Noida: दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत हादसे के बाद नोएडा प्राधिकरण ने जर्जर और असुरक्षित भवनों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है। 10 वर्क सर्किल के तहत आने वाले 81 गांवों में सर्वे किया जा रहा है। खतरनाक पाए गए मकानों पर नोटिस चस्पा कर 7 से 14 दिन में खाली करने की चेतावनी दी जा रही है।
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नोएडा न्यूज़ | दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक इमारत हादसे के बाद नोएडा प्राधिकरण पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है. प्राधिकरण ने 10 वर्क सर्किल के तहत आने वाले 81 गांवों में मौत का जाल बने जर्जर और असुरक्षित मकानों के खिलाफ एक बड़ा महा-सर्वेक्षण अभियान शुरू किया है. हादसे से सबक लेते हुए प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस बार कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि खतरनाक इमारतों को पूरी तरह खाली कराया जाएगा। बता दें कि दिल्ली के सत्य निकेतन में एक बहुमंजिला इमारत गिरने और उसमें मासूम छात्रों समेत 7 लोगों की मौत होने के बाद, पड़ोसी शहर नोएडा में भी हड़कंप मच गया है. सालों से फाइलों में दबे पड़े ‘असुरक्षित भवनों’ के मुद्दे पर धूल झाड़ते हुए नोएडा प्राधिकरण ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है. प्राधिकरण ने शहर के सभी 81 गांवों में जर्जर मकानों की पहचान के लिए सर्वे शुरू कर दिया है।सर्वेक्षण के दौरान जिन भी मकानों की स्थितिStructural रूप से खतरनाक या रहने के लिहाज से असुरक्षित पाई जा रही है, उनके बाहर प्राधिकरण की टीम लाल रंग का ‘खाली करने का नोटिस’ चस्पा कर रही है. भवन मालिकों और किराएदारों को 7 से 14 दिनों (एक से दो सप्ताह) का समय दिया गया है कि वे तुरंत इन परिसरों को खाली कर किसी सुरक्षित स्थान पर चले जाएं. नोटिस में यह भी साफ चेतावनी दी गई है कि यदि इस अवधि के बाद भी लोग वहां रहते हैं और कोई दुर्घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी निवासियों और मकान मालिक की खुद की होगी।
घनी आबादी वाले इलाकों पर पैनी नजर!
नोएडा प्राधिकरण के इस बड़े एक्शन के रडार पर सबसे ज्यादा वो गांव हैं जहां बिना किसी ठोस इंजीनियरिंग और नक्शे के बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर दी गई हैं।सदरपुर, निठारी, मामूरा, सलारपुर और भंगेल जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में टीमें लगातार सर्वे कर रही हैं।अकेले मामूरा गांव में शुरुआती कार्रवाई के तहत ही 9 से अधिक भवनों पर नोटिस चस्पा किए जा चुके हैं।सिर्फ गांव ही नहीं, बल्कि सेक्टर-31 के सी-ब्लॉक में बने 128 जनता (EWS) फ्लैट्स को भी अत्यधिक जर्जर और खतरनाक घोषित करते हुए खाली करने का नोटिस जारी किया गया है।
पुलिस को भेजी गई लिस्ट, जबरन खाली कराने की तैयारी!
नोएडा प्राधिकरण की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) वंदना त्रिपाठी ने बताया कि जिन भी मकानों पर नोटिस लगाए गए हैं, उनकी एक-एक कॉपी स्थानीय पुलिस प्रशासन को भी भेजी जा रही है. यदि समय सीमा बीतने के बाद भी लोग स्वेच्छा से घर खाली नहीं करते हैं, तो पुलिस बल की मदद से उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा और भवनों को सील या ध्वस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
2019 के आंकड़े: कागजों से बाहर निकली कार्रवाई!
गौरतलब है कि साल 2018 में हुए शाहबेरी हादसे (जिसमें 9 लोगों की जान गई थी) के बाद भी एक सर्वे किया गया था. उस दौरान नोएडा के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को मिलाकर 1,757 इमारतों को असुरक्षित व अवैध चिन्हित किया गया था. लेकिन, तब प्रभावी जमीनी कार्रवाई न होने के कारण लोग वहीं रहते रहे. इस बार प्राधिकरण का दावा है कि सत्य निकेतन जैसी त्रासदी दोबारा न हो, इसलिए वे किसी भी कीमत पर इन टाइम-बम बन चुकी इमारतों को खाली करवा कर ही दम लेंगे।इस बड़ी कार्रवाई से जहां एक तरफ किराएदारों और मकान मालिकों में हड़कंप मचा है, वहीं सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि अचानक घर खाली करने वाले गरीब परिवारों और बुजुर्गों के लिए प्रशासन को अस्थायी पुनर्वास या शेल्टर होम की व्यवस्था भी करनी चाहिए।
