उत्तर प्रदेश में हाई-स्पीड रेल का सपना अब तेजी से आकार ले रहा है। प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर से नोएडा, लखनऊ, आगरा, प्रयागराज और वाराणसी समेत कई बड़े शहर जुड़ेंगे। यदि परियोजना तय योजना के अनुसार आगे बढ़ती है, तो दिल्ली से वाराणसी का सफर 4 घंटे से भी कम समय में पूरा हो सकेगा।
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विकास की रफ्तार | दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (DVHSR) परियोजना उत्तर प्रदेश के परिवहन इतिहास में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने जा रही है, जो दिल्ली से बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी के सफर को महज 3 घंटे 55 मिनट में समेट देगी। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) द्वारा तैयार की जा रही इस विस्तृत कार्ययोजना के तहत करीब 865 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड ट्रैक पर बुलेट ट्रेन 320 से 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी। यह नेटवर्क नमो भारत (RRTS) की तरह ही आधुनिक और एकीकृत होगा, जिससे देश के सबसे बड़े राज्य के 22 से अधिक जिले और 11 से 14 बड़े शहर सीधे तौर पर हाई-स्पीड कनेक्टिविटी से जुड़ जाएंगे। बता दें कि इस महा-परियोजना को देश का सबसे लंबा और महत्वपूर्ण बुलेट ट्रेन कॉरिडोर माना जा रहा है क्योंकि मुख्य रूट लगभग 865 किलोमीटर लंबा होगा।दिल्ली से लखनऊ मात्र 2 घंटे 10 मिनट और दिल्ली से वाराणसी का सफर 4 घंटे से भी कम (3.55 घंटे) में पूरा होगा।इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर करीब ₹1.21 लाख करोड़ से ₹1.71 लाख करोड़ खर्च होने का अनुमान है।दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर यह कॉरिडोर यूपी के प्रमुख धार्मिक, औद्योगिक और पर्यटन केंद्रों को आपस में जोड़ेगा।इस हाई-स्पीड रेल नेटवर्क में 13 से 15 स्टेशन बनाए जाने का प्रस्ताव है, जिसमें दिल्ली के बाद उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों को कवर किया जाएगा और लखनऊ से सांस्कृतिक और धार्मिक नगरी अयोध्या को जोड़ने के लिए 135 किलोमीटर का एक अलग हाई-स्पीड लिंक रूट प्रस्तावित किया गया है। इसके जरिए दिल्ली और लखनऊ से आने वाले रामभक्त सीधे बुलेट ट्रेन नेटवर्क के माध्यम से बेहद कम समय में अयोध्या पहुंच सकेंगे।
नमो भारत और अन्य परिवहन माध्यमों से महा-एकीकरण!
यह नेटवर्क सिर्फ एक ट्रेन सेवा नहीं, बल्कि मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब की तरह काम करेगा और जेवर एयरपोर्ट के ग्राउंड ट्रांसपोर्टेशन सेंटर (GTC) के नीचे अंडरग्राउंड स्टेशन बनाया जाएगा। दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट की दूरी (लगभग 70 किमी) इस बुलेट ट्रेन से महज 21 मिनट में तय हो सकेगी।पश्चिमी यूपी में जहां एक तरफ गाजियाबाद-जेवर एयरपोर्ट, दिल्ली-शामली जैसे नए नमो भारत कॉरिडोर को मंजूरी मिल रही है, वहीं बुलेट ट्रेन इनके साथ सिंक होकर एक विशाल हाई-स्पीड ग्रिड तैयार करेगी।इस ट्रैक के आसपास उत्तर प्रदेश सरकार नए आर्थिक क्षेत्र और आधुनिक टाउनशिप (नए शहर) बसाने की योजना पर काम कर रही है, जिससे रोजगार और जमीन आवंटन को नई गति मिलेगी।इस कॉरिडोर के निर्माण के लिए NHSRCL ने सिविल स्ट्रक्चर डिजाइन के टेंडर प्रक्रिया को पहले ही गति दे दी है, और जल्द ही भूमि अधिग्रहण व आवंटन को लेकर राज्य सरकार के साथ अंतिम दौर की बैठकें पूरी की जा रही हैं।
प्रस्तावित स्टेशनों की सूची (यूपी के 11+ बड़े शहर)?
1-दिल्ली (सराय काले खां / हजरत निजामुद्दीन): कॉरिडोर का शुरुआती प्रस्थान बिंदु।
2-नोएडा (सेक्टर-148): दिल्ली से सटकर पहला हाई-स्पीड स्टॉप।
3-नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर): यह देश का पहला ऐसा एयरपोर्ट बनेगा जो बुलेट ट्रेन, नमो भारत और एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ेगा। यहाँ स्टेशन अंडरग्राउंड (भूमिगत) होगा।
4-मथुरा (इटौली गांव): इसके बनने से बांके बिहारी मंदिर (वृंदावन) आने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी।
5-आगरा (ऐत्मादपुर): पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए ताजमहल के निकट कनेक्टिविटी।
6-फिरोजाबाद: कांच नगरी के व्यापारियों के लिए सीधी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी।
7-इटावा: पश्चिमी और मध्य यूपी को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण स्टेशन।
8-कन्नौज (साउथ कन्नौज): इत्र नगरी को सीधे राजधानी लखनऊ और दिल्ली से जोड़ा जाएगा।
9-लखनऊ: राज्य की राजधानी में मुख्य बुलेट ट्रेन हब बनेगा, जहां के लिए 4 संभावित स्थानों पर मंथन चल रहा है।
10-रायबरेली: मध्य उत्तर प्रदेश का एक और महत्वपूर्ण स्टॉपेज।
11-प्रयागराज: संगम नगरी आने वाले श्रद्धालुओं और यात्रियों के लिए समय की भारी बचत।
12-न्यू भदोही: कालीन उद्योग के अंतरराष्ट्रीय हब के लिए व्यावसायिक रूप से फायदेमंद।
13-वाराणसी (मंडुआडीह): कॉरिडोर का अंतिम गंतव्य स्टेशन।