टैरिफ़ आतंक या भारतीय निर्यातकों के लिए अवसर? अमेरिका के 27% शुल्क का भारत पर प्रभाव

नोएडा : नोएडा मीडिया क्लब में HHEWA द्वारा आयोजित एक प्रेस वार्ता में कहा कि अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाए गए 27% के पारस्परिक शुल्क (Reciprocal Tariffs) को लेकर भारतीय व्यापार जगत में चिंता और चर्चा का दौर जारी है। हैंडलूम हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन (HHEWA) इस नई व्यापार नीति के प्रभावों का अध्ययन कर रहा है और सरकार के साथ मिलकर संभावित समाधानों पर काम कर रहा है।

अमेरिका का नया टैरिफ़ ढांचा: भारत पर 27% शुल्क

अमेरिकी राष्ट्रपति ने 5 अप्रैल 2025 से सभी देशों पर 10% शुल्क लागू किया है, जबकि भारत पर 9 अप्रैल से अतिरिक्त 17% शुल्क और लगाया जाएगा। इस तरह, भारतीय सामानों पर कुल 27% का आयात शुल्क लगेगा, जिसका सीधा असर भारतीय निर्यातकों पर पड़ेगा।

भारत-अमेरिका व्यापार आँकड़े (2024)

  • भारत से अमेरिका को निर्यात: $87.40 बिलियन
  • अमेरिका से भारत को आयात: $41.75 बिलियन

इसका मतलब है कि भारत का अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) है, जिसके कारण यह उच्च शुल्क लागू किया गया हो सकता है।

एचएचईडब्ल्यूए के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले शीर्ष 10 उत्पाद निम्नलिखित थेः

किन उत्पादों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा?

HHEWA के अनुसार, अमेरिका को निर्यात होने वाले भारतीय उत्पादों में हैंडीक्राफ्ट, टेक्सटाइल, परिधान, गहने और कृषि उत्पाद प्रमुख हैं। इन क्षेत्रों में काम करने वाले निर्यातकों को सबसे ज्यादा चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

भारत की प्रतिस्पर्धा में सुधार? अन्य देशों पर शुल्क की तुलना

HHEWA ने बताया कि भारत पर लगाया गया 27% शुल्क कई प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम है:

  • चीन: 34% (पहले 20%)
  • वियतनाम: 46%
  • बांगलादेश: 37%
  • थाईलैंड: 36%
  • इंडोनेशिया: 32%

इसका मतलब यह हो सकता है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सकती है, खासकर टेक्सटाइल और परिधान क्षेत्र में, जहाँ चीन, बांगलादेश और वियतनाम के मुकाबले भारत को फायदा हो सकता है।

हालाँकि, कुछ अन्य देशों पर शुल्क दर भारत से कम है, जैसे:

  • जापान: 24%
  • दक्षिण कोरिया: 25%
  • मलेशिया: 24%
  • यूरोपीय संघ: 20%
  • ब्रिटेन और ब्राजील: 10%

लेकिन, HHEWA का मानना है कि इनमें से अधिकांश देश भारत के सीधे प्रतिस्पर्धी नहीं हैं।

HHEWA ने बताया कि वह वाणिज्य मंत्रालय, EPCH (Exhibition Promotion Council for Handicrafts) और HEPC (Handicraft Export Promotion Council) के साथ मिलकर इस मुद्दे का समाधान ढूँढ़ने का प्रयास कर रहा है। एसोसिएशन को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बातचीत से भारतीय निर्यातकों को राहत मिल सकती है।

निर्यातक क्या कर सकते हैं? HHEWA ने निर्यातकों को सलाह दी है कि वे:

  1. अपने अमेरिकी खरीदारों (Buyers) से बातचीत करें ताकि शुल्क का बोझ कम किया जा सके।
  2. वैकल्पिक बाजारों (यूरोप, मध्य पूर्व, आदि) पर ध्यान दें।
  3. उत्पादों की गुणवत्ता और दक्षता बढ़ाकर लागत कम करें।

अमेरिका का यह कदम भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ी चुनौती है, लेकिन साथ ही यह एक अवसर भी हो सकता है। अगर भारत अपने उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाता है और नए बाजारों की तलाश करता है, तो इस संकट को एक नई व्यापार रणनीति में बदला जा सकता है।

HHEWA ने कहा कि वह प्रधानमंत्री के “विकसित भारत” और “भारत को तीसरी विश्व शक्ति बनाने” के सपने को साकार करने में अपना योगदान देता रहेगा। “यदि देश आगे बढ़ेगा, तो समाज भी आगे बढ़ेगा”

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  • News Dairy Today Desk

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