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✍️ मरियम जाफर
क्या महिला एंटरप्रेन्योरशिप सिर्फ महिला सशक्तिकरण का मुद्दा है, या फिर यह आने वाली वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन सकती है?
दिल्ली न्यूज़ | नई दिल्ली में हो रहे BRICS Business Forum 2026 में महिला-नेतृत्व वाले व्यवसाय को जिस तरह अहमियत दी गई है, उसने इस सवाल को और अहम बना दिया है। BRICS देशों में महिलाओं के कारोबार को सिर्फ “एम्पावरमेंट” की नजर से नहीं, बल्कि इकोनॉमिक ग्रोथ, इनोवेशन और क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड के एक बड़े मौके के रूप में देखने की जरूरत सामने आई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी BRICS Business Forum में महिला एंटरप्रेन्योर्स को विकास में नेतृत्व देने की जरूरत पर जोर दिया और BRICS Women’s Business Alliance के काम की तारीफ की। यह Alliance 2020 में शुरू हुआ था और 2026 में इसकी अध्यक्षता भारत के पास है।
सवाल यह है कि मंच के बाद महिलाओं को मिलेगा क्या?
अगर किसी महिला एंटरप्रेन्योर को BRICS के मंच पर बुलाया जाता है, उसे सम्मान दिया जाता है, उसके बिजनेस मॉडल की तारीफ की जाती है, लेकिन उसे कैपिटल नहीं मिलता, इंटरनेशनल फायर तक पहुंच नहीं मिलती, टेक्नोलॉजी और मेंबरशिप नहीं मिलती, तो उसकी कहानी वहीं खत्म हो जाती है।
मंच से आगे बढ़कर महिलाएं ग्लोबल मार्केट तक पहुंचें। BRICS बिजनेस फोरम में भी महिला-नेतृत्व वाले बिजनेस के सामने मार्केट एक्सेस, फाइनेंसिंग, रेग्युलेटरी बैरियर्स और ग्लोबल वैल्यू चेन्स में सीमित भागीदारी जैसी चुनौतियों को उठाया गया।
महिला एंटरप्रेन्योर्स का लाभ सिर्फ मेट्रो सिटीज तक सीमित न रहे
यह पहल सिर्फ दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु या हैदराबाद की स्टार्टअप फाउंडर्स तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
भारत की असली ताकत उस महिला में भी है जो गांव में बैठकर अचार बनाती है, हस्तशिल्प तैयार करती है, कपड़े बनाती है, खेती से जुड़ा कारोबार करती है या अपने छोटे से घर से ऑनलाइन बिजनेस चलाती है।
उसके पास प्रोडक्ट्स हो सकता है, हुनर हो सकता है और मेहनत भी—लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच नहीं होती।
BRICS को इसी खाई को भरने की कोशिश करनी चाहिए।
BRICS का विजन: हर हुनरमंद महिला को मिले वैश्विक मौका
ग्रामीण महिला उद्यमी
सेल्फ-हेल्प ग्रुप, कृषि, फूड प्रोसेसिंग, हस्तशिल्प और ग्रामीण कारोबार से जुड़ी महिलाएं।
छोटे शहरों और कस्बों की महिलाएं
जिनके पास बिजनेस आइडिया है, लेकिन फंडिंग, मार्गदर्शन और मार्केट एक्सेस सीमित है।
MSME चलाने वाली महिलाएं
जो छोटे स्तर पर रोजगार पैदा कर रही हैं और अपने कारोबार को बड़े बाजार तक ले जाना चाहती हैं।
टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप क्षेत्र की महिला संस्थापक
एआई, फिनटेक, हेल्थकेयर, एजुकेशन-टेक, ई-कॉमर्स और उभरती तकनीकों में काम करने वाली महिलाएं।
पारंपरिक कारीगर और रचनात्मक उद्यमी
भारत के टेक्सटाइल, हस्तशिल्प, खाद्य और सांस्कृतिक उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने वाली महिलाएं।
सोशल एंटरप्रेन्योर्स
जो बिजनेस के साथ-साथ भूख, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, एनवायरनमेंट और आजीविका जैसी समस्याओं के समाधान पर भी काम कर रही हैं।
BRICS Women’s Business Alliance के 2026 के कार्यक्रमों में स्टार्टअप्स, इनोवेशन, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रचनात्मक उद्योगों जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।
अगला कदम क्या होना चाहिए?
