ग्रेटर नोएडा के पथिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में सरकारी मॉडल लागू होने के बाद अब नोएडा के खिलाड़ियों ने भी सेक्टर-21ए स्थित नोएडा स्टेडियम को खेल विभाग के अधीन लाने की मांग तेज कर दी है। खिलाड़ियों का कहना है कि जिले के दोनों प्रमुख स्टेडियमों में समान खेल नीति लागू होनी चाहिए, ताकि हर खिलाड़ी को सस्ती और बेहतर खेल सुविधाएं मिल सकें।
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नोएडा न्यूज़ | गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम की अध्यक्षता में हाल ही में आयोजित जिला खेल विकास एवं प्रोत्साहन समिति की बैठक में ग्रेटर नोएडा स्थित शहीद विजय सिंह पथिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को पुनः खेल विभाग के माध्यम से संचालित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इस व्यवस्था के तहत 18 वर्ष तक के खिलाड़ियों को मात्र 210 वार्षिक शुल्क पर उच्च स्तरीय खेल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।इस निर्णय का खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों ने व्यापक स्वागत किया है।
वहीं दूसरी तरफ इस फैसले ने नोएडा के स्थानीय खिलाड़ियों के बीच एक नई बहस और असंतोष को जन्म दे दिया है।नोएडा के युवा खिलाड़ियों और खेल संघों ने जिला प्रशासन और नोएडा प्राधिकरण के सामने विरोध दर्ज कराते हुए पूछा है कि जब ग्रेटर नोएडा के स्टेडियम को सरकारी नियंत्रण में देकर खेल व खिलाड़ियों को बढ़ावा दिया जा रहा है, तो नोएडा सेक्टर-21ए स्थित नोएडा स्टेडियम को पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल या निजी हाथों में सौंपने की तैयारी क्यों की जा रही है?
खिलाड़ियों की मुख्य मांगें और आक्रोश की वजह!
खिलाड़ियों का कहना है कि नोएडा स्टेडियम को भी खेल विभाग या जिला खेल प्रोत्साहन समिति के अधीन किया जाए ताकि यहाँ भी प्रतिभावान और आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों को नाममात्र के शुल्क पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं मिल सकें।नोएडा स्टेडियम के कुछ हिस्सों या इंडोर परिसर को निजी विदेशी निवेश वाली (FDI आधारित) प्रोफेशनल कंपनियों को टेंडर के जरिए सौंपने की प्रक्रियाओं का खिलाड़ी और स्थानीय निवासी लगातार विरोध कर रहे हैं। खिलाड़ियों को डर है कि निजी हाथों में जाने से यहां खेल सुविधाएं अत्यधिक महंगी हो जाएंगी।खिलाड़ियों ने सीधे शब्दों में सवाल उठाया है कि एक ही जिले के भीतर दो अलग-अलग स्टेडियमों के लिए दो अलग नीतियां क्यों अपनाई जा रही हैं? नोएडा के खिलाड़ियों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण खेल सुविधाओं से वंचित क्यों रखा जा रहा है?
ग्रेटर नोएडा मॉडल जिसने बढ़ाई नोएडा की उम्मीदें!
गौरतलब है कि डीएम मेधा रूपम के फैसले के बाद ग्रेटर नोएडा के पथिक स्टेडियम में फुटबॉल, क्रिकेट, बास्केटबॉल, स्क्वैश, और स्केटिंग जैसे 9 खेलों के लिए सरकारी प्रशिक्षक नियुक्त किए जा रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। नोएडा के खेल प्रेमियों का कहना है कि यदि ऐसा ही मॉडल नोएडा स्टेडियम में भी लागू हो जाए, तो जिले से सैकड़ों की संख्या में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकल सकते हैं। वहीं अब खिलाड़ी इस मामले पर जिलाधिकारी मेधा रूपम से मिलकर एक स्थाई और निष्पक्ष नीति बनाने की ठोस मांग कर रहे हैं ताकि नोएडा स्टेडियम पूरी तरह सरकारी देखरेख में आम जनता और नवोदित प्रतिभाओं के लिए समर्पित रह सके।