छात्र राजनीति से नोएडा की सियासत तक: सत्येंद्र शर्मा ने पेश की विधानसभा चुनाव लड़ने की दावेदारी

नोएडा विधानसभा सीट पर कांग्रेस की सियासत में नया नाम मजबूती से उभरा है। छात्र राजनीति से शुरुआत कर संगठन में अपनी पहचान बनाने वाले सत्येंद्र शर्मा ने अब नोएडा से विधानसभा चुनाव लड़ने की दावेदारी ठोक दी है। लगातार 5वीं बार यूपी कांग्रेस के को-ऑर्डिनेटर बनने के साथ उनका राजनीतिक और सामाजिक सफर चर्चा में है।

नोएडा विधानसभा के लिए कांग्रेस से सत्येंद्र शर्मा ने ठोकी दावेदारी: छात्र राजनीति से ‘संकटमोचक’ बनने तक का पूरा सफर; 5वीं बार बने यूपी के को-ऑर्डिनेटर

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नोएडा न्यूज़ | उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी कड़ी में नोएडा विधानसभा सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ और जमीन से जुड़े नेता सत्येंद्र शर्मा ने अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर दी है। छात्र राजनीति के गलियारों से निकलकर प्रदेश नेतृत्व में अपनी धाक जमाने वाले सत्येंद्र शर्मा को क्षेत्र में कांग्रेस का एक बड़ा और भरोसेमंद चेहरा माना जाता है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने संगठन के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए हाल ही में उन्हें 5वीं बार को-ऑर्डिनेटर की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। वर्तमान में वे यूपी कांग्रेस कमेटी में को-ऑर्डिनेटर होने के साथ-साथ बागपत और गाजियाबाद के जिला प्रभारी की कमान भी संभाल रहे हैं। बता दें कि सत्येंद्र शर्मा का राजनीतिक सफर किसी पारंपरिक विरासत का मोहताज नहीं रहा, बल्कि उन्होंने अपनी जमीन खुद तैयार की है।उनके सफर की शुरुआत साल 2008 में छात्र राजनीति से हुई।उन्होंने एनएसयूआई (NSUI) और फिर यूथ कांग्रेस में जमीनी स्तर पर काम करके युवाओं की आवाज बुलंद की।इसके बाद उन्होंने महानगर कांग्रेस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और फिर प्रदेश स्तर पर अपनी कार्यकुशलता का लोहा मनवाया। वे उत्तर प्रदेश कांग्रेस में प्रांतीय कांग्रेस कमेटी (PCC) के सदस्य भी रह चुके हैं।

सामाजिक सरोकार और नवाचार: हर सुख-दुख में जनता के साथ!

सत्येंद्र शर्मा की सबसे बड़ी ताकत उनकी जनता के बीच मौजूदगी है। नोएडा के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने में उनका गहरा दखल है।शहर की समस्त रामलीलाओं और प्रमुख सामाजिक संगठनों के आयोजनों में उनकी सक्रिय और अग्रणी भूमिका रहती है।जब देश कोरोना महामारी के सबसे भीषण संकट से जूझ रहा था, तब सत्येंद्र शर्मा ने अपने निजी स्वार्थ और राजनीतिक लाभ-हानि को किनारे रख दिया। उन्होंने संकटकाल में “जनसेवा ही सबसे बड़ा धर्म” के संकल्प के साथ हजारों लोगों तक खाद्य सामग्री, राशन और जीवन रक्षक दवाइयां पहुंचाईं। विपरीत परिस्थितियों में उनके इस साहसिक और मानवीय कार्य ने उन्हें जनता के बीच एक ‘संकटमोचक’ के रूप में स्थापित किया।

संगठन में क्यों हैं खास?

सत्येंद्र शर्मा को उनके साथी और वरिष्ठ नेता एक रणनीतिकार और कुशल प्रबंधक मानते हैं। लगातार 5वीं बार को-ऑर्डिनेटर बनना और दिल्ली से सटे महत्वपूर्ण जिलों (गाजियाबाद और बागपत) का प्रभारी बनाया जाना यह साबित करता है कि कांग्रेस आलाकमान को उनकी कार्यकुशलता और नवाचार (नवे आइडियाज के साथ काम करने की शैली) पर पूरा भरोसा है।नोएडा सीट पर उनकी इस दावेदारी के बाद से स्थानीय कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। सामाजिक कार्यों में उनकी गहरी पैठ और हर वर्ग में उनकी स्वीकार्यता के चलते इस बार नोएडा विधानसभा का मुकाबला बेहद दिलचस्प होने की उम्मीद है।

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