अगर BRICS सच में महिला उद्यमिता को आर्थिक विकास की बड़ी ताकत बनाना चाहता है, तो सिर्फ सम्मेलन और चर्चाएं काफी नहीं होंगी।
जरूरत है ऐसे BRICS महिला बिजनेस नेटवर्क की, जहां भारत की महिला उद्यमी ब्राजील के खरीदार, UAE के निवेशक, ईरान की कारोबारी महिला या दक्षिण अफ्रीका के कारोबारी साझेदार से सीधे जुड़ सके।
इसके लिए पांच चीजें सबसे जरूरी हैं:
1. पैसा और निवेश: महिलाओं को आसानी से और पर्याप्त पूंजी मिले।
2. बाजार तक पहुंच: BRICS देशों में अपने उत्पाद और सेवाएं बेचने का मौका मिले।
3. तकनीक: एआई, डिजिटल बिजनेस, फिनटेक और डिजिटल तकनीक की ट्रेनिंग मिले।
4. मार्गदर्शन: अनुभवी उद्यमियों और नई महिला उद्यमियों के बीच जुड़ाव हो।
5. अंतरराष्ट्रीय कारोबारी साझेदारी: सिर्फ बातचीत और संपर्क तक बात सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक कारोबारी समझौते और साझेदारी हों।
BRICS बिजनेस फोरम के कार्यक्रम में भी महिला कारोबारों को BRICS देशों के बीच व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कारोबारी साझेदारी से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है।
भारत के लिए यह एक बड़ा मौका है
भारत के पास दो बड़ी ताकतें हैं—महिला उद्यमता और डिजिटल तकनीक।
UPI, ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने छोटे कारोबारों के लिए बाजार तक पहुंच आसान की है। अब अगला कदम भारतीय महिला उद्यमियों को BRICS के दूसरे देशों के बाजारों से जोड़ना होना चाहिए।
कल्पना कीजिए, उत्तर प्रदेश के किसी छोटे शहर की महिला का बनाया हुआ हस्तशिल्प ब्राजील में बिके।
राजस्थान की महिला कारीगर UAE में अपना ब्रांड बनाए।
केरल की महिला खाद्य उद्यमी दक्षिण अफ्रीका में अपना सामान भेजे।
दिल्ली की कोई महिला एआई स्टार्टअप चलाए और ब्राजील की कंपनी के साथ मिलकर काम करे।
अगर ऐसा होता है, तो BRICS में महिला सशक्तिकरण सिर्फ भाषण का विषय नहीं रहेगा, बल्कि महिलाओं के लिए नए अंतरराष्ट्रीय कारोबारी अवसर पैदा होंगे।
महिला को सिर्फ लाभ पाने वाली नहीं, फैसले लेने वाली बनाना होगा
महिला सशक्तिकरण का मतलब सिर्फ यह नहीं होना चाहिए कि कितनी महिलाओं को मंच पर बुलाया गया।
असली सवाल यह होना चाहिए—
कितनी महिलाओं को निवेश मिला?
कितनी महिलाओं ने अपना कारोबार बढ़ाया?
कितनी महिलाएं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचीं?
कितने नए रोजगार पैदा हुए?
और कितनी महिलाएं आर्थिक नीतियां बनाने की प्रक्रिया में शामिल हुईं?
यही असली बदलाव होगा।
BRICS का आर्थिक प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। इतने बड़े आर्थिक समूह में महिलाओं को सिर्फ एक अलग या विशेष वर्ग के रूप में देखना उनकी क्षमता को सीमित करना होगा।
महिलाएं खरीदार भी हैं, उद्यमी भी, रोजगार देने वाली भी और आर्थिक फैसले लेने वाली भी।
इसलिए BRICS का अगला विजन होना चाहिए—महिलाओं को सिर्फ लाभ पाने वाली नहीं, बल्कि BRICS की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने वाली ताकत बनाना।
गांव से ग्लोबल मार्केट तक महिला उद्यमिता
अगर भारत गांव की महिला को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ता है, छोटे शहर की महिला उद्यमी को BRICS के नेटवर्क से जोड़ता है और युवा महिला उद्यमियों को तकनीक और निवेश उपलब्ध कराता है, तो महिला सशक्तिकरण केवल सामाजिक बदलाव की कहानी नहीं रहेगा।
यह भारत की आर्थिक ताकत बढ़ने की कहानी भी बनेगी।
असली सवाल मंच से बाजार तक पहुंच का है
आखिर में BRICS में महिला उद्यमियों को आमंत्रित करना एक अच्छी शुरुआत है।
लेकिन असली सवाल सिर्फ यह नहीं है कि किसे बुलाया गया।
असली सवाल यह है—क्या मंच पर पहुंची महिला मंच से उतरकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक भी पहुंच पाएगी?
अगर जवाब हां है, तो यह पहल सिर्फ महिला सशक्तिकरण नहीं होगी।
यह BRICS की अर्थव्यवस्था में महिलाओं की नई भूमिका की शुरुआत होगी।
— मरियम जाफर