इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम (ITPA) से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल ग्राहक के रूप में वेश्यालय जाने से व्यक्ति के खिलाफ इस कानून के तहत आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। कोर्ट ने गाजियाबाद के नितिन कुमार के खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही और चार्जशीट रद्द कर दी।
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प्रयागराज | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि वेश्यालय (Brothel) में सिर्फ ग्राहक बनकर जाना कोई अपराध नहीं है। हाईकोर्ट के इस बड़े फैसले के अनुसार, अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम (ITPA) के तहत किसी ग्राहक पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकल पीठ के न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी ने गाजियाबाद के एक मामले में सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक कानूनी व्यवस्था दी है। कोर्ट ने वेश्यालय से पकड़े गए एक ग्राहक नितिन कुमार के खिलाफ गाजियाबाद की अदालत में लंबित आपराधिक कार्यवाही और पुलिस चार्जशीट को पूरी तरह से रद्द कर दिया है।कोर्ट ने साफ किया कि अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम (ITP Act) की धारा 3, 4, 5 और 7 मुख्य रूप से वेश्यावृत्ति के व्यावसायिक शोषण और वेश्यालय के संचालन को रोकने के लिए हैं।कोई व्यक्ति अपनी शारीरिक संतुष्टि के लिए पैसे देकर वहां जाता है, तो उसे ‘वेश्यावृत्ति के उद्देश्य’ से आना नहीं माना जा सकता।वेश्यावृत्ति का अपराध तब बनता है जब व्यावसायिक उद्देश्यों या कमाई के लिए किसी का शारीरिक शोषण या दुरुपयोग किया जा रहा हो। ग्राहक इस श्रेणी में नहीं आता।
क्या था पूरा मामला?
साल 2023 का वाकया है गाजियाबाद के शालीमार गार्डन (डीएलएफ पुलिस चौकी क्षेत्र) के पास एक स्थान पर पुलिस ने छापेमारी की थी।पुलिस ने छापेमारी के दौरान आवेदक (नितिन) को एक ग्राहक के रूप में पकड़ा था।पुलिस ने उस पर अनैतिक देह व्यापार कानून के तहत केस दर्ज किया। जांच के बाद उसे आरोपी बनाते हुए कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी।हाईकोर्ट ने मामले के रिकॉर्ड देखने के बाद पाया कि आरोपी केवल एक ग्राहक था। वह किसी व्यावसायिक शोषण में शामिल नहीं था, इसलिए उस पर मुकदमा चलाना कानून का दुरुपयोग है।
