बहुत बड़ी और अच्छी ख़बर सामने आई है। बता दें कि एचआईवी जैसी असाध्य व गंभीर बीमारियों से बचाने वाली दवाएं अब बहुत सस्ती होने जा रही है। इस बड़ी राहत के पीछे भारत की दवा कंपनियों की अहम भूमिका है। बता दें कि यूनिटेड (Unitaid) और गेट्स फाउंडेशन जैसी बड़ी स्वास्थ्य संस्थाओं ने भारत की फार्मा कंपनियों (जैसे डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज और हेटेरो) के साथ समझौता किया है. ये कंपनियाँ ‘लेनाकापाविर’ का सस्ता यानी जेनेरिक वर्ज़न बनाएँगी, जिससे इसकी कीमत हज़ारों गुना कम हो जाएगी।गेट्स फाउंडेशन के ग्लोबल हेल्थ हेड ट्रेवर मंडेल ने कहा, “लेनाकापाविर जैसी वैज्ञानिक खोजें हमें HIV महामारी को खत्म करने में मदद कर सकती हैं, लेकिन तभी, जब ये उन लोगों तक पहुँचें जिन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है और साल 2027 से, 100 से ज़्यादा देशों में यह दवा सिर्फ 40 डॉलर यानी करीब 3,500 रुपये सालाना की कीमत पर उपलब्ध होगी। यह उन लाखों लोगों के लिए उम्मीद की किरण बन कर आई है जो इस बीमारी के ख़तरे में जी रहे हैं।

क्यो है यह इतनी खास दवा!

इस दवा का नाम ‘लेनाकापाविर’ (Lenacapavir) है। यह एक इंजेक्शन है जिसे साल में सिर्फ दो बार लगवाना होता है. स्टडी में यह दवा किया गया है कि यह HIV के संक्रमण को रोकने में 99.9% से ज़्यादा असरदार है। साल में सिर्फ दो इंजेक्शन आपको इस जानलेवा बीमारी से लगभग पूरी तरह सुरक्षित रख सकती हैं.फिलहाल यह दवा अमेरिका में ‘येझटुगो’ (Yeztugo) ब्रांड नाम से बिकती है। इसकी कीमत लगभग 28,000 डॉलर (करीब 23 लाख रुपये) सालाना है और इतनी महंगी कीमत के कारण यह दवा ज़्यादातर लोगों की पहुँच से बाहर थी।पूरी खबर को हेडिंग और सब हेडिंग के साथ हिंदी अखबार के रूप में विस्तार से लिखो शब्दों को इफेक्टिव तरीके से अरेंज कर कर

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