नोएडा में बड़ा सवाल: बच्चों की जेल के नीचे शराब की दुकान, नियमों की उड़ी धज्जियां!

नोएडा में बच्चों के संरक्षण केंद्र के ठीक नीचे शराब की दुकान! सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसी जगह पर मॉडल शॉप का लाइसेंस कैसे मिला? बच्चों की सुरक्षा और माहौल को लेकर उठे इस गंभीर सवाल पर प्रशासन और आबकारी विभाग घिरते नजर आ रहे हैं

News Diary Today | Noida News

नोएडा न्यूज़ | नोएडा के नंगला चरणदास में बाल सुधार गृह (राजकीय प्रेषण गृह-किशोर) के ठीक नीचे मॉडल शराब दुकान (मॉडल शॉप) का संचालन एक गंभीर और संवेदनहीन मामला है। उत्तर प्रदेश आबकारी नियम और बाल न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) के तहत बच्चों के संरक्षण केंद्र या शैक्षणिक संस्थानों के इतने करीब शराब की दुकान खोलना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। मीडिया और स्थानीय निवासियों द्वारा उठाए गए इस बड़े सवाल के बाद जिला प्रशासन और आबकारी विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बता दें कि एक तरफ जहां कानून का उल्लंघन करने वाले नाबालिग बच्चों को सुधारने और उन्हें एक बेहतर माहौल देने के लिए ‘बाल सुधार गृह’ (बच्चों की जेल) चलाया जा रहा है। ठीक उसी परिसर या इमारत के नीचे नंगला चरणदास मॉडल शॉप में सरेआम शराब बिक रही है और छलक रही है।इस विवादित मॉडल शॉप के लाइसेंसधारी (अनुज्ञापी) का नाम अंकित गर्ग बताया जा रहा है।बाल सुधार गृह में रह रहे बच्चों की मानसिक स्थिति बेहद संवेदनशील होती है। ऐसे में सुधार गृह के ठीक नीचे शराबियों का हुड़दंग, गाली-गलौज और शराब की गंध बच्चों के पुनर्वास (Rehabilitation) की प्रक्रिया पर पानी फेर रही है।

बच्चों की जेल के नीचे शराब दुकान की अनुमति कैसे मिली?

इस तरह की अनुमति मिलने के पीछे प्रशासनिक अनदेखी और नियमों को ताक पर रखने के गंभीर आरोप हैं।नियम के अनुसार, किसी भी धार्मिक स्थल, स्कूल, अस्पताल या बाल सुधार गृह से शराब की दुकान की दूरी कम से कम 50 से 100 मीटर (नियमों के अनुसार अलग-अलग राज्यों में तय दूरी) होनी चाहिए।आबकारी विभाग के अधिकारियों ने मौके का मुआयना (Site Inspection) करते समय इस बात को जानबूझकर छिपाया या नजरअंदाज किया कि ऊपर बच्चों का सुधार गृह चल रहा है।कई बार दुकानें सालों से चल रही होती हैं और बाद में उस इमारत या पास में कोई सरकारी संस्थान जैसे बाल गृह खुल जाता है।ऐसे में आबकारी विभाग को दुकान का स्थान बदलवाना (Shift) होता है, लेकिन अनुज्ञापी अंकित गर्ग और अधिकारियों की कथित साठगांठ के कारण इसे वैसे ही चलने दिया गया।महिला एवं बाल विकास विभाग (जो बाल सुधार गृह चलाता है) और आबकारी विभाग (जो शराब लाइसेंस देता है) के बीच कोई संवाद नहीं हुआ।जब यह बिल्डिंग किराए पर या सरकारी तौर पर आवंटित की गई, तब किसी भी विभाग ने इस गंभीर विरोधाभास पर आपत्ति नहीं जताई।‌

क्या कहता है कानून?

यह मॉडल शॉप सीधे तौर पर देश और राज्य के दो बड़े कानूनों का उल्लंघन करती है।बाल न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम – Juvenile Justice Act: यह कानून साफ कहता है कि बच्चों के सुधार गृह के आसपास का माहौल शांतिपूर्ण, नशा-मुक्त और सुरक्षित होना चाहिए ताकि बच्चों का मानसिक विकास हो सके।इस नियम के तहत किसी भी ऐसी जगह पर शराब की दुकान या मॉडल शॉप नहीं खोली जा सकती जो बच्चों, छात्रों या आम जनता की सुरक्षा और नैतिकता को प्रभावित करती हो।

स्थानीय जनता और समाजसेवियों का आक्रोश!

इस खबर के सामने आने के बाद नोएडा के सामाजिक संगठनों और निवासियों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि एक तरफ सरकार बच्चों को नशे से दूर रखने के अभियान चलाती है, वहीं दूसरी तरफ बच्चों के रहने की जगह के नीचे ही शराब का ठेका खोल दिया गया है।”मॉडल शॉप होने के कारण लोग वहीं बैठकर शराब पीते हैं, जिससे शाम के वक्त वहां का माहौल बेहद असुरक्षित और अराजक हो जाता है।

नोएडा मॉडल शॉप विवाद: आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार का बड़ा बयान, दिए जांच के आदेश

नोएडा के जिला आबकारी अधिकारी (DEO) सुबोध कुमार श्रीवास्तव ने news diary today को बताया कि शिकायत का संज्ञान लेते हुए मामले की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है।आबकारी निरीक्षकों (Excise Inspectors) को मौके पर जाकर भौतिक निरीक्षण (Site Inspection) करने के निर्देश दिए गए हैं।विभाग ने साफ किया है कि यदि यह मॉडल शॉप तय नियमों, चौहद्दी मानकों या बाल सुधार गृह की संवेदनशीलता का उल्लंघन करती पाई गई, तो आबकारी नियमों के तहत सख्त कार्रवाई होगी।उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि नियमों की अनदेखी कर दुकान संचालित पाई जाती है या किसी भी स्तर पर चूक मिलती है, तो दुकान के खिलाफ विधिक अनुसार कारवाई या स्थानांतरित (Shift) करने में कोई संकोच नहीं किया जाएगा।

Authors

  • Yogesh Rana
  • Harvir Chauhan

    Harvir Chauhan
    Editor-in-Chief & Founder, News Diary Today

    हरवीर चौहान एक वरिष्ठ पत्रकार, संपादक और मीडिया उद्यमी हैं, जिन्हें समाचार एवं डिजिटल मीडिया क्षेत्र में 10+ वर्षों का अनुभव है। वे Doordarshan Uttar Pradesh और India News जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे NewsDiaryToday.com और ‘न्यूज़ डायरी टुडे’ साप्ताहिक समाचार पत्र के संस्थापक एवं Editor-in-Chief हैं। वे तथ्यपरक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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